आगरालीक्स... षटतिला एकादशी कल बुधवार को है। व्रत रखने से होता है पापों का नाश। दान-पुण्य का भी है महत्व। जानिये विस्तार से।

माघ माह में होती है षटतिला एकादशी

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान, गुरु रत्न भंडार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदयरंजन शर्मा बताते हैं कि माघ माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी व्रत रखा जाता है।
अनजाने में किए गए पाप होते हैं खत्म
पुराणों के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से इससे मनुष्य के अनजाने में किये सभी पाप समाप्त हो जाते है तथा उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से षटतिला एकादशी का व्रत रखते हैं, उनके सभी पापों का नाश होता है।
षटतिला एकादशी व्रत विधि
🍁 एक बार दालभ्य ऋषि ने पुलस्त्य ऋषि से पूछा कि मनुष्य कौन सा दान अथवा पुण्य कर्म करे जिससे इनके सभी पापों का नाश हो, तब पुलस्त्य ऋषि ने कहा कि हे ऋषिवर माघ मास लगते ही मनुष्य को सुबह स्नान आदि करके शुद्ध रहना चाहिए। स्वच्छ वस्त्र धारण करें. व्रत करने का संकल्प करके भगवान विष्णु जी का ध्यान करना चाहिए।
कैसे करें पूजा
🍁 पूरे वर्ष में पड़ने वाली अन्य 24 एकादशी से षटतिला एकादशी की पूजा थोड़ा भिन्न होती है। इसकी पूजा के लिए एक दिन पूर्व माघ माह कृष्ण पक्ष की दशमी को भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए गोबर में तिल मिलाकर 108 उपले बनाने चाहिए। एक समय भोजन करना चाहिए और भगवान का स्मरण करना चाहिए।
सांयकाल ऐसे करें पूजा
🍁 षटतिला एकादशी की रात को भगवान का भजन- कीर्तन करना चाहिए। साथ ही रात्रि को 108 बार “ऊं नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए उपलों को हवन में डालते हुए स्वाहा करना चाहिए। पूजा के बाद दान करें।
तिल का महत्व
♦️विभिन्न मान्यताओं के अनुसार षटतिला एकादशी पर तिल से भरा हुआ बर्तन दान करना बेहद शुभ माना जाता है। एसा नहीं होने पर अन्य वस्तुओं का भी दान किया जा सकता है।
♦ षटतिला की तिथि और मुहूर्त
🍁 एकादशी तिथि प्रारम्भ = 17 जनवरी कोpm 06:05 बजे से
🍁 एकादशी तिथि समाप्त = 18 जनवरी को pm 04:02 बजे
🍁पारण (व्रत तोड़ने का) समय = 19 जनवरी प्रातः 07:19 से 09:11
🍁पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय 19 जनवरी pm = 01:18