आगरालीक्स…वीडियो देखें, रिश्तेदारी में शादी से मूकबधिर बच्चे हो सकते हैं पैदा. एसएन में भी कॉक्लियर इम्प्लांट होगा जिससे मूक बधिर बच्चे सुन और बोल सकेंगे…
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में गुरुवार को जन्मजात मूक बधिर बच्चों के इलाज पर चर्चा की गई. पद्मश्री डॉ. जे.एम. हंस ने बताया कि एक छोटी सी टनल बनाकर मूक बधि बच्चों में कॉक्लियर इम्प्लांट कर दिया जाता है जिससे बचचे बोलने और सुनने लग जात हैं. पहले कॉक्लियर इम्प्लांट करने में 2 से तीन घंटे का समय लगता था अब आधा घंटे में कॉक्लियर इम्प्लांट संभव है. मगर यह जितना जल्दी हो जाए उतना अच्छा है. छह महीने से अधिक उम्र के बच्चों में कॉक्लियर इम्प्लांट किया जा सकता है.एसएन में भी कॉक्लियर इम्प्लांट की सुविधा
ईएनटी विभाग ने अपनी नई Temporal Bone Dissection Lab की शुरुआत की और जल्द ही संस्थान में पूर्ण कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम आरंभ करने की घोषणा की. विभाग का मानना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में यह कार्यक्रम शुरू होने से दोनों समस्याओं को काफी हद तक हल किया जा सकेगा, जिससे ज़रूरतमंद मरीजों को समय पर और सुलभ इलाज मिल पाएगा. कुछ सरल जांचों से यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि बच्चा ठीक से सुन पा रहा है या नहीं. यदि सुनने में कमी पाई जाती है, तो समय पर कॉक्लियर इम्प्लांट की तैयारी की जा सकती है, जो बच्चे के भविष्य को पूरी तरह बदल सकता है.
कार्यक्रम में विभाग की ओर से विभागाध्यक्ष डॉ. प्रो.रितु गुप्ता ने सीएमई का नेतृत्व किया और अध्यक्षता प्रिंसिपल डॉ. प्रो. प्रशांत गुप्ता और संचालन डॉ. सलोनी सिंह ने किया. सीनियर प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. सौमिता नीरज, तथा अन्य पोस्टग्रेजुएट डॉक्टरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अखिल द्वारा प्रस्तुत किया गया.