
उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के होकरा के मूल निवासी और अब यहां सैनिक नगर रह रहे प्रताप सिंह मेहता के तीन बेटों में मंझले गोविंद वर्ष 2002 में सेना में भर्ती हुए थे। तभी से वह जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। प्रताप सिंह भी सेना से रिटायर हैं। गोविंद के बड़े भाई महेंद्र सिंह आगरा में 5 पैरा में तैनात हैं, जबकि छोटे जीवन सिंह सेना में भर्ती होने ही बंगलुरू गए हुए हैं। गोविंद ने भोजराज नगर में मकान बनवा लिया था। यहां पत्नी रेखा, बेटी तनीषा (9) और बेटे दक्ष (7) के साथ रहती हैं। शहादत की खबर मिलने के बाद से मां कमला देवी का रो-रोकर बुरा हाल है तो रेखा सुधबुध ही खो बैठीं। उन्हें ढांढस बंधाने वाले भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। उनकी आंखें दरवाजे पर ही टिकी थीं। आंसू नहीं थम रहे थे।
आतंकियों से हुई मुठभेड
एलओसी से भारत में घुसपैठ कर रहे तीन-चार आतंकवादियों के ग्रुप से हुई मुठभेड़ के बाद जीओसी मेजर जनरल डीए चतुर्वेदी ने बताया कि वे आईईडी लगाकर सेना के गश्ती दल को उड़ा देना चाहते थे। सेना ने न सिर्फ उन्हें वापस खदेड़ा बल्कि दो आईईडी खोज उसे निष्क्रिय भी कर दिया। उन्होंने कहा कि गोविंद सिंह की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। सेना पाकिस्तान की हर नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब देगी। इससे पहले शहीद गोविंद सिंह को ऐस ऑफ स्पेड्स श्रद्धांजलि दी गई। जवानों ने गॉर्ड ऑफ आनर भी दिया। जीओसी सहित डिवीजन के अन्य अधिकारियों ने पुष्पांजलि अर्पित की।
सेना पदक के हुआ था चयन
जांबाज गोविंद ने पहले भी एक आतंकवादी को मार गिराया था। उनका चयन सेना पदक के लिए हो चुका था। वह कई माह से घर नहीं आए थे। दीवाली पर आने की उम्मीद थी। तनीषा और दक्ष उनका इंतजार कर रहे थे।
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