आगरालीक्स…… मुगल सल्तनत के तीसरे बादशाह अकबर (1555 से 1605 ) बीरबल के साथ आगरा घूमने के लिए निकल पडे, वे जैसे ही आगरा पहुंचे, यहां सडक पार करते ही वे स्कूटर से टकरा गए, यह स्कूटर नशे में धुत कालू चला रहा था, यहां से ‘जाम के झाम में अकबर’ कथानक शुरू होता है। एक तरफ अकबर और बीरबल और दूसरी तरफ आगरा का नशेडी कालू, रंगलीला ने ‘जाम के झाम में अकबर” से आगरा में सिविक सेंस, यातायात की समस्या के ज्वलंत मुददे को तर्कों और मौजूदा दौर की परिस्थिति के हिसाब से उठाया है। अकबर कहते हैं कि जिसे देखो वही जल्दी में है, इससे देश में हर एक मिनट में एक एक्सीडेंट होता है, हर रोज 377 लोग मारे जाते हैं, इसके लिए हम सभी जिम्मेदार हैं, जिसके किसी अपने की एक्सीडेंट में मौत हुई है, उससे पूछिए, उसकी पथराई आंखें, भाव शून्य चेहरा यही बयां करता है कि काश उस दिन वह घर पर ही रहता। रंगलीला द्वारा सुबह सुबह नुक्कड नाटक का जगह जगह मंचन किया जा रहा है। इसे देखते ही भीड भी थम जाती है। मौका मिले तो आप भी देखिए। इसमें मनोज सिंह (अकबर) बीरबल ( योगेन्द्र दुबे) मनोज शर्मा (कालू) काजल गुप्ता ( कालू की बीबी) सामाजिक कार्यकर्ता (शशांक जैन), चौधरी( वीरेंद्र सिंह) के किरदार में हैं. लेखन मनमोहन भारद्वाज और निर्देशक अनिल शुक्ला हैं. सहभागी दीपक, राकेश यादव और रवि आदि.
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