जयपुरलीक्स…संथारा लेने वाली गुलाब देवी की मृत्यु से पहले अंतिम यात्रा धूमधाम के साथ निकाली गई। बैंड-बाजों के साथ लोग नाचते गाते खुशियां मनाते निकले।

पति-पत्नी ने एक साथ लिया था संथारा
जोधपुर के जसोल गांव की रहने वाली गुलाब देवी ने अपने पति पुखराज के साथ 24 दिन पूर्व संथारा लिया था। यहपहली घटना है जब पति-पत्नी ने एक साथ संथारा लिया था। पति पुखराज ने तो 17 वें दिन देह को त्याग दिया था।
भजन-कीर्तन के साथ निकली यात्रा
गुलाब देवी के संथारा का आज 24वां दिन है। मृत्यु के करीब पहुंचने पर आज गुलाब देवी को लाल साड़ी में महेंदी लगाकर सजाया गया और उनकी मृत्यु से पहले अंतिम यात्रा खुशी के माहौल में निकाली गई। भजन-कीर्तन का दौर तो 24दिन से चल रहा है।
संथारा से पहले धीरे-धीरे छोड़ी जाती है चीजें
जैन समाज में संथारा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। संथारा एक साथ शुरू नहीं किया जाता है बल्कि काफी समय पहले से एक-एक वस्तु का त्याग किया जाता है फिर अन्न-जल छोड़ दिया जाता है, जिसे फिर दोबारा ग्रहण नहीं किया जाता।