आगरालीक्स… आगरा के ताजमहल को लेकर पांच महीने से विवाद गर्माता जा रहा है। पर्यटन बुकलेट से नाम हटाने के बाद ताजमहल को तोडने और गददारों द्वारा ताजमहल का निर्माण कराए जाने के बयान आ चुके हैं। पढे पूरा मामला
15 जून को उत्तरी बिहार के दरभंगा में सीएम योगी आदित्यनााथ ने कहा था, “देश में आने वाले विदेशी गणमान्य व्यक्ति ताजमहल और अन्य मीनारों की प्रतिकृतियां भेंट करते थे जो भारतीय संस्कृति को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। लेकिन अब यानी मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से विदेशी गणमान्य जब भारत आते हैं तो वो भगवद गीता और रामायण की प्रति भेंट करते हैं।” उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया था।
11 जुलाई को योगी आदित्य नाथ सरकार ने पहला बजट पेश किया, बजट में “हमारी सांस्कृतिक विरासत” सेक्शन से ताजमहल नदारद है। 63 पन्नों के बजट में ताजमहल का कोई जिक्र नहीं है।
3 अक्टूबर को जारी की गई उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन स्थलों की ‘अद्भुत विरासत अनूठे अनुभव’ बुकलेट में ताजमहल का नाम नहीं
पर्यटन मंत्री ने दी सफाई
पर्यटन मंत्री राती बहुगुणा जोशी का कहना है कि ताजमहल ऐतिहासिक स्थल है न कि तीर्थ स्थल नहीं है। मंत्रालय द्वारा जारी की गई सूची तीर्थस्थलों की है। इसलिए तीर्थस्थलों के नाम ही शामिल किए गए हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
4 अक्टूबर को पूर्व मंत्री आजम खान ने कहा कि ताजमहल, कुतुब मीनार, लाल किला और संसद गुलामी की निशानी हैं, यूपी सरकार ने अच्छी पहल की है. कहा कि एक जमाने में बात चली थी कि ताजमहल को गिराना चाहिए, अगर योगी जी इस तरह का निर्णय लेंगे तो उन्हें हमारा भी सहयोग रहेगा
17 अक्टूबर को गोरखपुर में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ताजमहल हमारे मजदूरों की खून पसीने की देन है।