आगरालीक्स…31 साल के हरीश को मिलेगी इच्छामृत्यु. सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत…बीटेक के छात्र हरीश की 13 साल की मार्मिक कहानी, परिवार की पीड़ा रुला देगी…
गाजियाबाद के रहने वाले 31 साल के हरीश राणा को इच्छामृत्यु दी जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने परिजनों की याचिका पर पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है. देश में यह पहला केस है और इस निर्णय को भारत में मानव गरिमा के साथ मरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. कोर्ट ने यह फैसला 2018 के कॉमन कॉज मामले में दिए गए अपने ऐतिहासिक निर्णय और 2023 में जारी किए गए संशोधित दिशानिर्देशों के आधार पर सुनाया है.बीटेक का छात्र था हरीश, 2013 में हुआ हादसा
गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज अंपायर में 31 साल के हरीष राणा करीब 13 साल से बिस्तर पर हैं. हरीश की सांसें तो चल रही हैं लेकिन शरीर पूरी तरह से निर्जीव हो चुका है. वह क्वाड्रिप्लेजिया बीमारी से पीड़ित हैं और 100 प्रतिशत दिव्यांग हो चुके हैं. वर्ष 2013 में रक्षाबंधन के दिन हरीश पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे. इस हादसे में उनके सिर और कमर में गंभीर चोट आई थी. परिवार को उम्मीद थी कि हरीश जल्द ठीक हो जाएंगे लेकिन हादसे के बाद से वह बिस्तर से नहीं उठ पाए.
13 साल के संघर्ष की मार्मिक कहानी
मेडिकल बोर्ड ने बताया कि हरीश क्वाड्रिप्लेजिया बीमारी से पीड़ित हैं और 100 प्रतिशत दिव्यांग हो चुके हैं और उनके रिकवरी के कोई चांस नहीं है. 13 साल से हरीश की देखभाल उनकी मां निर्मला देवी और पिता अशोक राणा कर रहे हैं. उम्र ढल रही है और माता—पिता परेशान हैं कि उनके जाने के बाद उनके बेटे का क्या होगा. हरीश की मां निर्मला देवी ने बेटे की इच्छा मृत्यु की की अनुमति के लिए पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी लेकिन 8 जुलाई को अदालत ने उनकी अपील को खारिज कर दिया. इसके बाद परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
परिवार की पीड़ा
पिता अशोक राणा ने बताया कि उम्र ढल रही है. डर सता रहा है कि वे हमेशा अपने बेटे के साथ नहीं रह पाएंगे. 2021 में दिल्ली के महावीर एंक्लवे स्थित अपना तीन मंजिला मकान भी इलाज में बेच दिया. अब परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो चुकी है और आगे इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं रह गया है. ऐसे में वो बेटे को इस पीड़ा से मुक्ति दिलाने और उसके अंगों के माध्यम से दूसरों को जीवन देने की इच्छा रखते हें. उन्होंने कहा कि ऐसे में बेटे के लिए इच्छा मृत्यु की मांग करना उनके लिए आसान नहीं था लेकिन हर दिन उसे इस हालत में देखना भी उनके लिए बहुत पीड़ादायक है. माता पिता चाहते हैं कि इच्छा मृत्यु की अनुमति मिलने के बाद हरीश के शरीर के जो अंग काम कर रहे हैं, उन्हें दान कर दिया जाए ताकि दूसरों को नया जीवन मिल सके.
हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया नाम की बीमारी है जिसे टेट्राप्लेजिया के नाम से भी जाना जाता है. यह एक अत्यंत गंभीर तंत्रिका संबंधी स्थिति है जिसमें व्यक्ति के शरीर के चार प्रमुख अंग दोनों हाथ, दोनों पैर लगवाग्रस्त हो जाते हैं जिससे उनकी गतिशीलता और कार्यक्षमता पर गहरा असर पड़ता है. यह स्थिति मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी में, विशेषकर गर्दन के क्षेत्र में, गंभीर चोट लगने या किसी बीमारी के कारण उत्पन्न होती है.
कोर्ट ने कही ये बात
इच्छा मृत्यु का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने दिया. कोर्ट ने साफ किया कि चाहे किसी भी व्यक्ति से कितना भी प्यार किया जाए, अगर उसके ठीक होने की संभावना नगण्य है तो जीवन सहन चिकित्सा केवल उसके शरीर को जिंदा रखेगी, न कि उसकी जीवन गुणवत्ता को. कोर्ट ने हरीश राणा के माता पिता की भी सराहना की. कोर्ट ने कहा कि उनके माता पिता ने 13 साल तक अपने बेटे का साथ नहीं छोड़ा और लगातार उसकी देखभाल की यह उनके प्रेम और समर्पण को दिखाता है.