आगरालीक्स… गौरी तृतीया व्रत 14 फरवरी को है। संतान औऱ पति सुख के लिए यह व्रत रखा जाता है। इस व्रत को रखने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
श्रीगुरु ज्योतिष शोध संस्थान अलीगढ़ के अध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक गौरी तृतीय व्रत माघ मास शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस बार यह 14 फरवरी को है और पूरे दिन तृतीया तिथि मान्य रहेगी। इस दिन माता गौरी की पूजा की जाती है, जिससे सुहाग और संतान की रक्षा होती है। इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं संतान और पति सुख प्राप्त करती हैं। कन्याओं को मनचाहा पति मिलता है।
तीज की तरह मनाया जाता है त्योहार
इस त्योहार के दिन महिलाएं या कन्या तीज की तरह सजती-संवरती हैं। मेहंदी लगाती हैं। वहीं सुहागिन महिलाएँ दुल्हन की तरह सजती हैं और मंदिर जाती हैं। शिव और उसके पूरे परिवार की आराधना की जाती है।
गौरी तृतीया व्रत की कथा
गौरी तृतीया व्रत की महिमा के संबंध में पुराणों में उल्लेख किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि दक्ष को पुत्री के रूप में सती की प्राप्ति होती है। सती माता ने भगवान शिव को पाने को जो तप औऱ जाप किया, उसका फल उन्हें प्राप्त हुआ। माता सती के अनेक नाम हैं, जिसमें गौरी भी उन्ही का एक नाम है। शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान शंकर के साथ देवी सती का विवाह हुआ था। अतः माघ शुक्ल तृतीया के दिन उत्तम सौभाग्य की कृपा प्राप्त करने के लिए यह व्रत किया जाता है। यह व्रत सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाला है।
माता गौरी समेत शिव परिवार को क्या चढ़ाएं
-शिव परिवार को लाल, पीले फूल, लड्डू, बेलपत्र, धतूरा चढ़ाएं।
-शिवजी का दूध, जल और चावल से अभिषेक करें।
-गणपति को तिल, गुड़ के लड्डू और केला का भोग लगाएं।
-रेवड़ी भी चढ़ाई जा सकती है। इसके बाद तिल बांटें और दान करें।