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ISOP 16th annual conference: Misuse of Ayurvedic medicine is dangerous

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आगरालीक्स… एलोपैथिक की तरह ही आयुर्वेद की दवाओं का मिसयूज घातक हो रहा है। दवाएं किसी भी पद्धति की हों, इनके इस्तेमाल के लिए सख्त गाइड लाइन और निगरानी होनी चाहिए। इस पर होटल आईटीसी मुगल में चल रही इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ फार्माकोविजिलेंस आईएसओपी की 16 वीं एनुअल कांफ्रेंस के तीसरे दिन मंगलवार को चर्चा हुई।
आयुर्वेद चिकित्सक श्री राम सावरिकर, मुंबई ने बताया कि एक आयुर्वेद दवा के इस्तेमाल के बाद न्यूआर्क में स्टडी की गई, इसके इस्तेमाल से शरीर में लेड की मात्रा बढ गई। इस दवा को कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया। जबकि समस्या दवा में नहीं बल्कि तीन दिन की बजाय एक हफ्ते तक दवा लेना थी। इसी तरह से एलोपैथिक दवाओं के साइड इफेक्ट सामने आने के बाद उन्हें प्रतिबंधित कर देना चाहिए। वैक्सीन और कई अन्य दवाओं का भी गलत इस्तेमाल हो रहा है। हेपेटाइटिस, बीसीजी सहित अन्य वैक्सीन का इस्तेमाल भी सही तरह से होना चाहिए, नई तरह की वैक्सीन बाजार में आ रही हैं और उनका गलत इस्तेमाल होने लगा है। यहां तक कि हाल ही में डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा का दिल पर कोई असर नहीं पडता है। इसके बाद भी तमाम दवाएं हैं जो कॉलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने के लिए दी जा रही हैं। डॉ सुरेश, राष्ट्रीय आयुर्वेदिक कॉलेज जयपुर ने बताया कि भारत में आयुर्वेद है, इसी तरह चीन में इलाज की अपनी पद्धति है, वह इन दवाओं को एक्सपोर्ट करता है। अब भारत भी आयुर्वेदिक दवाओं को एक्सपोर्ट करने लगा है, इससे चीन के बाजार पर असर पड रहा है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को साइंटिफिक एनालाइसिस के साथ बाजार में लाया जाए तो अच्छे रिजल्ट आएंगे। हमारे देश में पहले सर्दी खांसी जुकाम का इलाज तुलसी के पत्ते से हो जाता था। जिसके लिए आज हम हजारों रुपए खर्च कर रहे हैं। इन्हें बढावा देने की जरूरत है। डॉ रवि नारायण गुजरात विवि ने बताया कि हर्बल और आयुर्वेद में अंतर है, एलोपैथिक की तरह ही आयुर्वेद में झोलाछाप आ गए हैं, एक दवा जिसे तीन दिन लेना चाहिए वह एक महीने तक ली जा रही है। इससे भी समस्या आने लगी है। इस दौरान आयोजन चेयरमैन प्रो केसी सिंघल, एसओपीआई के अध्यक्ष प्रो गोविंद मोहन, सचिव डॉ संदीप अग्रवाल, डॉ पारुल अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

मलेरिया और पैरासीटामोल का भी मिसयूज
बुखार के मरीजों में इम्पेरिकल ट्रीटमेंट के रूप में एंटी मलेरियल ड्रग दे दी जाती है, इसका पूरा कोर्स भी नहीं किया जाता। इससे यह घातक हो सकता है। इसी तरह पैरासीटामोल के कई साइड इफेक्ट हैं, इसे भी डॉक्टर के परामर्श के बाद ही लेना चाहिए।
बैक्टीरिया और वायरस में भी होता है म्यूटेशन
एक बार दवाएं बनने के बाद वही दी जाती हैं, जबकि बैक्टीरिया और वायरस में म्यूटेशन होता है, उनके इस बदलाव से दवाएं असर नहीं करती हैं। इस दिशा में भी काम होना चाहिए।

बीपी में बिना परामर्श के न खाएं दवा
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए अपने पड़ोसी या किसी परिजन की देखादेख खुद दवा लेकर कंट्रोल करने की कोशिश न करें। यह घातक हो सकता है। बीपी कंट्रोल की दवा में अलग-अलग सोल्ट अलग-अलग मात्रा में होते हैं। जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि बीपी का कारण गुर्दे से, दिल से या फिर तनाव में से किस कारण है।

इसका रखें ध्यान
रात में दही का सेवन करने से कफ बनता है
नॉन वेज के साथ दूध का सेवन नहीं करना चाहिए, इन दोनों की तासीर अलग अलग होती है
शहद को गर्म ब्रेड सहित अन्य किसी गर्म खाद्य पदार्थ के साथ नहीं लेना चाहिए, यह टॉक्सिक हो जाता है
पंजाम्रत में घी और शहद की मात्रा में अंतर होना चाहिए, एक समान मात्रा मिलाने पर यह टॉक्सिक बन जाता है
पकी हुई मूली नहीं खानी चाहिए
जिन लोगों की गर्म तासीर है और पित्त की समस्या है तो बैगन का इस्तेमाल ना करें
आयुर्वेद विवि गुजरात, जामनगर के प्रो. रवि नारायण आचार्य ने बताया

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