आगरालीक्स…..जॉन्स मिल मामले में लोगों ने कोर्ट के आदेश आने तक जांच रोकने की मांग की.
शनिवार को जॉन्स मिल संघर्ष समिति के लगभग 250 सदस्य कलेक्ट्रेट पहुंचे. एएसडीएम सदर पीसी आर्य से मुलाकात की. शपथ पत्र जमा करने के साथ ज्ञापन सौंपा और कोर्ट का आदेश आने तक प्रशासन द्वारा की जा रही जांच रोकने की मांग की. साथ ही 25-30 पन्नों का आपत्ति पत्र दिया. जिसमें एडीएम ई द्वारा 277 पन्नों की जांच को खारिज करने की मांग की.
एडीएम द्रारा 23 खसरों की जांच हो रही थी. जिसमें 2087 नम्बर खसरे में नजूल व राजस्व की कोई सम्पत्ति नहीं है. इसके बावजूद वहां प्रसासन द्वारा पानी, बिजली मरम्मत, नए निर्माण हस्तांतरण व नक्शे पास करने पर रोक लगा दी गई है. हाईकोर्ट द्वारा विभिन्न खसरों पर प्रशासन को नजूल की भूमि पर स्टे आर्डर दिया गया है. समिति द्वारा प्रशासन को यह भी अवगत कराया गया कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार धारा 110 का अनुपालन करते हुए कोर्ट द्वारा डिक्री प्रक्रिया का पालन करे. समिति के अधिवक्ता बृजेन्द्र रावत, हरीश बत्रा, कृष्ण कुमार रावत, एडवोकेट चाहर, विवेक शर्मा ने कलेक्ट्रेट में मौजूद जॉन्स मिल संघर्ष समिति के सदस्यों की सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा यह जांच पूरी प्रशासनिक मशीनरी का प्रयोग करके चाह माह से अधिक समय लेकर अपने घर पर तैयार की गई है. जिसमें पीड़ित पक्ष को सुना ही नहीं गया. लगभग 100 वर्ष पुराना विषय है, प्रशासन पीड़ित पक्ष से चाहता है कि वह अपना जवाब 14 दिन में प्रस्तुत करे, जो कि निराधार है.
इनकी रही विशेष उपस्थिति
समिति के संरक्षक बृजमोहन अग्रवाल, दयानन्द नागरानी, उमाशंकर माहेश्वरी, अनिल जैन, प्रमोद अग्रवाल, हर्ष गुप्ता, पंकज बंसल, मनोज अग्रवाल, अंशुल दौनेरिया, संजय खंडेलवाल, पंकज जैन, कन्हैया अग्रवाल, अरुण गुप्ता, विशाल बंसल, अतुल बंसल, पंकज मरौठिया, अनुभव अग्रवाल, कृष्णा अग्रवाल, सतीश गर्ग, सुनील जैन, अलंकृत जैन, आकाश जैन, विपुल गुप्ता, राजाराम, अमरीष अग्रवाल आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे.