आगरालीक्स… आगरा में आपके बच्चों के हाथ और कलाइयों में दर्द होता है तो यह अर्थराइटिस की समस्या हो सकती है। बच्चों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं और इनका इलाज भी आसान नहीं है। ऐसा इसलिए कि बच्चे अपनी बीमारी या समस्या के बारे में ठीक से बता नहीं सकते। ऐसे में माता-पिता और डाॅक्टर की भूमिका बढ़ जाती है। यह कहना है देश के प्रतिष्ठित बाल रोग विशेषज्ञों का।
इंडियन जनरल आफ पीडिएट्रिक्स के तत्वावधान में एसएन मेडिकल काॅलेज के बाल रोग विभाग द्वारा ‘बाल चिकित्सा क्षेत्र में आधुनकि तकनीकें’ विषय पर एक दिवसीय सम्मेलन फतेहाबाद रोड स्थित होटल अमर में आयोजित किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन शाम पांच बजे मुख्य अतिथि मंडलायुक्त अनिल कुमार, विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं अन्य माइक्रोबैक्टीरियल रोग संस्थान के निदेशक डा. श्रीपद् ए पाटिल एवं एसएन मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य डा. जीके अनेजा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया।

मुख्य अतिथि ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं चिकित्सकों के आपसी ज्ञानवर्धन के लिए होती हैं, लेकिन प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इनका लाभ मरीजों को मिलता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद डा. श्रीपद् ए पाटिल और डा. जीके अनेजा ने कार्यशाला को युवा चिकित्सकों और मरीजों दोनों के लिए ही लाभकारी बताया। आयोजन अध्यक्ष एसएन मेडिकल काॅलेज में बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डा. राजेश्वर दयाल ने बताया कि बच्चों में न सिर्फ जटिल रोग बढ़ रहे हैं बल्कि दुर्लभ बीमारियां सामने आ रही हैं। ऐसे में बाल चिकित्सा क्षेत्र का दायरा बढ़ रहा है। तमाम बीमारियां हैं जिनकी पहचान, उनके होने की वजह तलाशने और उनकी रोकथाम के लिए दुनिया भर में शोध हो रहे हैं। ऐसे में आगरा में यह एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित हुई है, जिसमें बच्चों से जुड़ी तमाम बीमारियों और उनकी रोकथाम के तौर-तरीकों, दिशा-निर्देशों पर मंथन चल रहा है। कार्यशाला में मेदांता मेडिसिटी गुड़गांव, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़, फोर्टिस हाॅस्पिटल फरीदाबाद के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से बाल रोग विशेषज्ञ एकत्रित हुए हैं। वहीं आगरा में एसएन मेडिकल काॅलेज के मेडिकल छात्रों, अलीगढ़, मथुरा, फिरोजाबाद समेत आस-पास के क्षेत्रों को मिलाकर तकरीबन 200 डाॅक्टर इस सम्मेलन में शामिल हुए हैं।
सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित तकनीकी सत्रों में मेदांता मेडिसिटी गुड़गांव में पीडिएट्रिक न्यूरोलाॅजी विभाग कीं डा. प्रतिभा सिंघी ने बच्चों में दौरों की समस्या विषय पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिकतर बच्चों में दौरे पड़ने के कारणों का पता नहीं चल पाता। बच्चों में दौरे पड़ने के अधिकतर मामले तब सामने आते हैं जब परिवार के किसी सदस्य को पहले कभी दौरे पड़ने की समस्या हो।

इसके अन्य मामलों में इन्फेक्शन जैसे मेनिनजाइटिस, विकास में समस्या जैसे सेरेब्रल पाल्सी, सिर में चोट या बुखार आदि हो सकते हैं। हालांकि यह माता-पिता को डरा सकते हैं। इनका इलाज मुमकिन है अगर सही समय पर और अनुभवी डाॅक्टर से सलाह ली जाए। पीजीआई चंडीगढ़ से आए डा. सुरजीत सिंह ने बच्चों में आॅर्थराइटिस की समस्या पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गठिया को बुढ़ापे का रोग समझा जाता है, लेकिन इसकी जद में बच्चे और किशोर भी आते हैं। किशोरों में गठिया को जुवेनाइल रूमेटाइड कहते हैं। इससे पांच साल के बच्चे से 17 साल तक के किशोर प्रभावित होते हैं। प्रारंभिक लक्षण सूजन, जलन, दर्द, शरीर पर रैसेज, तेज बुखार, चलने फिरने में दिक्कत, कलाई या घुटने मोड़ने में परेशानी होती है। कई बार इसे माता-पिता मौसम बदलने से हुई परेशानी समझकर नजन अंदाज कर देते हैं, लेकिन इस पर गौर करना चाहिए। फोर्टिस हाॅस्पिटल फरीदाबाद के डा. वीपी चौधरी ने सीबीसी जांच पर जानकारी देते हुए बताया कि कैसे शुरूआत में ही कराई जाने वाली यह जांच इलाज के आगे की रूपरेखा तय करती है। एम्स दिल्ली के डा. एसके काबरा ने एक्सरे जांच के महत्व और इसके तकनीकी विकास पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले जो चीजें जांच में छूट जाती थीं, या पकड़ में नहीं आती थीं, उन्हें अब आसानी से पकड़ा जा सकता है। मेदांता मेडिसिटी के डा. सुनीत सिंह ने गंभीर बाल रोगियों, बच्चों की दुर्लभ बीमारियों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चों को आईसीयू में कैसी देखभाल की जरूरत पड़ती है।
आयोजन के सह-अध्यक्ष डा. नीरज कुमार और डा. मधु सिंह ने बताया कि यह सम्मेलन ज्ञान साझा करने का बेहतरीन मंच है। इतनी बड़ी संख्या में देश भर के विशेषज्ञों के एक साथ एकत्रित होने से बाल चिकित्सा के क्षेत्र में हुई नई प्रगति और नई तकनीक के बारे में बेहद उपयोगी बातें जानने का अवसर युवा चिकित्सकों को मिला।