आगरालीक्स…महाशिवरात्रि पर वर्षों बाद बन रहा ये खास संयोग. शुभ योग के साथ जानें चारों प्रहर का मुहूर्त का समय सहित पूजा की जानकारी
हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पावन त्यौहार मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक माना जाता है और हिन्दू धर्म में अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को पड़ रही। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि 2026 पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो इस दिन की पूजा और व्रत को और अधिक फलदायक बनाते हैं। सबसे प्रमुख योग है सर्वार्थ सिद्धि योग, जिसे अति शुभ और दुर्लभ माना जाता है। इस योग में की गई पूजा, जप और व्रत सभी प्रकार की बाधाओं को दूर कर सफलता प्रदान करते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव, मानसिक शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसके साथ ही इस दिन अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है। वहीं, 15 फरवरी को शिववास योग भी बन रहा है, जिसमें विशेष रूप से रुद्राभिषेक और शिवलिंग की विधिपूर्वक पूजा करने का अत्यधिक महत्व है। महाशिवरात्रि की शाम में श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग भी बन रहा है। पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी, रविवार को रात 7 बजकर 48 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा। यह समय भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है और इस दौरान की गई पूजा से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं।
महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 15 फरवरी, रविवार को रात में 7 बजकर 49 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा। इस समय में की गई पूजा अत्यंत फलदायक मानी जाती है।इस पावन रात्रि में भगवान शिव की आराधना के लिए दिनभर विशेष पूजा और समय निर्धारित हैं।
निशिता काल पूजा: 16 फरवरी, रात्रि 12:09 बजे से रात्रि 01:01 बजे तक।
प्रथम प्रहर पूजा:15 फरवरी, सायं 06:11 बजे से रात्रि 09:23 बजे तक।
द्वितीय प्रहर पूजा:15 फरवरी, रात्रि 09:23 बजे से 16 फरवरी, रात्रि 12:35 बजे तक।
तृतीय प्रहर पूजा:16 फरवरी, रात्रि 12:35 बजे से तड़के 03:47 बजे तक।
चतुर्थ प्रहर पूजा:16 फरवरी, तड़के 03:47 बजे से प्रातः 06:59 बजे तक।
महाशिवरात्रि के दिन सुबह 7 बजे से लेकर शाम 7 बजकर 48 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा। खास बात यह है कि, इस दिन यह शक्तिशाली योग 12 घंटे से अधिक समय के लिए बना रहेगा। यह योग बाधाओं को दूर कर सफलता दिलाने वाला माना जाता है। इसके बाद उत्तराषाढा नक्षत्र शाम 7:48 तक रहने वाला है। इसके बाद श्रवण नक्षत्र का शुभारंभ होगा, जो अगले दिन 16 फरवरी को सुबह 8:47 तक बना रहेगा। महाशिवरात्रि पर व्यतीपात योग पूरे दिन बना रहेगा। इस दिन निशिता काल रात 11 बजकर 52 मिनट से लेकर रात 12:42 तक रहेगा। हालांकि, दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12:57 तक अभिजीत मुहूर्त रहने वाला है। अमृतकाल दोपहर 12:59 से 14:41 तक रहेगा। वहीं, सूर्य, बुध, राहु और शुक्र के एक साथ आने से चतुर्ग्रही योग बनेगा, जो आध्यात्मिक उन्नति, समृद्धि और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देता है.