आगरालीक्स ..वृंदावन में आज से शुरू हो रहे नास्तिक सम्मेलन को संतों के विरोध के बाद स्थगित कर दिया गया है। इसके बाद भी विरोध कम नहीं हो रहा है, नास्तिक सम्मेलन कराने वाले आयोजकों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए संत प्रदर्शन कर रहे हैं।
वृंदावन परिक्रमा मार्ग स्थित अपने धर्मविहीन आश्रम में स्वामी बालेंदु द्वारा 14 एवं 15 अक्टूबर को नास्तिक सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं। पूर्व आध्यात्मिक गुरु के आह्वान पर नगर में देश-विदेश से एक हजार से अधिक नास्तिक जमा होंगे। फेसबुक के जरिए उन्होंने आयोजन की सूचना दी है। कहा कि समाज में अधंविश्वास और पाखंड फैला है। धर्म और ईश्वर के नाम पर शोषण हो रहा है। निर्धन व्यक्ति को दो जून की रोटी कमाना मुश्किल हो रहा है। वहीं साधु सन्यासी आश्रमों में करोड़ों की सम्पत्ति बनाकर लग्जरी कारों में घूमते हैं।
कहा कि प्रेम, चोरी न करना, झूठ न बोलना धर्म की बपौती नहीं, नैतिक गुण हैं। इसके लिए हिन्दू, मुसलमान, ईसाई होने की आवश्यकता नहीं है। धर्म गुरुओं द्वारा धार्मिक शिक्षा देना अनुचित है। धार्मिक शिक्षा जहर है। स्वामी बालेन्दु और यशेन्दु ने धर्मिक लोगों को ढोंगी बताया। खुले रूप में कहा कि वह तमाम धर्माचार्यों पर अंगुली उठा रहे हैं। आश्रमधारी मठाधीश गरीबों का खून चूस रहे हैं। वृंदावन के कुछ मंदिरों का नाम लेते हुए स्वामी यशोन्दु ने कहा कि इसकी आवश्यकता नहीं। इनके निर्माण में लगा पैसा यदि वृंदावन में लगाया जाता तो यहां का स्वरूप बदल गया होता। बाबाओं के हाथ में माला की जगह कुदाल, फावड़ा दो, जिससे वे देश के विकास में सहयोग करें।
धर्मग्रंथों को बताया मनोरंजन की किताब
स्वामी बालेंदु ने धार्मिक ग्रंथों को मनोरंजन की किताब बताया। कहा कि सभी अपने समय में उपन्यास और काल्पनिक एवं मनोरंजन का साधन है। कहा कि ईश्वर सबसे बड़ा मिथ्या और अंधविश्वासों का पिता है।
ईमानदार होने की सनक ने नास्तिक बना दिया
स्वामी बालेन्दु ने कहा कि ईमानदार होने की सनक ने उन्हें आस्तिक से नास्तिक बना दिया। इससे पहले वह धार्मिक आयोजन करते थे। भागवत भी करते थे, जिसमें दस-बीस हजार लोग आते थे। अब यहां नास्तिक सम्मेलन कर रहे हैं। देशभर में मुट्ठीभर नास्तिक लोग हैं। व़ृंदावन में तो वह भी नहीं हैं। यह समय की पुकार है। लोग धर्मांध अराजकता से ऊब चुके हैं। तार्किकता और विवेक सम्मत विचारों में गोलबंद हो रहे हैं।
पिछले साल गुपचुप हुआ था आयोजन
वृंदावन में गत भी वर्ष गुपचुप तरीके से नास्तिक सम्मेलन हुआ था। इसमें 18 राज्यों से 150 नास्तिकों ने सहभागिता की थी। खुले मंच के रूप में पहली बार यह सम्मेलन हो रहा है।
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