आगरालीक्स… आगरा के लोग देश दुनिया के न्यूरोसर्जन से सवाल पूछ सकेंगे कि यह ब्रेनहेमरेज कैसे होता है, क्या इलाज है और कैसे बच सकते हैं।
न्यूरोलाॅजिकल सोसायटी आफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष एवं आयोजन सह-अध्यक्ष डा. आरसी मिश्रा ने बताया कि न्यूरोट्राॅमा सोसायटी आफ इंडिया और न्यूरोलाॅजिकल सोसायटी आफ इंडिया के तत्वावधान में न्यूरोलाॅजिकल सोसायटी आगरा के सहयोग से न्यूरोट्राॅमा-2019 का आयोजन आगरा में किया जा रहा है। मस्तिष्क रोग विशेषज्ञों का यह तीन दिवसीय सम्मेलन फतेहाबाद रोड स्थित जेपी होटल में 23 से 25 अगस्त 2019 तक होगा। इसमें देश भर से करीब 300 मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे, जबकि देश-विदेश के 100 से अधिक विशेषज्ञ अपना शोध एवं जटिलताओं पर अपना मत रखेंगे। चिकित्सकों के बीच न्यूरो क्षेत्र के क्षेत्र में हो रहे नए शोधों एवं तकनीकों का आदान-प्रदान होगा। नई चिकित्सा पद्धतियों से अन्य चिकित्सकों को अवगत कराया जाएगा। न्यूरोट्राॅमा व ब्रेन हैंब्रेज पर नए शोधों पर चर्चा होगी।
सम्मेलन की अंतर्राष्ट्रीय फैकल्टी में टोरंटो के डा. क्रिस्टोफर एस आहूजा, नेपाल प्रो. डा. लिप चेरियन, यूएसए के डा. जेम्स डेविड गेस्ट, प्रो. डा. जैक आई जेलो, डा. जोगी वी पतीसापू, डा. रेंडल किस्नट, डा. शंकर गोपीनाथ, डा. शेकर एन करपड, आस्टेलिया के प्रो. डा. पीटर रिली, स्विटजरलैंड कीं डा. एल्डा रोका, नीदरलैंड के प्रो. डा. डब्ल्यू.सी पाॅल, चाइना के डा. यांगहांग वैंग और यूनाइटेड किंगडम कीं डा. संथानी एम सेल्वेंड्रन न्यूरोट्राॅमा क्षेत्र से जुडे़ विभिन्न विषयों पर जानकारी प्रदान करेंगे।
इसके साथ ही एसोसिएशन आफ न्यूरोस्पाइन सर्जन्स आफ आगरा द्वारा स्पाइन ट्राॅमा से संबंधित विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
न्यूरोट्राॅमा सोसायटी आफ इंडिया के सचिव डा. सुमित सिन्हा ने बताया कि इससे पूर्व 22 अगस्त 2019 को न्यूरोट्राॅमा से बचाव विषयक एक गोष्ठी कार्यशाला अपराह्न 3.00 से सांय 6.00 बजे तक हरीपर्वत चैराहा स्थित होटल होली-डे इन में होगी। यह गोष्ठी कार्यशाला जन सामान्य के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें एक सार्वजनिक मंच प्रदान करती है मस्तिष्क आघात और इससे बचाव से जुड़े तमाम पहलुओं को समझने एवं विशेषज्ञों से वार्तालाप के जरिए अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए। गोष्ठी एवं कार्यशाला में में चिकित्सकों एवं गणमान्य नागरिकों के अतिरिक्त शहर भर के तमाम सामाजिक संगठनों, विद्यालयों के छात्रों, शिक्षकों को भी आमंत्रित किया गया है। उपरोक्त कार्यक्रम हमारी सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतिबिंब है।पत्रकार वार्ता में डा. मृदुल शर्मा, डा. मयंक बंसल, डा. पुनीत गुप्ता, डा. संजय गुप्ता, डा. आलोक अग्रवाल, डा. अरविंद अग्रवाल आदि ने बताया कि पिछले 30 से 35 सालों में बहुत परिवर्तन आए हैं। उस समय न्यूरो की जांच के लिए उपकरण नहीं थे। अब तो सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन से बीमारियों के बारे में आसानी से पता लगाकर उपचार कर सकते हैं।