
संजय प्लेस में लग्जरी गाडी में छात्रों के साथ बीयर पीती छात्राओं के पफोटो सामने आने के बाद परिजनों को सकते में डाल दिया है। ये छात्र छात्राएं हाई प्रोफाइल परिवार के हैं और शहर के प्रतिष्ठित कान्वेंट स्कूल के 10 वीं और 11 वीं में पढते हैं। यही समय इनके करयिर बनाने का है। बच्चों पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती है, उनके पास मोबाइल और इंटरनेट है, जिससे वे अपने दोस्तों के संपर्क में रह सकते हैं, इन्हें गलत करने से भी नहीं रोका जा सकता है। लेकिन परिजनों को आगाह होने की जरूरत है।
ये करें
पैरेंटस मीटिंग में स्कूल जाएं तो क्लास टीचर से बच्चे के क्लास में आने और उसकी परर्मोमेस के बारे में जरूर पूछें।
बच्चे कहां टयूशन पढने जा रहे हैं, उनके दोस्त कौन हैं और छुटटी के बाद कहां जाते हैं, इसकी जानकारी रखें, उन पर पाबंदी ना लगाएं
बच्चों को अपना दोस्त बनाएं, उससे स्कूल के बारे में पूछे, उसकी समस्याएं जाने और उसे प्रोत्साहित करें।
बच्चे को जिम्मेदार बनाएं, जिससे वह अपने भविष्य के प्रति खुद चिंतित रहें।
छुटटी के दिन बच्चों को अपने साथ उसकी पसंदीदा जगह पर ले जाएं और वहां उसे समझाएं कि क्या गलत है और क्या सही है,
मनोचिकित्सकों की टिप्स
बच्चों को दोस्त बनाएं, जिससे वे अपनी बातें मां बाप से शेयर कर सकें, उन पर पाबंदी लगाने के बजाय समझाएं कि क्या गलत है और क्या सही है। बच्चों को क्वालिटी समय दें, उन्हें भविष्य के लिए तैयार होने के लिए प्रोत्साहित करें।
डॉ विशाल सिन्हा विभागाध्यक्ष एसएन मेडिकल कॉलेज
परिजनों के पास अपने बच्चों के लिए समय नहीं हैं, वे कहां जा रहे हैं, किससे मिल रहे हैं परिजनों को जानकारी तक नहीं होती है। इसलिए बच्चों के दोस्तों पर भी नजर रखें, मौका मिले तो उन्हें स्कूल छोडने जाएं।
डॉ यूसी गर्ग मनोचिकित्सक
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