आगरालीक्स…आगरा के सचखण्ड हॉस्पिटल के प्रो. डॉ. एसडी मौर्या ने दिल्ली एम्स में paraumbilical hernia का milos तकनीक से किया आपरेशन. डॉ सिद्धार्थ धर ने सीबीडी पित की नली में पथरी का सफलता पूर्वक ऑपरेशन करके दिखाया..देश के 800 सर्जन ने देखीं सर्जरी
आगरा के सिकंदरा भावना एस्टेट के पास स्थित सचखंड हॉस्पिटल के प्रो. डॉ. एसडी मौर्या ने दिल्ली एम्स में चल रही तीन दिवसीय ENDO SURGERY कॉन्फ्रेंस में paraumbilical hernia का milos टेक्नीक से ऑपरेशन करके आगरा के डॉक्टरों को दिखाया. इसमें 15×7.5 सेंटीमीटर की जाली डाली गई. अभी ये ऑपरेशन आगरा में सिर्फ डॉ मौर्या ही कर रहे है. वहीं डॉ सिद्धार्थ धर ने सीबीडी पित की नली में पथरी का सफलता पूर्वक ऑपरेशन करके दिखाया जिसको 3 बार ERCP से निकालने का प्रयास किया गया था लेकिन असफल रहे क्योंकि पथरी बहुत बड़ी थी और पित की नली में फंस गई थी डॉ सिद्धार्थ धर ने जिसका ऑपरेशन लैप्रोस्कोपी से करके दिखाया जिसको करीब 800 सर्जन जो देश के हर हिस्से से आये थे उन्होंने अडिटोरियम में देखा. इस अवसर पर प्रो. डॉ एम सी मिश्रा, प्रोफेसर डॉ बंसल, प्रोफेसर डॉ कृष्णा, प्रोफेसर डॉ डी पी सिंह, प्रोफेसर डॉ मुनीर खान सहित सभी ने डॉ सिद्धार्थ धर की बहुत प्रशंसा की. प्रो. डॉ. एसडी मौर्या और डॉ. सिद्धार्थ धर को किया इनवाइटएम्स दिल्ली में 19 से 22 फरवरी 2026 तक 15वीं एआईआईएमएस सर्जिकल वीक (ENDOSURG-2026) का आयेाजन किया गया. यह कांफ्रेंस जवाहरलाल नेहरू आडिटोरियम में की गई. इसमें हर्निया, बेरिएट्रिक और थोरैसिक सर्जरी की लाइव वर्कशॉप और सीएमई आयोजित की गई. इसमें आगरा के सचखण्ड हॉस्पिटल के प्रोफेसर डॉ एस डी मौर्या और डॉ सिद्धार्थ धर को जो एम्स के इस प्रोग्राम में रेगुलर फैकल्टी रहे हैं इस साल भी इन्वाइट किये गये थे. प्रो. डॉ. एसडी मौर्या ने milos तकनीक की जानकारी देते हुए बताया कि पहले paraumbilical hernia की सर्जरी ओपन होती थी, जिसके दोबारा होने के चांस रहते थे। अब इस ऑपरेशन में जाली rectus muscle के नीचे और peritoneum के ऊपर डाली जाती है tacker और टांको से फिक्स कर देते है इसमें दोबारा होने के चांसेज जीरो परसेंट है. इसमें मीनी मम चीरा लगाया जाता है इसलिए इस तकनीकि का नाम है MILOS MINIMALLY INVASIVE LESS OPEN SUBLAY TECHNIC.