आगरालीक्स …अब आईसीयू में भर्ती मरीजों का ब्रेन का अल्ट्रासाउंड, 24 घंटे स्ट्रोक और दुर्घटना में सिर में चोट लगने के बाद भर्ती मरीज के दिमाग की एक एक नस पर रखी जा रही नजर।
इससे कब न्यूरोसर्जरी करनी है और कब दवाओं से मरीज की जान बचानी है यह स्पष्ट हो जाता है। सोसायटी ऑफ न्यूरोक्रिटिकल केयर की छठी राष्ट्रीय कार्यशाला से पहले सिनर्जी प्लस हास्पिटल, सिकंदरा में शुक्रवार को ब्रेन अल्ट्रासाउंड पर वर्कशाप आयोजित की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि ब्रेन अल्ट्रासाउंड सामान्य अल्ट्रासाउंड से अलग होता है इसमें दो तरह के प्रोप आते हैं। आइसीयू में ट्रामा का मरीज भर्ती होने पर ब्रेन अल्ट्रासाउंड से इंट्राक्रैनियल प्रेशर का पता चल जाता है, इसके साथ ही सिर में चोट लगने के बाद खून की नस से रक्तस्राव होने से खून का थक्का किस जगह जमा है हेमाटोमा का भी पता चल जाता है। ट्रामा के मरीज के इंट्राक्रैनियल प्रेशर और हेमाटोमा का पता चलने पर डाक्टर के लिए न्यूरोसर्जरी और दवाए से इलाज का चयन करने में मदद मिलती है। वहीं, आइसीयू में भर्ती मरीज की तबीयत बिगड़ने पर बेड के बगल में ही उपलब्ध अल्ट्रासाउंड से पता लगाया जा सकता है कि यह समस्या क्यों हो रही है। इससे मरीज की जान बचाई जा सकती है। आयोजन अध्यक्ष डॉ. रनवीर सिंह त्यागी ने बताया कि ट्रामा और स्ट्रोक के 90 प्रतिशत मरीजों में अस्पताल पहुंचने पर न्यूरोसर्जन और न्यूरोफिजीशियन की जरूरत नहीं होती है, ऐसा डाक्टर जिसे ट्रामा के मरीजों का इलाज करने का अनुभव और प्रशिक्षण हो उसकी जरूरत होती है। इसके लिए क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों के साथ ही नर्सेज को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्कशॉप में मुख्य रूप से डॉ. हिमांसु प्रभाकर, डॉ. जेन्टले एस श्रेष्ठा, डॉ. वसुधा सिंघल, डॉ. आरती, डॉ. रणवीर त्यागी, डॉ. राकेश त्यागी, डॉ. दीप्तिमाला अग्रवाल, डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. योगिता मौजूद थे।
15 देशों के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ आज से करेंगे चर्चा
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व एम्स के न्यूरो क्रिटिकल केयर के डॉ. हिमांशु प्रभाकर व आयोजन सचिव डॉ. राकेश कुमार त्यागी ने बताया कि बताया कि शनिवार और रविवार को दो दिन होटल डबल ट्री बाई हिल्टन में छठी न्यूरोक्रिटिकल केयर कार्यशाला में 15 देश के विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे। देश भर के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। कार्यशाला में अमेरिका से एएल विलेसे, आरती सारवाल, कुबैत से वाईवी अबुलहसन, अर्जेंटीना से वाल्टर विदेता, नेपाल से जेंटल एस श्रेष्ठा, आस्ट्रिया से रेमुंड हेलबुक, जापान से एम नगायामा, बा्रजील से गिसेले सैमपियो, ब्रिटेन से एंड्रू लैविनियो, रूस से अलेक्जेंटर कुलिकोव के साथ ही देश भर से क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ शामिल होंगे।
साइंटिफिक चेयरपर्सन डॉ. दीप्तीमाला ने बताया कि कार्यशाला में स्ट्रोक, ट्रामा की मरीजों की केयर से लेकर सर्जरी पर विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे। ब्रेन डेथ को लेकर क्लिनिक सिनेरियो पर भी चर्चा की जाएगी। ब्रेन डेड मरीज की केयर के साथ ही दिमाग में सूजन, नसों में सूजन, दौरे आने पर किस तरह से इलाज किया जाए।