आगरालीक्स …आगरा में एसटीएपफ ने डेरा डाल दिया है और पेट्रोल पंप की जांच की जा रही है, मशीन खोलकर चिप देखी जा रही हैं, बुधवार को बुधवार को फाउंड्री नगर स्थित भाटिया पेट्रोल पंप और सिकंदरा के कारगिल पेट्रोल पंप पर मशीनों की जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है।
एचपीसीएल आगरा के क्षेत्रीय विक्रय अधिकारी सौरव कुमार ने बताया कि एटा इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप आगरा रोड पर पांच नोजल चलते मिले जबकि तीन बंद मिले हैं। जांच में पंप पर प्रति पांच लीटर पर 20 से 30 एमएल घटतौली मिली है। नियमानुसार 0.05 एमएल से ज्यादा वेरिएशन नहीं होना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई होगी। वहीं पेट्रोल पंप के मालिक पवन कुमार गुप्ता ने कहा नोजल मशीनों में वेरिएशन हर बार चेक करने पर अलग निकलेगा। वेरिएशन सभी नोजल में नहीं मिला है। इसे घटतौली नहीं कहा जा सकता है।
चार टीमें गठित
डीएम ने मंगलवार को जिले के हर पेट्रोल पंप की जांच के आदेश जारी किए। जांच के लिए एसीएम के नेतृत्व में चार टीमों का गठन किया गया है। टीम में ऑयल कंपनी, आपूर्ति विभाग और बांट-माप के अधिकारियों अथवा कर्मचारियों को शामिल किया गया है। सभी टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वह जनपद के एक-एक पेट्रोल पंप की जांच करें। जिस पेट्रोल पंप पर घटतौली पकड़ी जाए उसे तुरंत सीज कर दिया जाएगा। और दोषियों को गिरफ्तार किया जाए।
ये टीमें करेंगी कार्रवाई
एसीएम प्रथम की अध्यक्षता में बनी टीम तहसील किरावली व नगर क्षेत्र के पेट्रोल-डीजल पंपों की जांच करेगी। एसीएम द्वितीय की अध्यक्षता में गठित टीम तहसील एत्मादपुर व शहर के पेट्रोल पंपों की जांच करेगी। एडीएम नागरिक आपूर्ति की अध्यक्षता में गठित टीम तहसील फतेहाबाद व बाह सहित समस्त नगर क्षेत्र एवं जिला पूर्ति अधिकारी की अध्यक्षता में गठित टीम तहसील सदर व खेरागढ़ सहित नगर क्षेत्र के पेट्रोल-डीजल पंपों की जांच करेगी। सभी टीमें अभियान चलाकर 10-10 पंपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौपेंगी।
पेट्रोल-डीजल में मिलावट
अधिकारियों के मुताबिक पेट्रोल व डीजल में साल्वेंट, केरोसिन की मिलावट आमतौर पर की जाती है। दूरदराज के इलाकों में घटतौली व मिलावट के मामले ज्यादा सामने आते हैं। जिला पूर्ति कार्यालय और बांट-माप कार्यालय लगातार पंपों पर मिलावट व घटतौली की जांच करें तो लाखों उपभोक्ताओं को हर साल करोड़ों रुपए का चूना लगने से बचाया जा सकता है।
इलेक्ट्रिशयन ने बनाई चिप
रविंद्र इलेक्ट्रिशयन ने ये चिप डेवलप की थी जो पेट्रोल पंप की डिस्पेंसिंग मशीनों में लगाई जाती थी। इसकी कीमत तीन हजार रुपए है। चिप लगने के बाद मशीन 6% तक कम पेट्रोल सप्लाई करती थी।
इलेक्ट्रॉनिक चिप दो तरह की होती हैं। एक का इस्तेमाल रिमोट से होता है, जबकि दूसरी चिप बिना रिमोट के कोड नंबर से काम करती है।
– ये लोग ग्रीन सर्किट में चिप लगाकर खेल करते थे। कुछ जगह एमसीबी और कुछ जगह पैनल में सर्किट लगाया गया था। इस चिप के लगते ही ये पेट्रोल डिलिवरी पल्स को बढ़ा देती है, जिससे मशीन के मीटर पर पेट्रोल सप्लाई और रेट तो सही बताता है, लेकिन असल में इससे कम पेट्रोल मिलता है।
– रविंद्र ने पुलिस को बताया कि उसने यूपी के करीब एक हजार पेट्रोल पंप को यह चिप बेची थी। एएसपी के मुताबिक, रिमोट के जरिए पेट्रोल सप्लाई की लिमिट तय की जाती थी। अगर कोई कस्टमर एक लीटर पेट्रोल लेता था तो उसे हकीकत में 940 ml पेट्रोल ही मिलता था। यानी कस्टमर को 60 ml का नुकसान होता था।
इस तरह करते थे
पेट्रोल पंप में इस खेल में 2 से 3 लोग शामिल रहते थे। एक पेट्रोल डालता था और दूसरा कैश बैग लेकर खड़ा रहता था। बैग लेकर खड़े रहने वाला पैसों के साथ ही रिमोट रखता था। मौका मिलते ही वह रिमोट दबाकर घटतौली कर देता था।
– कुछ जगह पर इन दोनों के अलावा तीसरा कर्मचारी जेब में रिमोट लेकर खड़ा रहता था। एसएसपी एसटीएफ ने बताया कि ये लोग ग्रीन सर्किट में चिप लगाकर खेल करते थे। कुछ जगह एमसीबी और कुछ जगह पैनल में सर्किट लगाया गया था।
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