आगरालीक्स …महिला दिवस पर आगरा की डॉक्टर और उनकी डॉक्टर बेटी का खिलखिलाता चेहरा बहुत कुछ कह रहा है, एक मां अपनी बेटी को बुलंदियों पर पहुंचा सकती है, बेटी भी पीछे नहीं है, उसी बेटी को डॉक्टर मां ने मंच से सम्मानित किया।

आगरा के रेनबो हॉस्पिटल की डॉ जयदीप मल्होत्रा देश दुनिया में आईवीएफ के लिए अलग पहचान बना चुकी हैं, उनकी बेटी डॉ निहारिका मल्होत्रा भी पीछे नहीं हैं। वे बेटी बचाओ, बेटी पढाओ सहित बेटियों के स्वास्थ्य और बेहतर परवरिश के लिए अभियान चला रही हैं।
डा. जयदीप मल्होत्रा ने देश दुनिया में बनाई पहचान .

एक ख्याति प्राप्त स्त्री रोग एवं आईवीएफ विशेषज्ञ होने के साथ ही देश में डाॅक्टरों के इस सबसे बडे संगठन फाॅग्सी की डा. जयदीप वर्ष 2018 में 57 वीं रही हैं। वर्तमान में वे इंडियन सोसायटी फाॅर रिप्रोडक्शन (इसार) की कमान संभाल रही हैं। डा. जयदीप और उनके पति डा. नरेंद्र पहले दंपति हैं जो इस प्रोफेशनपल संगठन के अध्यक्ष बने, साथ ही जिन्हें यूके के राॅयल काॅलेज की मानद उपाधि से सुशोभित किया जा चुका है। साथ ही डा. जयदीप अकेली महिला चिकित्सक हैं जिन्हें एफआरसीओजी और एफआरसीपीआई प्राप्त है। वे डबरोविनिक इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर होने के साथ ही एस्पायर की पहली भारतीय महिला प्रेसीडेंट, एआईसीओजी की जनरल सैक्रेटरी, सैक्रेटरी जनरल आईएमएस, वाइस प्रेसीडेंट इस्पात समेत कई प्रतिष्ठित संगठनों से जुडी हैं। डा. जयदीप एक अग्रणी आईवीएफ विशेषज्ञ हैं जो आगरा में काम कर रही हैं और भारत के साथ ही नेपाल, बांग्लादेश के 18 आईवीएफ केंद्रों को प्राविधिक सहायता प्रदान कर रही हैं। उनके प्रयासों से अब तक आईवीएफ की चमत्कारिक पद्धति से 10000 से अधिक बच्चों का जन्म कराया जा चुका है। उत्तर प्रदेश और नेपाल के पहले 300 आईवीएफ शिशु का जन्म कराने का कीर्तिमान भी उन्हीं को जाता है।
डा. निहारिका मल्होत्रा चला रही अभियान

वर्ष 2019 में फेडरेशन आफ आब्सटेट्रिकल एंड गायनेलाॅजिकल सोसायटी आफ इंडिया फाॅग्सी की संयुक्त सचिव रहीं डा. निहारिका मल्होत्रा आईवीएफ विशेषज्ञ होने के साथ ही समाजसेवा से जुड़ी हैं। उनकी स्मृति संस्था इस क्षेत्र में आगरा से निकलकर देश भर में अपनी शाख बना रही है। हाल ही में डा. निहारिका मल्होत्रा की देखरेख में निकाली गई रन फाॅर हर ने इंडिया बुक आफ रिकाॅर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया था, जो फाॅग्सी के बैनर तले निकाली गई थी। स्मृति की निदेशक रहते हुए उन्होंने विकलांग और निर्धन बच्चों के स्कूलों को भी गोद लिया है। यही वजह है कि हर साल समाज को एक अच्छा संदेश देने की मंशा से वे हर साल अपना जन्मदिन भी गरीब बच्चों के बीच मनाती हैं। आगरा में डा. निहारिका
नो टोबेको, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, रन फाॅर हैल्थ, से नो टू प्लास्टिक, एनीमिया फ्री, महिला सशक्तिकरण, स्कूली बच्चों की शिक्षा, महिला यौन शोषण रोको, मासिक धर्म स्वच्छता, रक्तदान, तनाव मुक्त कैंपेन आदि कई तरह के अभियानों से जुड़ी हैं और कई अभियान शुरू किए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र्ा में कई अवाॅर्ड भी अपने नाम किए हैं।