आगरालीक्स..(रामकुमार शर्मा) …भाजपा की चुनावी सभाओं में जय श्रीराम की जगह अब सुनायी देगा राधे-राधे, मथुरा शहर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं योगी आदित्यनाथ। संघ व भाजपा की समन्वय बैठक में गूंजा राधे-राधे.
भाजपा का चुनावी मंत्र बदल रहा है। राम के नाम पर वैतरणी पार कर चुकी पार्टी का फोकस अब कृष्ण की ओर है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य , सांसद हेमामालिनी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पिछले दिनों अपने उद्बोधनों में कृष्ण जन्म भूमि का उल्लेख ऐसे ही नहीं कर दिया गया। इसके पीछे आरएसएस की सोची समझी रणनीति काम कर रही है। जय श्री राम के नाम पर देश व प्रदेश की सत्ता पर काबिज हो चुकी भाजपा का नारा आगामी चुनाव में राधे-राधे सुनने को मिल सकता है। आरएसएस के स्तर पर तय किया जा चुका है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मथुरा-वृंदावन की किसी सेफ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया जाए जिससे पूरे प्रदेश की जनता में यह संदेश जाए कि कृष्ण जन्म भूमि को लेकर भी पार्टी राम मंदिर की तरह ही गंभीर है।

31 दिसंबर को फरह में हुई बृज प्रांत की समन्वय बैठक में सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने वहां उपस्थित 17 जिलों के सांसद, विधायक, महानगर अध्यक्ष व महामंत्री तथा संघ के पदाधिकारियों को इस बात के संकेत दिए कि आगामी चुनाव राधे-राधे के नारे के साथ लड़ा जाना है। सभी कार्यकर्ता व पदाधिकारी इस ओर से दिमाग चलाना बंद कर दें कि किसको टिकट मिल रही है या किसकी टिकट कटने जा रही है। चुनाव किसी व्यक्ति के नाम पर नहीं वरन राधे-राधे के नारे से लड़ा जाना है। मथुरा पर फोकस होने के कारण ही आरएसएस व भाजपा ब्रज प्रांत की बैठक मथुरा के फरह में रखी गई। आगामी दिनों में आरएसएस के बड़े पदाधिकारियों का मथुरा आवागमन लगा रह सकता है। भाजपा द्वारा पिछले दिनों निकाली गई जनविश्वास यात्रा की शुरूआत भी इसी कारण मथुरा से की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्माष्टमी पर मथुरा आना भी इसी रणनीति का ही हिस्सा रहा है। 19 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मथुरा में रैली कर चुके हैं। संभावना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मथुरा शहर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। इस सीट से वर्तमान में विधायक प्रदेश सरकार में मंत्री श्री कांत शर्मा हैं। पार्टी की मंशा मथुरा सीट से मुख्यमंत्री को चुनाव लड़ाने के पीछे इस क्षेत्र में रालोद का प्रभुत्व कम करना भी है। मुख्यमंत्री के चुनाव लड़ने से मथुरा वृंदावन की अन्य सीटों पर भी असर पड़ेगा। भाजपा के लिए मथुरा शहर की सीट सुरक्षित जैसी है। इस सीट पर रालोद के मतदाता ना के बराबर हैं। कांग्रेस के प्रदीप माथुर कई मर्तबा इस सीट से विधायक रह चुके हैं।