
लोहामंडी के पीरबेग में रामवती का अपने 4 बच्चों बबली, आशा, मुन्ना, मोती के साथ एडवोकेट राजेंंद्र बाला के पुश्तैनी मकान में किराए पर रहती हैं। वे यहां 120 साल से किराए पर थे, रामवती का एक बेटा मन्दबुद्धि है और बेटी बबली पत्नी स्व. छोटू निवासी वाटर वर्क्स लालमस्जिद अपने बेटे के साथ रामवती के साथ ही रहती है। रामवती का राजेन्द्र बाला से मकान खाली कराने के लिए विवाद था। रामवती का आरोप है कि, 3 दिन पहले आलमगज चौकी के सेेकेंड इंचार्ज अशोक कुमार राजेन्द्र के साथ आए और जबरन डंडे के जोर पर घर का सारा सामान डाले में भरकर बैनारा फैक्ट्री के पास कूड़े में फेंक आए। बबली के गहने और घर पर रखे रुपए भी छीन ले गए। साथ ही साथ घर पर ताला डाल दिया। घर से बेघर परिवार को स्थानीय पड़ोसियों ने सहारा दिया और ताला तोड़कर दोबारा घर में रुकवा दिया। बबली ने बताया की शुक्रवार को दोपहर दरोगा अशोक कुमार कुछ सिपाहियोंं के साथ आए, उनके साथ राजेन्द्र बाला उनकी पत्नी और युवक भी थे। लाठी के दम पर पुलिस ने सबको बाहर निकालना शुरू कर दिया। कोई आसरा न होने और जबरन निकाले जाने का जब बबली और आशा ने विरोध किया तो मारपीट कर दी। पुलिस ने मन्दबुद्धि भाई मोती को भी उठा लिया और मुन्ना को पीटकर भगा दिया। रोकने आए स्थानीय निवासी को भी पुलिस ने पीट दिया, आरोप है कि इसी बीच कुछ लोगों ने पेट्रोल डालकर बबली के आग लगा दी। पब्लिक ने बबली को बचाया और पुलिस को दौड़ा लिया।
दारोगा अशोक कुमार वहांं से भाग निकले। मकान मालिक और पुलिस के भागने के बाद लोग भड़क गए और संदिग्ध हालत में जली बबली को साड़ी में लपेट कर घर के बाहर लिटा दिया और एसएसपी के आने से पहले इलाज न कराने की बात पर अड़ गए। पुलिस एक घंंटे बाद जैसे तैसे एम्बुलेंस लाई तो लोग आक्रोशित हो गए और धक्का मुक्की करने लगे।
इस दौरान एक घंटे तक बबली तड़पती रही। मौके पर पहुंची सीओ मनीषा सिंह ने महिलाओंं को समझाया और तुरंंत मुकदमा दर्ज कराने की बात कही तब जाकर लोग शांत हुए। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसीएम थर्ड अरुण कुमार मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार व महिला के बयान लिए। एसीएम अरुण कुमार ने मीडिया को बताया की सबके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही कर रही है। पुलिस की भूमिका की जांच की जा रही है। दोषियों को बक्शा नहींं जाएगा।
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