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Agra News: The Chamber presented its problems of the traders to the Additional Commissioner Grade 1…#agranews

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आगरालीक्स…जीएसटी 2 को लेकर उद्यमियों/व्यापारियों के साथ संवाद की मांग. छोटी—छोटी गलतियों पर न हो व्यापारियों को उत्पीड़न. चैंबर ने एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 1 के सामने रखीं समस्याएं, मिला ये आश्वासन

चैम्बर सभागार में चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल की अध्यक्षता में एसजीएसटी के एडीशनल कमिश्नर ग्रेड-1 पंकज गांधी एवं ज्वाइंट कमिश्नर एसआईबी सी.के. रल्लन जी के साथ बैठक आयोजित की गयी। चैम्बर के पूर्व अध्यक्ष एवं जीएसटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन द्वारा एडीशनल कमिश्नर ग्रेड-1 पंकज गांधी जी को 18 सूत्रीय प्रतिवेदन सौंपा गया। बैठक का संचालन मनोज बंसल द्वारा किया गया। बैठक में उद्यमियों एवं व्यापारियों से प्राप्त समस्याओं से सम्बन्धित 18 सूत्रीय प्रतिवेदन निम्नलिखित हैः-

इन समस्याओं को रखा सामने
जीएसटीएन सुविधा केन्द्र:-विभाग में कम्प्यूटर असिसटेन्ट एवं एक नोडल अधिकारी के साथ पूरे समय सुविधा केन्द्र को संचालित किया जाए। उस नोडल अधिकारी को सम्पूर्ण अधिकार प्राप्त होने चाहिए व प्रावधानों की जानकारी भी होनी चााहिए। वह अधिकारी व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करने में समक्ष्म होना चाहिए।

तकनीकी त्रुटियों के कारण जुर्माना:-ई-वे बिल बनाते समय, इनवाईज बनाते समय व्यापार स्थल पर रिकोर्ड रखते समय व्यापारी द्वारा कुछ मामूली तकनीकी त्रुटियां हो जाती है जैसे- 1. क्रेता का जीएसटीएन देते समय किसी डिजिट का गलत हो जाना। 2. वाहन सं0 अंकित करते समय किसी डिजिट का आगे पीछे हो जाना। 3. कम्पाउडिंग डीलर द्वारा बाहर बोर्ड पर यह घोशित नहीं किया जाना कि वह समाधान योजना के अन्तर्गत है। इसी प्रकार अन्य छोटी छोटी त्रुटियां होने पर भी विभागीय अधिकारियों द्वारा जमानत राशि व जुर्माना में पैसा जमा कराया जाता है। हमारा निवेदन है कि कानून नया हैं। सभी व्यापारियों को छोटे-छोटे प्रावधानों का ज्ञान नहीं है तथा कुछ भूलें लिपकीय त्रुटियों के कारण हो जाती है एवं उसमें करापवंचना की कोई मंशा नहीं है। अतः निवेदन है कि ऐसी परिस्थितियों में जुर्माना अथवा जमानत धनराशि जमा नहीं करानी चाहिए।

स्टैंडर्ड औपरेडिंग प्रोसीजर – एसआईबी अधिकारियों के लिए एक एसओपी (स्टैंडर्ड औपरेडिंग प्रोसीजर) प्रेसक्राइब किया जाये ताकि स्पॉट पर जाकर उत्पीड़न न हो उसमें निम्नलिखित बातें भी प्रेसक्राइब की जायें।
(ए) प्रोपर रीजन टू विलिव बताया जाये, एवं उसकी कापी दी जाये।
(बी) जिस बिन्दु की जांच नोटिस जारी करके और डिटेल माँगकर की जा सकती है। उसके लिए एसआईबी की जांच द्वारा व्यापारी के स्थान पर जाने की आवष्यकता नहीं होनी चाहिए।
(सी) यदि पहले या दूसरे स्तर के डीलर फेक हो तो चैन में सारे व्यापारी फेक होंगे ऐसा मानना उचित नहीं है।

जीएसटीआर 2ए/2बी जनवरी 2022 से लागू किया गया है। उससे पहले उसका कोई विधिक वजूद नहीं था। जीएसटीआर 2ए/2बी में इसी के अनुसार कार्यवाही की जाये। अधिकारियों को ऐसे निर्देश दिये जाये कि जीएसटीआर 2ए/2बी में कार्यवाही से पहले इसे पढ़ लिया जाये एवं सिर्फ जीएसटीआर 2ए/2बी के अन्तर के आधार पर कर आरोपित नहीं किया जाये। अन्य विधिक प्रावधानों का भी ध्यान रखा जाये।

आगरा में टिब्यूनल की स्थापना – ट्रिबुनल स्थापित किये जाने की घोषणा हो चुकी है। अतः आपसे निवेदन है कि ट्रिब्यूनल को शीघ्र प्रारम्भ किया जाये जिससे उद्यमियों व व्यापारियों को राहत प्राप्त हो और सरकार के राजस्व में वृद्धि हो।

अर्थदण्ड – माल रोकने के बाद जो भी पेनल्टी (अर्थदण्ड) लगाया जाता है उसकी अपील उसी प्रदेश तथा षहर में ही निर्धारित अधिकारी के समक्ष की जा सकती है, जो अत्यधिक परेशानी का विशय है, क्योंकि पहले व्यापारी उस षहर में माल छुड़ाने जावे, दुबारा अपील करने जाये तथा तीसरी बार अपील की सुनवाई के लिऐ जावे। इस प्रकार आप स्वयं ही करदाता की परेशानी, खर्चे का अन्दाज लगा सकते हैं। अतः रोके गये कागजात पंजीकृत व्यापारी के पंजीकृत षहर के अधिकारी के यहां भेज दिये जायें तथा अपील भी उसी षहर में करने का प्रोविजन होना चाहिए।

किसी नोटिस का रिप्लाई देने के लिए जो समय प्रदान किया जाता है उसके अगले दिन पोर्टल बंद कर दिया जाता है जिसमें कोई टैक्सपेयर किन्हीं कारणों से बन्द होने की तिथि पर रिप्लाई नहीं दे पाया है तो वह अगले दिन रिप्लाई नहीं कर सकता इसके लिए अधिकारियों से मिलना पड़ता है। कोई अधिकारी तो पोर्टल खोल देता है और कोई अधिकारी एलाऊ नहीं करता है। हमारा निवेदन है कि अंतिम तिथि के बाद टैक्सपेयर को नोटिस रिप्लाई देने के लिए एडजर्नमेंट एप्लीकेशन लेने का अवसर प्रदान करना चाहिए।

सर्च के दौरान कर जमा करने के लिए कहा जाता है यह उचित नहीं है. इसमें टैक्स पेयर को परेशानी होती है। हमारा निवेदन है कि सर्च के दौरान कर जमा नहीं कराया जाए। उसके लिए समय प्रदान किया जाए।

व्यापारियों को 2020-21 के नोटिस दिये जा रहे हैं, जिसमें पंजीकृत व्यापारियों को भी नोटिस दिये जाता है कि तुम्हारा आईटीसी क्रेता द्वारा ब्लैक लिस्ट है और उसका केस विवादित होने के कारण माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और क्रेता द्वारा जिसको माल बेचा जाता है विभाग द्वारा उससे कर की मांग की जाती है। हमारा सुझाव है कि जब तक माननीय उच्च न्यायालय द्वारा केस में निर्णय नहीं दिया जाता जब तक उसको ब्लैक लिस्ट न किया जाये और न हीं क्रेता द्वारा जिस व्यापारी को माल बेचा गया है उससे विभाग द्वारा कर की मांग नहीं की जानी चाहिये।

विभाग द्वारा नये पंजीकरण करने के लिये सर्वे किया जा रहा है जिसमें विभाग द्वारा पुराने पंजीकरण व्यापारियों से खातों का विवरण मांगा जाता है जिससे व्यापारियों का उत्पीड़न होता है। हमारा सुझाव है कि विभाग द्वारा पुराने पंजीकृत व्यापारियों का एकाउंट न मांगकर उनका उत्पीड़न न किया जाये।

जी एस टी के प्रावधानों के अनुसार करमुक्त वस्तु के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले रॉ मेटेरियल पर निर्माता द्वारा दिया गया जीएसटी उसकी लागत होता है क्योंकि उसका
रिअर्मबर्स कहीं भी नहीं होता है इस प्रकार किताब छापने के लिए प्रयुक्त किये जाने वाले कागज एचएसएन कोड 4802 पर कर की दर 12 प्रतिशत से बढ़ा कर 18 प्रतिशत कर दी गई है, जिसके कारण प्रकाशक की लागत 6 प्रतिशत महंगी हो गई है और शिक्षा भी 6 प्रतिशत महंगी हो गई है।

नोट बुक को सरकार द्वारा करमुक्त कर दिया गया है परन्तु उसमें प्रयुक्त होने वाले कागज को 18 प्रतिशत कर की श्रेणी में रखा गया है जिसका एचएसएन कोड 4802 है जिसके कारण इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाता है। अंतिम उपभोक्ता को कॉपी पर पहले 12 प्रतिशत कर देना पड़ता था, लेकिन इसके कागज में 18 प्रतिशत होने पर उसके उपर सीधे तौर पर 6 प्रतिशत की वृद्धि का भार पड रहा है। इसका अर्थ है कि सरकार कॉपी को करमुक्त करके शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाना चाहती थी किन्तु किसी चूक के कारण मँहगी हो गयी है। अतः हमारा सुझाव है कि एचएसएन 4802 को 18 प्रतिशत कर की श्रेणी से हटाकर 5 प्रतिशत कर की श्रेणी में रखा जाना चाहियें ताकि जीएसटी 1 के समकक्ष कॉपी अंतिम उपभोक्ता के लिये 7 प्रतिशत सस्ती हो सके।

एचएसएन कोड 4804 क्राफ्ट पेपर का उपयोग काटॅून बॉक्स बनाने में उपयोग किया जाता है जिसे सरकार द्वारा जीएसटी 2.0 में 18 प्रतिशत कर की श्रेणी में रखा गया है। इस कागज का प्रयोग कोरोगेटिड बॉक्स बनाने में प्रयोग हाने वाल कच्चे माल के रूप में किया जाता है जिसके फिनिशिंग गुड्स को आपके द्वारा जीएसटी 2 में 5 प्रतिशत में रखा गया है। हमारा सुझाव है कि कच्चे माल में 18 प्रतिशत से हटाकर 5 प्रतिशत कर श्रेणी में रखा जाये। क्योंकि इससे व्यापारी की लागत मूल्य बढ़ जाता है। उसे 18 प्रतिशत पर माल खरीदकर 5 प्रतिशत पर बेचकर 13 प्रतिशत सरकार से रिटर्न लेना होगा। इसलिये व्यापारियों के सरलीकरण हेतु कच्चे माल को 5 प्रतिशत कर की श्रेणी में रखा जाना चाहिये।

एचएसएन कोड 4810 में डूप्लेक्स पेपर को रखा गया है जिसका उपयोग डिब्बे बनाने में किया जाता है, जिसे सरकार द्वारा जीएसटी 2.0 में 18 प्रतिशत कर की श्रेणी में रखा गया है। इस कागज का प्रयोग डिब्बे बनाने में प्रयोग हाने वाल कच्चे माल के रूप में किया जाता है। जिसके फिनिशिंग गुडस को आपके द्वारा जीएसटी 2 में 5 प्रतिशत में रखा गया है। हमारा सुझाव है कि इसको कच्चे माल में 18 प्रतिशत से हटाकर 5 प्रतिशत कर श्रेणी में रखा जाये। क्योंकि इससे व्यापारी की लागत मूल्य बढ़ जाता है। उसे 18 प्रतिशत पर माल खरीदकर 5 प्रतिशत पर बेचकर 13 प्रतिशत सरकार से रिटर्न लेना होगा। इसलिये कच्चे माल को 5 प्रतिशत कर की श्रेणी में रखा जाना चाहिये।

अत्यधिक आईटीसी दावे को लेकर बार-बार निराधार नोटिस – पिछले 15 महीनों में चैम्बर के सम्मानित सदस्य को चार नोटिस प्राप्त हुए हैं, जिनमें अत्यधिक आईटीसी दावा करने का आरोप लगाया गया है। इनमें से तीन नोटिस विभाग द्वारा वापस ले लिए गए हैं और चौथे का उत्तर भी दिया जा चुका है विभाग द्वारा बार-बार ऐसे निराधार नोटिस क्यों जारी किए जाते हैं, जिससे सदस्य फर्म को प्रबंधन का समय और संसाधन व्यर्थ होते हैं।

अन्य संगठनों द्वारा की गई गलत टीडीएस प्रविष्टियों को लेकर अनावश्यक अनुकरण – सदस्य फर्म को विभाग द्वारा उन गलत टीडीएस प्रविष्टियों के लिए बार-बार फॉलो-अप किया जाता है, जो अन्य संगठनों द्वारा की गई हैं। फर्म द्वारा कई बार स्पष्ट किया है कि ये प्रविष्टियाँ हमसे संबंधित नहीं हैं। सुधार का दायित्व उसी संगठन पर होना चाहिए जिसने गलती की है, न कि हम पर।

जीएसटी रिफंड प्रक्रिया में विलंब – सदस्य फर्म अपना जीएसटी रिफंड दावा 27-08-2025 को प्रस्तुत किया था। एक माह बीत जाने के बावजूद विभाग ने अभी तक आरएफडी-02 (रिफंड आवेदन की स्वीकृति) भी जारी नहीं किया है। निर्यातकों की स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में समय पर रिफंड मिलना अत्यंत आवश्यक है। विभागीय अधिकारियों को संवेदनशील होकर तत्परता से रिफंड प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए।

विभाग द्वारा नोटिस ईमेल के माध्यम से भेजे जाते हैं हमारा सुझाव है कि नोटिस ईमेल पर भेजने के साथ-साथ व्यक्तिगत कॉपी भी भेजी जानी चाहिये। हमारा मानना है कि विभाग द्वारा व्यक्तिगत नोटिस भेजने से फर्म वर्तमान में कार्यरत है अथवा नहीं की जानकारी प्राप्त होती रहेगी। चूँकि नोटिस ईमेल पर भेजने पर फर्म उस स्थान पर है अथवा नहीं की सही जानकारी विभाग को प्राप्त नहीं हो पाती है। जिससे किसी कारणवष फर्म फर्जी होने पर उससे खरीद-बिक्री कर रहे अन्य उपभोक्ताआंे को समस्या का सामना करना पडता है।

व्यापारियों को मिला ये आश्वासन
बैठक में एडीशनल कमिश्नर ग्रेड-1 द्वारा एजेण्डा के बिन्दु संख्या 1 के सम्बन्ध में बताया गया कि विभाग द्वारा शीघ्र ही जीएसटीएन की सुविधा प्रारम्भ की जायेगी। सरकार की मंशा उद्यमी एवं व्यापारी के साथ जीएसटी 2 पर अधिक से अधिक संवाद करने की है। बिन्दु संख्या 2 में अवगत करया कि छोटी-छोटी तकनीकी त्रुटियों के कारण व्यापारी पर किसी भी प्रकार का उत्पीड़न नहीं किया जायेगा। बिन्दु संख्या 3 में मौके पर प्रोपर रीजन टू विलिव की कॉपी उपलब्ध करायी जाती है। बिन्दु संख्या 4 में सकारात्मक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया। बिन्दु संख्या 5 में बताया कि ट्रिब्यूनल की स्थापना की घोषणा हो चुकी है तथा इसके सदस्य भी चयनित किये जा चुके हैं उनके द्वारा शीघ्र ही ट्रिब्यूनल प्रारंभ करने हेतु अनुरोध उच्च स्तर पर भेजा जायेगा। बिन्दु संख्य 6 में बताया कि वन नेशन व वन टैक्स के अंतर्गत वीडियों क्राफॅेसिंग के द्वारा सुनवाई करने का प्रयास किया जाता है फिर भी कहीं -कहीं समस्या आती है इसके लिये उच्च स्तर पर अवगत कराने का आश्वासन दिया गया। बिन्दु संख्या 7 में बताया कि पोर्टल बंद नहीं होता है एडजर्नमेंट एप्लीकेशन देने के बाद रिप्लाई किया जा सकता है फिर भी यदि पोर्टल बंद होने की शिकायत है तो अपने अधिनस्थों द्वारा जांच करने का आश्वासन दिया गया। बिन्दु संख्या 8 में बताया कि सर्च के दौरान पैसा जमा नहीं कराया जाता है। इसके लिये एक निश्चित समय प्रदान किया जाता है। बिन्दु संख्या 9 में शीघ्र कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया। बिन्दु संख्या 10 में बताया कि नये पंजीकरण सर्वे के दौरान पुराने पंजीकृत व्यापारियों से उनके खातों का विवरण नहीं मांगा जाता है यदि किसी ीके द्वारा पुराने पंजीकृत व्यापारी से खातों का विवरण मांगा जाता है तो वह हमारे संज्ञान में त्वारित लाया जाये। बिन्दु संख्या 11, 12.13 व 14 में बताया कि यह बदलाव अभी जीएसटी 2 में आया है चैम्बर द्वारा इस सम्बन्ध में प्रेषित सुझाव सम्बन्धित स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया गया। बिन्दु संख्या 15, 16 व 17 में बताया कि सम्बन्धित फर्म द्वारा उनके संज्ञान में लाने पर उचित कार्यवाही की जायेगी। बिन्दु संख्या 18 में बताया कि बडे़ मामलों में विभाग द्वारा नोटिस तामिल कराया जाता है।

ये रहे मौजूद
बैठक में चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल, उपाध्यक्ष संजय कुमार गोयल, उपाध्यक्ष विवेक जैन, कोषाध्यक्ष संजय अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष एवं जीएसटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन अमर मित्तल, सीताराम अग्रवाल, अनिल वर्मा, भूवेश कुमार अग्रवाल, श्रीकिशन गोयल, सदस्य मनोज बंसल, योेगेश सिंघल, राकेश सिंघल, मनोज कुमार अग्रवाल, संजय अरोरा, शिशिर गुप्ता, विजय कुमार गुप्ता, राहुल राना, राजेन्द्र कुमार अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, अभिनव उपाध्याय, अमित अग्रवाल, नवनीत सिंहल, सुनील सिंघल, मनोज कुमार गुप्ता, गिरिश चंद गोयल, सुशील बंसल, महेश अग्रवाल, मनोज गुप्ता, सुनील गर्ग उपस्थित थे।

Written by
Agraleaks Team

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