आगरालीक्स…’मैं तो आगे बढ़ जाता मगर मानवता पीछे छूट जाती…’, आगरा में इंदौर के संत का ट्रेन में छूट गया था सामान, आटो चालक शकील की मदद से मिला
आगरा में अगर आपका खोया हुआ सामान वापस मिल जाए तो आपको कैसा लगेगा ? जाहिर है, अत्यधिक खुशी, राहत और सुकून का अनुभव होगा। ऐसा कोई क्षण एकदम जादुई लगेगा, निराशा आशा में बदल जाएगी और आप मानसिक रूप से शांति का अनुभव करेंगे। इस दौरान व्यक्ति की भावनाओं में अचानक सकारात्मक बदलाव आता है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है। आगरा में ऐसा ही कुछ हुआ इंदौर के एक संत के साथ। आईऐ जानते हैं पूरा मामला… हुआ कुछ यूं कि इंदौर के एक हिन्दू संत हरिद्वार में एक धार्मिक अनुष्ठान कर देहरादून—उज्जैनी एक्सप्रेस से वापस इंदौर लौट रहे थे। राजा की मंडी रेलवे स्टेशन पर ठहराव के दौरान यह संत पानी की बोतल लेने के लिए प्लेटफार्म पर उतरे। तभी अचानक ट्रेन ने ठहराव छोड़ दिया। रेलगाड़ी को रूकवाने के प्रयास विफल थे। इससे संत परेशान हो गए। उन्होंने रेलवे पुलिस से संपर्क किया। एक महिला सिपाही ने उनकी मदद की। रेलवे स्टेशन के बाहर आकर आटो चालक शकील से आग्रह किया कि ट्रेन के अगले ठहराव आगरा कैंट पहुंचने से पहले संत को कैंट स्टेशन पहुंचाने का प्रयास करें, मगर अपनी और सवारी दोनों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।शकील ने भी बिना समय गंवाए संत को आटो में बिठाया और आगरा कैंट स्टेशन के लिए निकल पड़े। जब वे स्टेशन पहुंचे तो वहां देहरादून—उज्जैनी एक्सप्रेस की एनाउंसमेंट हो रही थी। शकील ने संत से कहा कि वो आटो छोड़कर उनके साथ नहीं आ सकता क्योंकि आटो कहीं भी खड़ा करने की अनुमति कैंट स्टेशन के बाहर नहीं है। इसलिए यहां से आगे उन्हें खुद ही जाना होगा।
शकीन ने बताया कि आगरा कैंट स्टेशन के बाहर कुछ देर ठहरने के बाद वे वापस लौट ही रहे थे कि तभी संत भी वहां आ गए। उन्होंने शकील का आभार जताया। कुछ धनराशि भी देने का प्रयास किया लेकिन शकील ने वह लेने से इनकार कर दिया और कहा कि इसके बदले वे उनकी संस्था एसओएस के संस्थापक डॉ. नवीन गुप्ता को फोन करके यह बताएं कि आज आपके एक आटो चालक ने मेरी मदद की है। इस पर संत ने डॉ. गुप्ता को फोन कर घटना की जानकारी दी।
डॉ. गुप्ता ने उनसे पूछा कि जब रेलगाड़ी और अपना खोया हुआ सामान उन्हें मिल गए थे तो वे दोबारा उसमें सवार होकर अपने गंतव्य के लिए आगे क्यों नहीं बढ़े। इस पर संत ने जवाब दिया कि उनके मन में भी यह बात आई थी मगर इससे उन्हें सुविधा तो मिलती पर आत्मिक शांति नहीं। मानवता उन्हें शकील से मिले बिना जाने की इजाजत नहीं देती। उन्होंने राजा की मंडी रेलवे स्टेशन पर उनकी मदद करने वाली महिला सिपाही के प्रति भी आभार जताया।
बाद में डॉ. गुप्ता के मोबाइल फोन पर एक संदेश भेजते ही इंदौर के इन संत ने डॉ. गुप्ता और उनकी संस्था एसओएस द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की। शकील के लिए कहा कि इस व्यक्ति में ईमानदारी और पुरूषार्थ है और ईश्वर जरूर उनका कल्याण करेंगे।