आगरालीक्स…आगरा के गुरुद्वारा गुरु का ताल में बनने जा रहा 5000 स्क्वायर फीट का अत्याधुनिक रसोईघर व लंगर हॉल. चारों ओर से खुली और हवादार होगी रसोई. नारियल फोड़कर और फावड़ा चलाकर कार्य का शुभारंभ.
सिख धर्म के नवे गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज की चरण छोह प्रात ऐतिहासिक स्थान गुरुद्वारा गुरु का ताल में पूरे देश भर से संगत दर्शन करने व माथा टेकने के लिए आते हैं। संगत के साथ-साथ अन्य यात्रियों व पर्यटकों की संख्या को देखते हुए गुरुद्वारा गुरु का ताल अपने रसोईघर और लंगर हॉल का विस्तार करने जा रहा है। जिसके लिए रविवार को संत बाबा प्रीतम सिंह जी की अगुवाई में संगत ने अत्याधुनिक तकनीक से बनने वाले रसोई घर के नींव पत्थर रखे जाने के कार्य आरंभ की अरदास की।
कार्यक्रम की शुरुआत मूल मंत्र के सिमरन के साथ हुई। जिसके बाद बाबा अमरीक सिंह ने नींव पत्थर रखे जाने से लेकर निर्विघ्न रूप से कार्य संपन्न होने के लिए अरदास की। अरदास के बाद संत बाबा प्रीतम सिंह व अन्य प्रमुख जनों ने नारियल फोड़कर और फावड़ा चलाकर कार्य की शुरुआत की। गुरुद्वारा गुरु का ताल के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह जी ने बताया कि पिछले कुछ समय से लगातार संगत की संख्या में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए यह कार्य शुरू किया गया है। बड़े आयोजनों के दौरान लंगर के लिए संगत को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। जिसे देखते हुए यह विस्तार किया जा रहा है। बाबा प्रीतम सिंह जी ने इस कार सेवा के लिए शहर की संगत से हर संभव आर्थिक सहयोग किए जाने की भी अपील की है ।

रसोई और लंगर हॉल के निर्माण का डिजाइन आर्किटेक्ट जसप्रीत सिंह ने तैयार किया है। उन्होंने बताया की नई रसोई लगभग 5000 स्क्वायर फीट की होगी। जो चारों ओर से खुली और हवादार होगी। जिससे कि लंगर बनाते समय अंदर सेवादारों को गर्मी व उमस का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही लंगर हॉल की क्षमता भी लगभग दुगनी कर दी जाएगी। मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा गुरु का ताल चौथी बार अपनी रसोई का नवीनीकरण कर रहा है। इससे पूर्व तीन बार रसोई को अत्याधुनिक तरह से तैयार किया जा चुका है। पूर्व में लंगर लकड़ी जलाकर बनाया जाता था। जिसके बाद एलपीजी गैस और फिर बाद में गोबर गैस व पीएनजी गैस से रसोई का नवीनीकरण वह नए निर्माण किए गए लेकिन अब भाप के माध्यम से लंगर तैयार किए जाने की अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इस रसोई घर का निर्माण किया जा रहा है।
इस दौरान दलजीत सिंह सेतिया, बॉबी वालिया, परमजीत सिंह सरना, वीर महेंद्र पाल सिंह, श्याम भोजवानी, हरपाल सिंह रानी सिंह, माता साहनी, ग्रंथि सतवीर सिंह सुशील, वीर सिंह, जोगा सिंह आदि मौजूद रहे।