आगरालीक्स… आगरा के हाईवे सहित देश भर में एक साल में 52 हजार मौत हो रही हैं, करीब 1.50 लाख लोग घायल हुए हैं।
राजमार्ग मंत्रालय की वर्ष 2016 की रिपोर्ट के अनुसार इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर जो मौतें हुईं, वे 52075 व्यक्तियों की थीं, जो कि समस्त सड़क हादसों में हुई कुल मौतों का 34.5 प्रतिशत था। इसी प्रकार इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर 146286 व्यक्ति घायल हुए जो कि सभी सड़कों पर हुए 494624 घायल व्यक्तियों का 29.6 प्रतिशत था। इस प्रकार ये राष्ट्रीय राजमार्ग असुरक्षित हैं, जिनको सुरक्षित बनाने की दिशा में निर्धारित मानकों के आधार पर इनकी रैंकिंग की जाये। यह मांग आगरा डवलपमेन्ट फाउण्डेशन (एडीएफ) की ओर से नितिन गडकरी, केन्द्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री से पत्र द्वारा की गई।
एडीएफ सचिव के0सी0 जैन द्वारा भेजे गये पत्र में यह कहा गया कि राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या लगभग 228 है व उनकी लम्बाई 70 हजार किमी0 से अधिक है किन्तु वे असुरक्षित हैं। हमारा वादा सड़क हादसों को वर्ष 2020 तक 50 प्रतिशत करने का है किन्तु वर्तमान में देश में दुनिया भर में हो रहे सड़क हादसों के 12.5 प्रतिशत हादसे प्रतिवर्ष हो रहे हैं, जिसके कारण प्रत्येक 4 मिनट में एक सड़क हादसा हो रहा है और इन हादसों में 65 प्रतिशत मरने वाले व्यक्तियों की आयु 18 से 35 वर्ष है।
जिस प्रकार स्मार्ट सिटी, पार्क, विश्वविद्यालय आदि की रैंकिंग होती है, उसी प्रकार प्रत्येक राष्ट्रीय राजमार्ग की वार्षिक रैंकिंग होनी चाहिए और ऐसी व्यवस्था प्रारंभ करने से हादसों की संख्या में बड़ी कमी आ सकती है क्यांकि रैंकिंग के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्ग के कंसेश्नेयर या सम्बन्धित ऐजेन्सी को जवाबदेही करनी होगी जो उन्हें अपनी जिम्मेदारी के प्रति और अधिक जागरुक बना सकेगी तथा एनएचएआई भी राष्ट्रीय राजमार्गों को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में सजग होकर कार्य कर सकेगा।
एडीएफ की ओर से जिन मानकों के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्गों की रैंकिंग का सुझाव रखा है उनमें प्रमुख इस प्रकार हैंः-
1. सम्बन्धित मार्ग पर वर्ष भर में कितने सड़क हादसे हुए और उनमें कितने व्यक्ति घायल हुए या मृत हुए।
2. सम्बन्धित राष्ट्रीय राजमार्ग का रखरखाव।
3. स्पीड नियंत्रण हेतु कैमरे व अन्य संयंत्रों की उपलब्धता।
4. गति सीमा उल्लंघन व यातायात के अन्य नियमों के उल्लंघन के लिए चालानों की संख्या।
5. राजमार्ग के दोनों ओर हरियाली की स्थिति।
6. यातायात प्रबन्धन की स्थिति।
7. एम्बुलेन्स व प्राथमिक उपचार की व्यवस्था।
8. राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए सड़क हादसों, घायलों व मृतकों के विवरण की उपलब्धता।
9. रेनवाटर हार्वेस्टिंग सुविधा की उपलब्धता।
10. रोड साइनेज की उपलब्धता।
11. राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिन्हित ब्लैक स्पॉट व उनको दूर करने के लिए किये गये प्रयासों का विवरण।
12. सम्बन्धित राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए रिलीफ सेन्टर।
13. ट्रक को खड़े करने की व्यवस्था।
14. पब्लिक फीडबैक, शिकायत व उन्हें दूर करने की व्यवस्था।