आगरालीक्स… आगरा में गूंजा पॉल्यूशन ही पॉल्यूशन है, सॉल्यूशन का पता नहीं, संकल्प लिया अब चिन्ता नहीं कुछ काम भी करना होगा। स्वच्छ पर्यावरण के प्रति देश का युवा जागरूक हो रहा है, यह अच्छे संकेत हैं। जागरूकता की इस श्रंखला को आगे बढ़ाना होगा। आगरा ग्रीन फेस्टीवल (एजीएफ) एक सराहनीय पहल है। संजय प्लेस स्थित कॉसमॉस मॉल में दो दिवसीय आगरा ग्रीन फेस्टीवल (एजीएफ) का शुभारम्भ श्रीगणेश की प्रतिमा के समझ दीप जालकर करते हुए डीआईजी लव कुमार ने यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने पॉलीथिन का प्रयोग न करने व रिन्युएबिल एनर्जी को प्रयोग में लाने पर भी जोर दिया। कार्यक्रम के प्रारम्भ करने से पूर्व सर्वप्रथम पुलवमा के शहीदों को दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी गई।

अशोक ग्रुप की एमडी डॉ. रंजना बंसल ने अतिथियों का स्वागत पौधे भेंट करते हुए पर्यावरण को स्वच्छ व प्रदूषण रहित बनाने के मंत्र (लव ग्रीन, लिव ग्रीन, ग्रे ग्रीन, ईट ग्रीन, यूज ग्रीन, टॉक ग्रीन, गिव ग्रीन, बी ग्रीन, थिंक ग्रीन) दिए। कहा कि हमें सिर्फ प्रकति से लेना ही नहीं देना भी सीखना चाहिए। 2020 तक शहर में एक लाख पौधे लगाने व 10 हजार घरों को ग्रीन होम बनाने का संकल्प लिया गया।
इस संकल्प को स्कूलों व संस्थाओं की मदद से पूरा किया जाएगा। राउंड टेबिल डिसकशन में रीयूज, रीसाइकिल, रिड्यूज व रिफ्यूज मंत्रों पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों व अतिथियों ने आसमान में हरे रंग के गुब्बारे उड़ाकर हरियाली का संदेश दिया। उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. आरएस पारीक मुख्य रूप से नेशनल चैम्बर के अध्यक्ष राजीव तिवारी, हरविजय वाहिया, सुसील गुप्ता, मीनाक्षी किशोर, प्रद्युम्न चतुर्वेदी, ब्रज खंडेलवाल, वत्सला प्रभाकर, अशु मित्तल, वैभव छिब्बर आदि उपस्थित थे। संचालन श्रुति अग्रवाल ने किया।

गांधी जी के सपनों का ये कैसा देश बना …डाला
आगरा। पैसा और विकास के नाम पर कर दी गई पेड़ों की कटाई। अपने ही भविष्य के लिए मुसीबतें बढ़ाई जा रही हैं। इसका नतीजा हम सब को भुगतना होगा। पेड़ों को काट कर हम विकास की ओर नहीं बल्कि विनाश की ओर बढ़ रहे हैं। हमने गांधी के सपनों के देश को क्या बना डाला। यह चिन्ता है उन नौनिहालों की, जिन्हें हरियाली घटने और प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण भविष्य का खतरा नजर आ रहा है। आगरा ग्रीन फेस्टीवल में सेंट एंड्रीज, कर्नल ब्राइटलेंड पब्लिक स्कूल, माउन्ट लिट्रा, प्रिल्यूड, गायत्री, एमपीएस स्कूल के बच्चों व बैक बोन संस्था ने नुक्कड़ नाटक के जरिए अपनी पर्यावरण के प्रति अपनी चिन्ता, कारण और निवारण के भाव व्यक्त किए। समझाया कि मैं अकेला क्या करू की सोच छोड़ पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में सहयोग करें और मैं कर सकता कूं की विकास को बढ़ाएं। शपथ ली कि न हरे पेड़ों को काटेंगे न कटने देंगे। प्रतियोगिता में प्रथम सेंट एंड्रूज पब्लिक स्कूल पीली पोखर, द्वितीय सीएफ एंड्रूज व तीसरे स्थान पर सम्मलित रूप से गायत्री पब्लिक स्कूल व सेंट एंड्रूज रहे। जिन्हें 24 फरवरी को समापन समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
इन संस्थाओं ने लिया भाग
स्फीहा, अद्वेत लिविंग, आकांक्षा, हर्टीकल्चर क्लब ऑफ आगरा, कल्याणकारी महिला समिति, स्पाइसी शुगर, एसोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल ऑफ आगरा, न्यू प्रोग्रेसिव स्कूल ऑफ आगरा, नेसनल चैम्बर ऑफ कॉमर्स, आईएमए, क्रेडाई, लघु उद्योग भारती, रिवर कनेक्ट अभियान, ट्यूरिज्म गिल्ड ऑफ आगरा, आर्टिस्ट एसोसिएसन ऑफ आगरा, महिला शांति सेना, मोटर स्पोर्ट्स क्लब, ईको क्लब, ईको फ्रेन्ड्स, इंडिया राइजिंग, आगरा विकास मंच, आगरा कैंसल सोसायटी, एफमेक, द बैक बोन, आगरा ट्यूरिस्ट वेलफेयर चैम्बर, नेशनल मेडिकोज आर्गनाइजेशन आदि।
खूब लुभाया ईको फ्रेंडली प्रोडक्ट ने
आगरा। एजीएफ में लगी स्टॉलों पर ईको फ्रेंडली प्रोडक्ट ने लोगों को खूब लुभाया। जहां लोग घरों में सब्जी उगाने, एलोवेरा से क्रीम, जैविक खाद बनाने व रूफ फार्मिग के टिप्स लेते नजर आए। वहीं, ऑफिस व घरों को सजाने के लिए इनडोर प्लांट व अन्य डेकोरेटिव ऑयटम की खूब खरीदारी की। लोगों में सबसे अधिक उत्सुकता सीड पेपर प्रोडक्ट यानि नीम की डंडी से बना पेन, बीजों की लकड़ी से भरी पेंसिल, लिफाफे, शादी कार्ड, कैलेन्डर के प्रति रहा। ललित कला संस्थान की छात्राओं ने हरियाली पर मनमोहक पेंटिंग बनाई।