आगरालीक्स…पौधे लगाने में ये डर अच्छा नहीं! आप भी पढ़ें, आगरा में महज 6 प्रतिशत वन आवरण जबकि होना चाहिए 33 प्रतिशत, क्या—क्या कानूनी पेच और नीतिगत खामियां…
आगरा में जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण समिति की अहम बैठक गुरूवार को हुई। इसमें हरियाली बढ़ाने, पर्यावरण में सुधार, उत्तरी बाईपास बन जाने के बाद भी भारी वाहनों का प्रवेश शहर में नहीं रोकने, पार्कों के हाॅर्टीकल्चर वेस्ट के उचित निस्तारण, वायु गुणवत्ता में सुधार और संजय प्लेस में फुटपाथ के मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया। यह बात सामने आई कि जब किसानों को पेड़ काटने की अनुमति ही नहीं है और अनुमति प्राप्त करने के लिये उसे सुप्रीम कोर्ट जाना होगा जहां एक पेड़ के बदले 10 पेड़ लगाने होंगे तो ऐसी स्थिति में कोई किसान या निजी भू-धारक आखिर पेड़ क्यों लगायेगा?ऐसे कैसे बढ़ेगी हरियाली
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन प्रश्न उठाया कि 10400 वर्ग किलोमीटर में फैले टीटीजेड क्षेत्र में फोरेस्ट कवर लगभग 3 प्रतिशत है और आगरा में यह लगभग 6 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय औसत 22 प्रतिशत है और राष्ट्रीय लक्ष्य 33 प्रतिशत है तो ऐसी स्थिति में निजी भूमि पर वृक्षारोपण के बिना हरियाली कैस बढ़ायी जा सकती है और पर्यावरण में सुधार कैसे हो सकता है जबकि वर्तमान में सभी सरकारी भूमियों पर वृक्षारोपण प्रायः हो चुका है। अब किसान व निजी भू-धारक पौधारोपण करने से डर रहा है और कोई पेड़ नहीं लगाना चाहता है। इस प्रश्न को गंभीरता से सुनने के बाद जिलाधिकारी ने परीक्षण करने के लिये आश्वस्त किया।
शहर में नहीं रूका भारी वाहनों का प्रवेश
अधिवक्ता जैन ने 14 किलोमीटर बने उत्तरी बाईपास के माध्यम से आगरा गैर गंतव्य भारी वाहनों को डायवर्ट करने की बात रखी गयी और बताया गया कि इस सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 1996 व 2006 में आदेश दिये जा चुके हैं और अब उत्तरी बाईपास बन जाने के बाद भी भारी वाहन नहीं रोके गये हैं। जिलाधिकारी द्वारा ट्रैफिक इंसपेक्टर से चर्चा की और सभी स्थिति को समझने के बाद पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर भारी वाहनों को रोकने के अनुरोध करने के लिये कहा और कीठम के पास तथा कुबेरपुर पर बैरियर लगाकर ट्रैफिक डायवर्ट करने की बात कही।
अमलताश, गुलमोहर के पौधे लगाए जाएं
इसके अलावा पब्लिक पार्कों में मियांवाकी ढंग से पौधारोपण न करने की बात रखी क्योंकि पब्लिक पार्क बच्चों निवासियों के प्रयोग के लिये होता है और मियावांकी के सघन पौधारोपण के बाद इसमें कोई जगह नहीं बचती है। पार्कों के हाॅर्टीकल्चर वेस्ट के उचित निस्तारण के लिये गढ्डे खोदना पार्कों में आवश्यक है जिसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है इस पर जिलाधिकारी द्वारा नगर निगम को आवश्यक कार्यवाही करने के निदेश दिये गये। जिलाधिकारी द्वारा किये जाने वाले पौधारोपण में ऐवेन्यू प्लान्टेशन किये जाने की बात भी कही गयी जिसमें अमलताश, गुलमोहर आदि पेड़ों को लगाया जाये।
सड़कों के किनारे नहीं हैं पौधे यहां लगें
नगर निगम द्वारा किये जाने वाले पौधारोपण के सम्बन्ध में अधिवक्ता जैन ने यह बात रखी कि ट्री-गार्ड लगाकर अधिक से अधिक पौधे सभी सड़कों पर लगाये जायें ताकि सड़कों पर हरियाली बढ़ सके। नगर निगम द्वारा किसी स्थान विशेष पर मियावांकी ढंग से सघन पौधारोपण से शहरवासियों को अधिक लाभ नहीं हो सकेगा। जिलाधिकारी द्वारा नगर निगम को लगाये जाने वाले लगभग दो लाख पौधों में से 10 प्रतिशत पौधे लगाने की बात कही।
वायु प्रदूषण रोकने पर जोर
बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगम को यह भी निदेश दिया कि वायु गुणवत्ता के लिये वह बिन्दुवार अपनी योजना बनायें कि कहां क्या किया जाना है ताकि वायु प्रदूषण रोकने के लिये ठोस उपाय किये जा सकें और यह भी उनसे बताने के लिये कहा कि कुल नगर निगम की सड़कों में कितने प्रतिशत भाग पर दोनो तरफ टाईल लगा दिये हैं ताकि रोड डस्ट पैदा न हो। संजय प्लेस में फुटपाथ के सम्बन्ध में भी नगर निगम अपनी योजना आगे बनाकर देगा।