आगरालीक्स…हैपेटाइटिस बी और सी (काला पीलिया) का इलाज अब दवाइयों से भी संभव. पर इसे हल्के में न लें. चिकित्सकों ने बताए इसके लक्षण व उपचार
सरकारी सर्वे में भी आ चुका है कि आगरा जनपद में हैपेटाइटिस के केस बढ़ रहे हैं. ऐसे में एहतियात बेहद जरूरी है. समय से जांच के बाद दवाओं के जरिए अब काला पीलिया कहे जाने वाले हैपेटाइटिस बी व सी का इलाज भी संभव है. ये बाज आज आगरा में विश्व हैपेटाइटिस दिवस पर विम्स हॉस्प्टिल और पुष्पांजलि हॉस्प्टिल के वरिष्ठ गैस्ट्रोएन्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. दीपक बंसल ने कही.
डॉ. दीपक बंसल ने बताया कि यूं तो हैपेटाइटिस पांच प्रकार की होती है लेकिन इनमें से हैपेटाइटिस बी व सी को काला पीलिया कहा जाता है. टेस्ट कराकर जांच में पॉजिटिव आने पर इनका दवाइयों से इलाज आजकल संभव है. दवाइयों से हैपेआइटिस सी लो बिल्कुल ठीक हो जाती है जबकि हैपेटाइटिस बी में भी दवाओं से लिवर को नुकसान पहुंचने से रोका जा सकता है.

इलाज न कराने पर लिवर डैमेज होने पर मरीज की जान को भी खतरा हो सकता है. डॉ. दीपक बंसल ने बताया कि हैपेटाइटिस बी व सी के लक्षण आंख, त्वचा या पेशाब में पीलापन, पेट दर्द, उल्टी, डायरिया, मांसपेशियां व जोड़ों में दर्द, भूख कम होना, बुखार , पेट में पानी भरना होता है. डॉ. दीपक बंसल ने बताया कि कई बार मरीजों को क्रॉनिक हैपेटाइटिस बी व सी की अवस्था में कोई लक्षण प्रतीत नहीं होता है. ऐसे में मरीजों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता हे. हैपेटाइटिस के बचाव के लिए बाहर की बनी खराब खाने पीने की चीजों से परहेज करें. किसी और व्यक्ति के द्वारा प्रयोग की हुई सिरिंज या ब्लेड से बचें. जो व्यक्ति हैपेटाइटिस से संक्रमित है वह चिकित्सक से उपचार कराये तथा अपने निकट संपर्क में आने वाले लोगों की भी जांच कराए.
उचित इलाज व सावधानी से हैपेटाइटिस बी व सी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है. इस अवसर पर चिकित्सकव हॉस्पिटल कर्मचारियों के अलावा अंकित जैन भी उपस्थित रहे.