आगरालीक्स….स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है लग्न मांगलिक योग. जानिएक्या होता है लग्न मांगलिक योग और क्या होता है इसका प्रभाव. जानकारी दे रही हैं ज्योतिषाचार्य अंशु पारीक
मांगलिक योग यानि मंगल का व्यक्ति की कुंडली में पहले, चौथे, सातवें, आठवें व बाहरवें भाव में होना। आज हम आपको बताएंगे लग्न मांगलिक योग के बारे में। लग्न मांगलिक योग यानि पहले भाव में किसी भी राशि का मंगल ग्रह के होने पर मांगलिक योग का बनना। लग्न यानि व्यक्ति का व्यक्तित्व, स्वभाव और शारीरिक गठन। लग्न मांगलिक योग में यदि मंगल स्वंराशि (मेष, वृश्चिक), उच्च या मित्र (सिंह, धनु, मीन) राशि का हो तो ऐसे लोगों लम्बे चौड़े, गठीले शरीर वाले होते हैं। यदि लड़की की कुंडली में यह गुण है तो उसका स्वभाव लड़कों की तरह होगा। क्योंकि मंगल को पुरुष ग्रह माना गया है।लग्न मंगलिक योग वाले लड़के या लड़की का विवाह यदि ऐसे लड़के या लड़की से करा दिया जाए जिसकी कुंडली तो मांगलिक योग नहीं है, तो वैवाहिक जीवन नीरस होने के साथ स्वास्थ्य सम्बंधी समस्याएं भी बनीं रहती हैं। मन में नकारात्मक सोच व हमेशा विचलित रहता है। वैवाहिक सुख के लिए यह आवश्यक है कि मांगलिक योग वाले व्यक्ति का मांगलिक से ही किया जाए। कई लोग मंगल के साथ गुरु के मौजूद होने पर मांगलिक दोष को नहीं मानते। जबकि ऐसे में मांगलिक योग का प्रभाव कम तो हो जाता लेकिन समाप्त नहीं।
यदि लग्न में नीच राशि (कर्क, वृष, तुला) का मंगल हो तो पूरा जीवन उतार चढ़ाव वाला होता है। स्वास्थ्य सम्बंधी समस्याएं रहती हैं। ऐसे लोगों के मन में कभी-कभी आत्महत्या के विचार भी आ सकते हैं। जबकि लग्न में उच्च का मंगल होने पर व्यक्ति सेना या पुलिस में अच्छा पद पा सकता है। मित्र व परिजनों को भी हमेशा इसका सहयोग व फायदा मिलता है। उसका व्यक्तित्व प्रभावशाली होने के कारण परिवार व समाज में मुखिया की तरह भूमिका निभाता है। ऐसे लोग अच्छे सलाहकार भी होते हैं। ऐसे व्यक्ति का विवाह मांगलिक व्यक्ति से ही हो तो जीवन और भी सुखमय हो जाता है।