आगरालीक्स…आगरा में जैन समाज का दिखा मैनेजमेंट. चार्तुमास के कार्यक्रम चले. दशलक्षण में हजारों जैन श्रद्धालु बाहर से आए. एक टाइम भोजन, चटाई पर सोना…नहीं हुई कोई परेशानी
आगरा में जैन समाज का चातुर्मास चल रहा है. 29 जून से शुरू हुआ यह चातुर्मास 23 नवंबर को समाप्त होगा. चातुर्मास में जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायी, साधु-संत सभी ज्ञान, दर्शन, चरित्र और तप की अराधना करते हैं. वे एक ही स्थान पर रहकर मंदिर, आश्रम या संत निवास पर जप-तप करते हैं और चातुर्मास के नियमों का पालन करते हैं. आगरा में इस समय हरीपर्वत स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर, छीपीटोला जैन मंदिर, आवास विकास सहित बड़े जैन मंदिरों में जैन मुनि आए हुए हैं. वे यहां पर नियमित रूप से प्रवचन आदि दे रहे हैं. हाल ही में जैन समाज का दशलक्षण पर्व भी समाप्त हुआ है.
दशलक्षण पर्व की महत्ता के कारण दशलक्षण पर्व को ‘राजा’ भी कहा जाता है, जो समाज को ‘जिओ और जीने दो’ का सन्देश देता है. दशलक्षण पर्व में जैन धर्म के जातक अपने मुख्य दस लक्षणों को जागृत करने की कोशिश करते हैं। जैन धर्मानुसार दस लक्षणों का पालन करने से मनुष्य को इस संसार से मुक्ति मिल सकती है. आगरा के हरीपर्वत स्थित जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व में देश के कई राज्यों और शहरों से चार हजार श्रद्धालु यहां पहुंचे.
इतनी बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं के आने के बाद भी न तो किसी शहरवासी को कोई परेशानी हुई और न ही किसी तरह का कोई भीड़ आदि का भान हुआ. सुबह साढ़े तीन बजे से उठने के साथ एक टाइम भोजन और रात को चटाई पर सोना दस दिन तक इन श्रद्धालुओं की दिनचर्या में शामिल था. न पैसे साथ में और न ही कोई मोबाइल आदि. सुबह ध्यान अभिषेक और दिन में मुनिश्री के प्रवर्चन. दोपहर को एक टाइम का भोजन और शाम को अल्पाहार. रात को समय पर सोना और वो भी चटाई पर. आगरा के दिगंबर जैन मंदिर में दस दिन तक उत्सव जैसा माहौल् रहा. अनंत चतुर्दशी को यह दशलक्षण पर्व समाप्त हो गए और सभी श्रद्धालु वापस भी चले गए हैं. हालांकि अभी चातुर्मास चल रहा है और जैन मुनि अभी भी अपने प्रवचनों से सभी को निहाल कर रहे हैं.