आगरालीक्स…आगरा में छात्रों को अंधी दौड़ से बचने के लिए प्रो. केजी सुरेश ने सुनाई खरगोश और कछुए की दौड़ की कहानी की उलट कहानी. एक उदाहरण देकर कहा कि मूर्खों से कभी बहस मत करो..
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा का 91वाँ दीक्षांत समारोह बुधवार को स्वामी विवेकानंद (खंदारी) परिसर स्थित छत्रपति शिवाजी मंडपम में भव्य रूप से संपन्न हो गया.कछुए और खरगोश की कहानी की एक और तस्वीर
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रसिद्ध शिक्षाविद व वरिष्ठ पत्रकार प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश (निदेशक, इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली) ने कहा कि जिस तरह से इतिहास में कई गलत जानकारियां दी गई हैं, उसी तरह से कछुए और खरगोश की दौड़ की कहानी के तथ्य भी ठीक नहीं है. मेरी मुलाकात उस खरगोश से हो गई जो दौड़ में हार गया था. जब मैंने उससे पूछा कि तो उसने कहा कि मैं पराजित नहीं हुआ था. जब दौड़ हो रही थी तो रास्ते में सुंदर पहाड़, नदी, तालाब, झरना थे. मैं इन्हें देखने लगा और जिंदगी के आनंद लेने लगा. उन्होंने छात्रों से कहा कि जो तुम्हें दिखाई दे रहा है वो एक अंधी दौड़ है. इसलिए उस अंधी दौड़ के पीछे न भागें, राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए कार्य करें.

प्रो डा केजी सुरेश ने अपने संबोधन में कहा कि दीक्षान्त समारोह यात्रा का अन्त नहीं, जीवन यात्रा की शुरूवात है, आप सभी व्यापक समाज हित को ध्यान में रखकर कार्य करें, तथा किसी भी निर्णय को करने से पहले, समाज के अन्तिम पायदान पर खड़े दरिद्र नारायण व्यक्ति के बारे में सोचना कि आपके कार्य से उसे क्या लाभ होगा, नकारात्मकता से ऊपर उठकर सकारात्मक भाव अपनायें, व अपने स्व को जगायें, स्व को जगाते हुए खुद पर विश्वास करें, यह विश्वविद्यालय डा0 अम्बेडकर के नाम पर है, उन्हें जीवन संघर्ष में प्रेरणाश्रोत बनायें, आप सभी नौकरी देने वाले बनें, तभी भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा.