आगरालीक्स…विश्व साइकिल दिवस पर बचपन की खुशी का अंदाजा लगाईये जब आपने साइकिल सीखी थी, अब शहर में मेट्रो तो चल सकती है पर साइकिल नहीं, कहीं दुकान-कहीं सामान, मोटरवाहनों ने पैदल चलने लायक जगह नहीं छोड़ी साइकिल क्या चलाएंगे
आगरा में आपको कुछ समय बाद ट्रैक पर मेट्रो दौड़ती नजर आएगी मगर इसी शहर में साइकिल चलाने लायक जगह नहीं है। समय-समय पर अभियान तो चलते हैं लेकिन कोई ठोस कानूनी और प्रशासनिक प्रबंध न होने के कारण सड़कों पर कब्जा एक बड़ी समस्या है। वहीं हैवी मोटर वाहनों की संख्या भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इससे वे लोग भी साइकिल नहीं चला पाते जिनके लिए आज भी यह यातायात का सबसे सुगम साधन है।
आगरा में ताज साइक्लिस्ट क्लब के डाॅ. प्रमोद कटारा बताते हैं कि समय के साथ लोगों की सोच में काफी बदलाव आया है। अकेले उनके क्लब में ही सदस्यों की संख्या बढ़कर 250 हो गई है। यह सभी लोग सेहत के लिए साइकिल चलाने के साथ जल और वन जैसे पर्यावरणीय मुद्दों के उठाने का जरिया साइकिल के जरिए ही बनते हैं। वहीं कोविड के बाद से साइकिल चलाने वाले आम नागरिकों की संख्या में वृद्धि हुई है। जिम जाकर ट्रेडमिल पर दौड़ने वाले और साइक्लिंग करने वाले कन्वर्ट होकर सड़क पर साइकिल चलाने लगे हैं। लेकिन यह सेहत और शौकिया तौर पर साइकिल चलाने की बात है। अगर हमें पर्यावरण को सुधारना है और प्रदूषण को कम करन है तो आम नागरिकों को प्रोत्साहन देना होगा। सोशल वैल्यूज, लोग क्या कहेंगे जैसी बातों से उठकर लोग अब साइकिल चलाना तो चाहते हैं लेकिन उनके पास जगह नहीं है। मसलन किसी को सामान लेने बाजार जाना है या घर से आॅफिस जाना है तो साइकिल का उपयोग नहीं करते। यह तभी संभव है जब शहर में साइकिल चलाने लायक वातावरण जैसे खाली सड़कें, साइकिल ट्रैक, अतिक्रमण मुक्त मार्ग उपलब्ध हों।
ताज साइक्लिस्ट क्लब के संस्थापक सदस्य डाॅ. एनएस लोधी ने बताया कि शहर में डाॅक्टर्स ही हैं जो अकेले इस सबसे सुलभ, सस्ते और ईको फ्रेंडली वाहन को प्रमोट करने पर काम कर रहे हैं। वे सेहत को होने वाले फायदे गिनाकर भी लोगों को साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं। लेकिन आम आदमी में जागरूकता आना बेहद जरूरी है जो जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक हस्तक्षेप से ही संभव है।
ईएनटी विशेषज्ञ डाॅ. आलोक मित्तल फिट रहने के लिए साइकिल चलाते हैं। वे कहते हैं कि शहर में साइकिल चलाने वाला एक ट्रेफिक सिस्टम डवलप होना चाहिए। पुराने समय की तरह ही अगर साइकिल लोगों के आॅफिस और बाजार जाने का जरिया बन जाए तो पर्यावरण में तेजी से सुधार होगा और लोग सेहतमंद होंगे।
फिलहाल की स्थिति यह है कि आम आदमी साइकिल चलाना भी चाहे तो नहीं चला सकता। सिक्सलेन होने के बाद हाईवे पर भारी वाहनों की गति बढ़ी है और खतरा बना रहता है। वहीं एमजी रोड पर कोई साइकिल टैªक नहीं है। यमुना किनारा हो, आवास-विकास, शास्त्रीपुरम, कमलानगर, शाहगंज या शहर के पुराने बाजार यहां साइकिल के लायक कोई सिस्टम नहीं है। पुराने बाजारों में भी अब मोटर वाहन ही दौड़ते हैं। प्रमुख सड़कें हों या गली-कूचे कब्जा इतना अधिक है कि साइकिल चलाना मुमकिन नहीं है।

