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Agra News: Uttar Pradesh moves towards global markets: MSME Export Summit 2026 begins in Agra…#agranews

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आगरालीक्स….आगरा में वैश्विक भविष्य के लिए भारत व उत्तर प्रदेश के निर्यात को सशक्त बनाने के लिए जुटे देशभर के उद्यमी. अमेरिकी टैरिफ, सरकारी योजनाओं और बिजनेस में एआई टूल के प्रयोग पर हुआ मंथन

जब उद्योगों को नीति का मार्गदर्शन, तकनीक का साथ और उद्यमिता का आत्मविश्वास मिलता है, तब निर्यात राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनता है। इसी सोच के साथ आगरा में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश एमएसएमई निर्यात सम्मेलन 2026 ने वैश्विक बाजारों की ओर बढ़ते भारत की नई तस्वीर प्रस्तुत की। एआई आधारित व्यापार रणनीतियों, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और सुरक्षित निर्यात पर केंद्रित इस सम्मेलन ने उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को वैश्विक मंच के लिए तैयार करने का स्पष्ट रोडमैप रखा। दो दिवसीय उत्तर प्रदेश (एमएसएमई) निर्यात सम्मेलन 2026 का शुभारंभ शुक्रवार को होटल डबल ट्री बाय हिल्टन, फतेहाबाद रोड में हुआ। सम्मेलन की थीम “वैश्विक भविष्य के लिए भारत व उत्तर प्रदेश के निर्यात को सशक्त बनाना” रखी गई है।

सम्मेलन के प्रथम दिवस का शुभारंभ उप्र लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष एवं आयोजन समिति के संरक्षक राकेश गर्ग, चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग परिषद के अध्यक्ष एवं आयोजन समिति के चेयरमैन पूरन डावर, मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह, संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार, प्रोग्रामिंग कमेटी चेयरमैन गोपाल गुप्ता, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय सचिव दीपक अग्रवाल, प्रदेश सचिव एवं प्रोग्राम कन्वीनर मनीष अग्रवाल रावी, जिलाध्यक्ष विजय गुप्ता, नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, आगरा सर्राफा एसोसिएशन अध्यक्ष नितेश अग्रवाल, डॉ. प्रशांत गुप्ता एवं आगरा ब्रश एंड क्लीनिंग एसोसिएशन अध्यक्ष अमित मोरानी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया।
सम्मेलन के पहले दिन आगरा, हाथरस, अलीगढ़, फिरोजाबाद, मैनपुरी सहित आसपास के जनपदों से 300 से अधिक निर्यात उद्यमियों की सक्रिय सहभागिता रही, जिससे आगरा एक बार फिर वैश्विक निर्यात संवाद के केंद्र के रूप में उभरा।

मुख्य अतिथि राकेश गर्ग ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत यूं ही सदियों तक सोने की चिड़िया नहीं बना रहा, बल्कि यहां से विश्वभर में निर्यात होता रहा है। ब्रिटिश काल के कारण बीच में देश कमजोर अवश्य हुआ, परंतु आज भारत फिर से वैश्विक मंच पर सशक्त रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि से खुशहाली आती है, लेकिन समृद्धि उद्योगों से आती है। उन्होंने कहा कि आज भारत 145 करोड़ की आबादी वाला विशाल बाजार है और विश्व में 200 से अधिक देश ऐसे हैं, जहां भारतीय समुदाय मौजूद है। जहां-जहां भारतीय हैं, वहां भारतीय उत्पादों और उद्योगों की असीम संभावनाएं हैं। अमेरिका जैसे देशों द्वारा टैरिफ की चुनौतियां भले सामने हों, परंतु हमें भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। केंद्र एवं प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार योजनाएं बना रही हैं। राकेश गर्ग ने बताया कि उद्योग विभाग द्वारा इंडस्ट्री फैसिलिटी सेंटर की स्थापना की गई है, जिससे उद्यमियों को सिंगल विंडो पर सभी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि भारत के डीएनए में ही उद्यमिता और जोखिम लेने का साहस है, आवश्यकता है कि हम इसी गुण को निर्यात के क्षेत्र में और अधिक आगे बढ़ाएं।

निर्यात बढ़ाना आज की आवश्यकता : मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह
मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और भविष्य और भी उज्ज्वल है। कुछ देशों की दादागिरी के कारण हमें भयभीत होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि निर्यात नहीं बढ़ेगा तो रुपये की स्थिरता बनाए रखना कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत एक युवा देश है और युवा उद्यमियों को सही मार्गदर्शन देने के लिए ऐसे आयोजन मील का पत्थर साबित होंगे। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर लगातार प्रयास कर रही हैं। प्रदेश में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का विस्तार, उद्योगों के लिए भूमि आवंटन की सरल प्रक्रिया और सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से अनुमतियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

निर्यात अर्थव्यवस्था की रीढ़ : संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार
संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार ने कहा कि निर्यात किसी भी देश या प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश सरकार द्वारा एमएसएमई एक्सपोर्ट प्रमोशन विभाग का गठन किया गया है, ताकि उद्यमियों को अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025–30 निर्यात नीति जारी कर दी है, जिसमें कई नई योजनाएं शामिल हैं। फ्रेट सब्सिडी दोगुनी की गई है, छोटे उद्यमियों के लिए प्रति इकाई 30 लाख रुपये तक सब्सिडी का प्रावधान है। निर्यातकों को विदेशी प्रदर्शनियों एवं मेलों में भाग लेने के लिए सब्सिडी दी जा रही है, जिसका लाभ एक वर्ष में अधिकतम तीन बार लिया जा सकता है।
कोरियर भेजने, ईसीजीसी प्रीमियम तथा निर्यात इंसेंटिव पर भी पहली बार सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ओडीओपी योजना के अंतर्गत प्रदेश सरकार ने योजनाओं का पूरा पैकेज उद्यमियों को उपलब्ध कराया है।

आयोजन का उद्देश्य और वैश्विक परिप्रेक्ष्य
इससे पूर्व प्रोग्राम कन्वीनर मनीष अग्रवाल रावी ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सम्मेलन का लक्ष्य उद्यमियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ना, उनकी सोच को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित करना और उत्तर प्रदेश को निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है। पूरन डावर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर जहां जापान और जर्मनी जैसे देशों की ग्रोथ रेट धीमी हुई है, वहीं भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। विश्व में सर्वाधिक स्टार्टअप भारत में हैं और घरेलू उपयोग के अधिकांश उत्पादों में निर्यात की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

विभिन्न उद्योगों से आए सुझाव
फिरोजाबाद के ग्लास उद्योग का प्रतिनिधित्व करते हुए राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि ग्लास निर्यात 600–650 करोड़ रुपये का है, परंतु टेस्टिंग लैब और हैंडीक्राफ्ट वर्कर ट्रेनिंग सेंटर की भारी कमी है। सरकार यदि सुविधाएं प्रदान करे तो यह उद्योग तेज गति से आगे बढ़ सकता है।
सर्राफा व्यवसाय से जुड़े नितेश अग्रवाल ने कहा कि आगरा से चांदी की देशभर में सर्वाधिक आपूर्ति होती है और इस सेक्टर में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। आने वाले 4–5 वर्षों में चांदी कारोबार निर्यात में बड़ी छलांग लगाएगा।
लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय सचिव दीपक अग्रवाल ने कहा कि आगरा से फुटवियर के साथ-साथ लेदर पर्स, बैग, जैकेट, मसाले आदि उत्पादों के निर्यात की बड़ी संभावनाएं हैं। यूरोप और मिडिल ईस्ट में इनकी भारी मांग है।
विजय गुप्ता ने कहा कि उद्योगों के माध्यम से ही देश का विकास संभव है और यह निर्यात सम्मेलन युवा उद्यमियों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
होटल इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करते हुए रजनी नैयर ने पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को विदेशी मुद्रा अर्जन का महत्वपूर्ण स्रोत बताया।
सीताराम अग्रवाल एवं तेल मिलर संगठन के अजय गुप्ता ने भी अपने विचार साझा किए।

आगरा के एमएसएमई हुए सम्मानित
सम्मेलन के दूसरे सत्र में एमएसएमई ग्रोथ कैटेलिस्ट अवॉर्ड 2026 के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण, मशीनरी, सराफा, पैकेजिंग सहित विभिन्न उद्योगों से जुड़े उत्कृष्ट उद्यमियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विष्णु कुमार, नितिन गोयल, मनीष मित्तल, रोहित बंसल, अशोक कुमार, मयंक जैन, अंकुर गोयल, विकास आनंद एवं शुभम अग्रवाल को यह सम्मान प्रदान किया गया।
इस सत्र को संबोधित करते हुए डायरेक्टर एमएसएमई-डीएफओ आगरा वी.के. वर्मा ने एमएसएमई से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और उद्यमियों से अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।
उत्तर प्रदेश निर्यात सम्मेलन 2026 का प्रथम दिवस उद्योग, सरकार और उद्यमियों के बीच सार्थक संवाद, नीतिगत मार्गदर्शन और प्रेरणादायी विचारों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन के आगामी सत्रों में निर्यात से जुड़े तकनीकी, वित्तीय एवं वैश्विक अवसरों पर विस्तृत मंथन किया जाएगा।

एमएसएमई निर्यात के लिए एआई टूल्स बने गेम चेंजर
सम्मेलन के प्रथम दिवस के तीसरे सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से नए वैश्विक बाजारों की खोज एवं सुरक्षित व्यापार विषय पर एक व्यावहारिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस सत्र को संबोधित करते हुए सीए रूपल गर्ग ने कहा कि वैश्विक मंच पर पारंपरिक तरीकों से ग्राहक ढूंढना आज भी सही है, किंतु वर्तमान समय में वह उतना प्रभावी नहीं रह गया है। बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक पर्सनल असिस्टेंट की तरह कार्य करते हुए निर्यातकों की बड़ी सहायता कर सकता है।
उन्होंने कहा कि चैट जीपीटी, ग्रो एवं पर्पलेक्सिटी जैसे एआई टूल्स अत्यंत प्रभावी हैं, लेकिन इनका वास्तविक लाभ तभी प्राप्त किया जा सकता है जब इनसे स्पष्ट, सटीक और उद्देश्यपूर्ण प्रश्न पूछे जाएं। विभिन्न एआई टूल्स में एक ही विषय से संबंधित जानकारी डालकर क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा सकता है, जिससे निर्णय अधिक सटीक बनते हैं।
सीए रूपल गर्ग ने बताया कि एआई टूल्स की सहायता से किसी भी विदेशी या घरेलू कंपनी की क्रेडिट वैल्यू, व्यापारिक साख एवं पृष्ठभूमि की जानकारी प्राप्त की जा सकती है, जिससे निर्यात में जोखिम को कम किया जा सके। उन्होंने उद्यमियों को सलाह दी कि एआई का प्रयोग केवल खरीदार ढूंढने तक सीमित न रखें, बल्कि सही खरीदार की पहचान, संपर्क स्थापित करने, संवाद बनाए रखने एवं फीडबैक प्राप्त करने में भी इन टूल्स का प्रभावी उपयोग करें।
उन्होंने ओपन कॉर्पोरेट वेबसाइट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्लेटफॉर्म कंपनियों से संबंधित महत्वपूर्ण व्यावसायिक जानकारी उपलब्ध कराता है, जो सुरक्षित व्यापार के लिए अत्यंत उपयोगी है। एआई न केवल बाजार विस्तार में सहायक है, बल्कि उत्पाद विकास और उद्यम के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस सत्र में मंच पर हैंडिक्राफ्ट एसोसिएशन अध्यक्ष रजत अस्थाना, सीए गौरव सिंघल, अनिल अग्रवाल, मोहित सिंह, नितिन अग्रवाल एवं राममोहन कपूर विशेष रूप से उपस्थित रहे। सत्र के दौरान उद्यमियों ने एआई के व्यावहारिक उपयोग को लेकर गहरी रुचि दिखाई और प्रश्नोत्तर सत्र में सक्रिय सहभागिता की।

ब्रांड से बनती है वैश्विक पहचान
सम्मेलन के प्रथम दिवस के चौथे सत्र में वैश्विक स्तर पर उत्पाद को ब्रांड के रूप में स्थापित करने और उसके प्रभावी प्रमोशन विषय पर एक महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र को संबोधित करते हुए सीएस अनुज अशोक एवं रितु अग्रवाल ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी वैश्विक बाजार में केवल गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सशक्त ब्रांड पहचान के साथ प्रस्तुत करना अत्यंत आवश्यक है।
वक्ताओं ने कहा कि किसी भी उत्पाद को वैश्विक मंच पर ब्रांड बनाने के लिए सबसे पहले उसकी यूएसपी को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना चाहिए, जिससे उपभोक्ता उत्पाद से भावनात्मक और व्यावसायिक रूप से जुड़ सके। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांड प्रमोशन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, बी2बी पोर्टल, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियां एवं ई–कॉमर्स प्लेटफॉर्म अत्यंत प्रभावी माध्यम हैं।
सीएस अनुज अशोक ने कहा कि ब्रांडिंग केवल लोगो या पैकेजिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें क्वालिटी कंसिस्टेंसी, कानूनी अनुपालन, बौद्धिक संपदा संरक्षण (ट्रेडमार्क, जीआई, डिजाइन रजिस्ट्रेशन) और विश्वसनीयता का निर्माण शामिल है। वहीं रितु अग्रवाल ने बताया कि सही मार्केट रिसर्च, लक्षित उपभोक्ता वर्ग की पहचान और स्टोरी टेलिंग आधारित प्रमोशन से भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। इसके बाद निर्यात क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ECGC) की भूमिका और निर्यात में जोखिम प्रबंधन विषय पर विस्तार से जानकारी दी गई। सत्र में बताया गया कि ईसीजीसी निर्यातकों को भुगतान जोखिम, विदेशी खरीदारों की डिफॉल्ट स्थिति, राजनीतिक जोखिम एवं अप्रत्याशित परिस्थितियों से सुरक्षा प्रदान करता है। प्रदेश सरकार द्वारा ईसीजीसी प्रीमियम पर सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है।

गुणवत्ता, नीतियां, लॉजिस्टिक्स और अंतरराष्ट्रीय कानून पर विशेषज्ञ सत्र
सम्मेलन के प्रथम दिवस में आयोजित अन्य महत्वपूर्ण सत्रों में निर्यात से जुड़े गुणवत्ता मानकों, सरकारी नीतियों, लॉजिस्टिक्स, वैश्विक अनुपालन एवं अंतरराष्ट्रीय कानून जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने गहन विचार साझा किए।
“क्वालिटी ऑफ कॉम्पिटेटिव एडवांटेज फॉर ग्लोबल मार्केट एंड रोल ऑफ क्यूसीआई इन स्ट्रेंथनिंग इंडिया’ज़ एक्सपोर्ट इकोसिस्टम” विषय पर नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड ऑफ सर्टिफिकेशन बॉडीज (NABCB) के जॉइंट डायरेक्टर अजय शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त गुणवत्ता से ही प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) भारतीय निर्यातकों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप प्रमाणन एवं विश्वसनीयता प्रदान कर भारत के निर्यात इकोसिस्टम को सशक्त बना रहा है।
एक्सपोर्ट प्रमोशन एवं एमएसएमई – उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियां विषय पर एडिशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिसर, एक्सपोर्ट प्रमोशन एंड डेवलपमेंट, उत्तर प्रदेश सरकार धीरज कुमार सिंह ने प्रदेश सरकार द्वारा संचालित निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं, सब्सिडी एवं नीतिगत प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एमएसएमई निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निरंतर नए प्रोत्साहन उपलब्ध करा रही है।
“लॉजिस्टिक्स एंड सप्लाई चेन मॉडर्नाइजेशन” विषय पर डॉ. अमरीश कुमार ने कहा कि समयबद्ध डिलीवरी, लागत नियंत्रण और ट्रैकिंग सिस्टम आधुनिक निर्यात लॉजिस्टिक्स की रीढ़ हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीक आधारित समाधान निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत बना सकते हैं।
“क्वालिटी एश्योरेंस एंड ग्लोबल कंप्लायंस” विषय पर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अस्थाना ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिके रहने के लिए उत्पादों का वैश्विक मानकों के अनुरूप होना अनिवार्य है। गुणवत्ता आश्वासन और अनुपालन के बिना निर्यात दीर्घकालिक नहीं हो सकता।
वहीं “एक्सपोर्ट एंड इंटरनेशनल लॉ” विषय पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के.सी. जैन ने निर्यात से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों, कानूनी सावधानियों एवं विवाद निवारण के पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उद्यमियों को कानूनी रूप से सजग रहने की सलाह दी।

इनका है सहयोग
एक्सपोर्ट सिंपोजियम 2026 का संयुक्त रूप से आयोजन आगरा एवं प्रदेश की प्रमुख औद्योगिक व व्यापारिक संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है, जिनमें प्रमुख रूप से लघु उद्योग भारती जिला आगरा, चेंबर ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आगरा, आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, आगरा कोल्ड स्टोरेज ओनर्स एसोसिएशन, नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स, आगरा फ्लोर कवरिंग एसोसिएशन, आगरा सराफा एसोसिएशन, ब्रश एंड क्लीनिंग प्रोडक्ट एसोसिएशन, आगरा रेडीमेड गारमेंट ऑर्गेनाइजेशन, उत्तर प्रदेश ऑयल मिल्स एसोसिएशन, फैक्ट्री ओनर्स एसोसिएशन आगरा, आयरन फाउंडर्स संगठन एवं ब्रश डेवलपमेंट फाउंडेशन शामिल हैं।
इस सम्मेलन को फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार, विदेशी व्यापार महानिदेशालय (DGFT), एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग उत्तर प्रदेश सरकार तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है।

Written by
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