आगरालीक्स…आगरा में 45 साल बाद ताजमहल की दीवार को छूने को बेताब यमुना. ऐसा हुआ तो और लंबी हो जाएगी ताजमहल की उम्र…पढ़ें एक रोचक खबर
आगरा में इस समय यमुना उफान पर है. यमुना खतरे के निशान से चार फीट ऊपर बह रही है और धीरे—धीरे हाई फ्लड लेवल मार्क की ओर बढ़ रही है. कई कॉलोनियों, गांवों और खेतों में पानी भर गया है. ताज व्यू प्वाइंट में यमुना का पानी आने के कारण उसे बंद कर दिया गया है जबकि सिकंदरा स्थित कैलाश घाट के किनारे बने लोगों को घर खाली करने के आदेश दिए गए हैं. यमुना ने कैलाश मंदिर तक में अपनी पहुंच बना ली है. ऐसे में लोग भी यमुना के इस विकराल रूप पर अपनी नजर रखे हुए हैं.
आगरा में बाढ़ के इतिहास की बात की जाती है तो 45 साल पहले 1978 में आई यमुना में बाढ़ का जिक्र हर किसी की जुबान पर आ जाता है. बताया जाता है कि उस साल यमुना में इतनी बाढ़ आई कि यमुना का पानी बेलनगंज के बाजार तक पहुंच गया था. इसके अलावा यमुना ने ताजमहल की दीवार को छू लिया था. खैर, इस समय अभी तक यमुना ने ताजमहल की दीवार को तो नहीं छुआ लेकिन यमुना ताज की दीवार को छूने को बेताब बिख रही है. अगर दो दिन तक लगातार ओखला और गोकुल बैराज से पानी छेाड़ा गया तो संभवत: यमुना का पानी ताजमहल की दीवार को छू जाएगा.

ताजमहल की बढ़ेगी उम्र
सवाल उठता है कि अगर यमुना के पानी ने ताजमहल की दीवार को छू लिया तो कहीं उसको नुकसान न हो जाए लेकिन अगर ताजमहल की वास्तुकला को देखें तो यमुना का पानी अगर ताजमहल की दीवार को छूता है तो ताजमहल की उम्र को लंबी करेगा. बताया जाता है कि 50 कुओं पर यमुना की नींव टिकी हुई है. पूरी इमारत का वजन इन कुओं पर है. निर्माण के समय इन कुओं में आबनूस और महोगनी की लकड़ियों के लट्ठे डाले गए थे. इन कुओं को ऐसा डिजाइन किया गया थ्ज्ञा कि यमुना नदी से इन्हें नमी मिलती रहेगी, उतनी ज्यादा ताजमहल की मजबूती बनेगी.
एएसआई के एक अधिकारी के अनुसार ताजमहल की नीवं में बने कुओं को लगातार पानी मिलना जरूरी होता है, अगर इनको पानी नहीं मिलेगा तो ये असुरक्षित हो जाएगा. आबनूस की लकड़ी का इस्तेमाल इमारती सामान बनाने में ज्यादा किया जाता है. इसका कारण है कि ये भीगने पर और मजबूत होती है. ये भीगने पर न सड़ती है और न ही सिकुड़ती और न बढ़ती है. वहीं महोगनी की लकड़ी की बात करें तो ये भी एक अलग तरह की होती है. इस पर भी पानी का कोई असर नहीं होता है. इस लकड़ी का इस्तेमाल जहाज, फर्नीचर, प्लाईवुड, सजावट की चीजों और मूर्तियों को बनाने में किया जाता है. अपने औषधीय गुण के कारण इस लकड़ी में कोई भी रोग नहीं लगता है.