आगरालीक्स..(Agra News 10th June) आगरा के श्री पारस हॉस्पिटल को सील किए जाने और डॉ अरिंजय जैन पर मुकदमा दर्ज होने के बाद डॉक्टर सोशल मीडिया पर डॉक्टर के समर्थन में चला रहे कैंपेन, समझा रहे हैं कि क्या होता है Weaning off।
आगरा में वायरल हुए वीडियो में डॉ अरिंजय जैन कह रहे हैं कि 26 अप्रैल को सुबह सात बजे पांच मिनट के लिए आक्सीजन बंद की, इससे 22 मरीजों के शरीर नीले पडे गए। इस मामले में श्री पारस हॉस्पिटल सील कर दिया है और डॉ अरिंजय जैन पर मुकदमा दर्ज किया गया है। आईएमए के डॉक्टर इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर समझा रहे क्या होता है Weaning off।
डॉ पवन गुप्ता एनएमओ की फेसबुक वॉल से
कुछ भी अमानवीय कृत्य नहीं हुआ आगरा के अस्पताल में ! किसी असामाजिक तत्वों द्वारा डॉक्टर के साथ लफ्फाजी 26-27 अप्रैल को loose talk कराया गया , वीडियो को कांट छांट कर शुरू हुई ब्लैक मेलिंग का सिलसिला ! और बात नहीं बनी तो 35 -40 दिन बाद कर दिया गया वीडियो लीक ! Weaning off को समझे मॉकड्रिल और छटनी का मतलब समझइए कि किसको कितनी ऑक्सीजन देनी है इसका कैलिब्रेशन !तो वीडियो में कुछ भी गलत नहीं लगेगा । अस्पताल में एक ही समय में अगर 22 डेथ हुई तो वह कहां दर्ज है? अस्पताल में सुबह 7:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक कोई मौत नहीं हुई रिकॉर्ड इस बात की पुष्टि कर सकते हैं. मोदी और योगी को अंतर्राष्ट्रीय साजिश के तहत भारत की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को चरमराने और सरकार के फेल होने का एजेंडा और टूलकिट वालों ने बात को पकड़ कर डॉक्टर को मीडिया में ही दोषी ठहरा दिया ! जिस अस्पताल में करोना के सौ सौ मरीज भर्ती लगातार रहे हो ,जिसमें रोज 100 से 200 मरीज की ओपीडी चलती हो इस महामारी के समय में भी , जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा करने वाले चिकित्सक को बिना किसी जांच पड़ताल के दोषी ठहरा दिया गया ! कृतघ्न समाज है हम!!
डॉक्टर मुनीश्वर गुप्ता की फेसबुक वॉल से
आई एम ए के आजीवन सदस्य के नाते मैं आईएमए से प्रार्थना कर रहा हूं कि पारस हॉस्पिटल वाले मामले में सिर्फ निष्पक्ष जांच की मांग करें। किसी भी प्रकार से यदि संगठन पारस हॉस्पिटल के साथ खड़ा होता है। तब निश्चय ही पूरे डॉ समाज की क्रेडिबिलिटी दांव पर लग जाएगी ।यह किसी का लगाया हुआ आरोप नहीं है। स्वयं अस्पताल के मालिक डॉक्टर की अपनी कही हुई बात के आधार पर यह प्रश्न खड़ा हुआ है ।पहले से ही अधिकांश कोविड अस्पतालों में निर्धारित से बहुत अधिक पैसा लिए जाने के कारण जनता के बीच में हम बहुत खराब स्थिति में पहुंच चुके हैं ।इस समय जो भी कार्यवाही प्रशासन करें उसके साथ होना चाहिए ।ऑक्सीजन की कमी से तो बहुत लोग मरे। पूरे देश में मारे गए परंतु इस प्रकार के प्रयोग से यदि 7 लोग भी मरे हैं। तब इस अस्पताल की अथवा इसके मालिक की तरफदारी करने वाले किसी भी पदाधिकारी को यह सोचना चाहिए कि मरने वालों में वह स्वयं अथवा उसका परिवारी जन भी हो सकता था। आगरा डॉक्टर असोपा और डॉक्टर एमसी गुप्ता जैसे सज्जन डॉक्टरों की सेवाओं के कारण मशहूर हुआ है कहीं आगरा इतना बदनाम ना हो जाए कि मैं आगरा में चिकित्सक हूं ऐसा कहने में हमें शर्म महसूस करनी पड़े।