
परिजन चीखते रहे, खाली सिलेंडर लगा दिया
कैंसर रोग विभाग में हाथरस निवासी नरेंद्र 29 साल को लिवर कैंसर होने पर 29 जुलाई को भर्ती किया गया था। रेडियोथैरेपी विभाग की डॉ तबस्सुम के अंडर में मरीज का इलाज चल रहा था। मंगलवार सुबह मरीज की तबीयत बिगड गई, इस पर डॉ तबस्सुम परिजनों से आॅक्सीजन सिलेंडर लगवाने की कहकर अन्य मरीजों को देखने लगी। भागे भागे परिजन नर्स के पास पहुंचे, उसके आगे गिडगिडाने पर आॅक्सीजन सिलेंडर लगाया गया। जब परिजनों की नजर सिलेंडर पर पडी तो आॅक्सीजन मीटर शून्य पर था, वे नर्स को बुलाकर लाए। उन्होंने वार्ड ब्वॉयज से कह दिया कि दूसरा सिलेंडर लाओ यह तो खाली है। इसके बाद दूसरा सिलेंडर लाया गया, लेकिन यह भी खाली थी।
तडप तडप कर मौत
कैंसर मरीज नरेंद्र आॅक्सीजन न मिलने पर वह तडपने लगा, इस पर परिजन भी चीखने चिल्लाने लगे। करीब एक घंटे बाद भरा हुआ आॅक्सीजन सिलेंडर लाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। प्राचार्य डॉ एसके गर्ग लखनऊ में मीटिंग में गए हुए थे, उनका कहना है कि यह गंभीर मामला है, इसकी जांच कराई जाएगी।
15 दिन में लापरवाही से चार मौतें
एसएन में 10—11 अगस्त की रात को बिजली जाने के बाद बाल रोग विभाग के आईसीयू के वेंटीलेटर बंद हो गए थे। वेंटीलेटर चलाने के लिए जनरेटर भी नहीं चलाया गया। इसके चलते एक के बाद एक तीन नवजात की मौत हो गई थी। सिटी मजिस्टेट रेखा एस चौहान और सीएमओ डॉ बीएस यादव की जांच में सामने आया था कि एक साल से जनरेटर बंद था। उसे चलाया ही नहीं गया। इस घटना के 15 दिन बाद कैंसर मरीज की आॅक्सीजन न दिए जाने से मौत का दूसरा बडा मामला सामने आया है।
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