आगरालीक्स …आगरा में गुर्दे की पथरी क्यों बढ रही है, डॉक्टर भी हैरान हैं, देखिए क्या है कारण और इलाज।
रविवार को यूरोलाॅजिकल सोसाइटी आॅफ इंडिया के तत्वावधान में रविवार को सिकंदरा स्थित रेनबो हाॅस्पिटल में मिनीमल इनवेसिव यूरोलाॅजी (गुर्दे की पथरी एवं प्रोस्टेट का दूबीन व लेजर आयोजित मास्टर क्लास के अंतर्गत वरिष्ठ यूरोलाॅजिस्ट डा. मधुसूदन और मेदांता मेडिस्टिी गुडगांव से आए वरिष्ठ यूरोलाॅजिस्ट डा. पंकज वाधवा द्वारा सभागार में बैठे देश-विदेश से आए चिकित्सकों को लाइव वर्कशाॅप के जरिए जबकि दुनिया के विभिन्न देशों में चिकित्सकों को वेबकास्ट (web cast) की मदद से मिनीमल इनवेसिव यूरोलाॅजी (PCNL), यूआरएस (URS) और आरआईआरएस (RIRS) तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया गया। आगरा में डा. मधुसूदन अग्रवाल के द्वारा समय-समय पर यह कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं ताकि देश-दुनिया भर में मरीजों को लाभ पहुंचाया जा सके। इस दौरान डा. दिलीप मिश्रा, डा. मनोज शर्मा आदि मौजूद थे।

गुटखा, तंबाकू है सबसे बडी वजहः डा. मधुसूदन अग्रवाल
डा. मधुसूदन अग्रवाल ने बताया कि उत्तर भारत में गुर्दे की पथरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां के मरीजों में पथरी का आकार भी बडा होता है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह गुटखा, तंबाकू है। यदि इस समस्या से बचाना है तो गुटखे का सेवन बिलकुल न करें। पानी खूब पिएं। उन्होंने बताया कि यूरिनरी इनफेक्शन के कारण भी गुर्दे की पथरी होने की आशंका रहती है। दूध के उत्पादों का सेवन भी कम करना चाहिए। इससे दोबारा पथरी होने की आशंका रहती है। अक्सर कामकाजी लोग टाॅयलेट की सुविधा न होने से पानी कम पीते हैं। इससे भी गुर्दे की पथरी के केस बढ़ रहे हैं।

मरीज को आॅपरेशन का अहसास भी नहीं होताः डा. पंकज वाधवा
मेदांता मेडिसिटी गुड़गांव के डा. पंकज वाधवा ने बताया कि इस तकनीक की मदद से गुर्दे की पथरी के आॅपरेशन के बाद टांका लगाने की आवश्यकता भी नहीं होती। दो से तीन मिलीमीटर के छेद से पथरी कब निकल गई, मरीज को इसका अहसास तक नहीं होता। उन्होंने बताया कि एक से दो साल के बच्चों में भी गुर्दे की पथरी देखने को मिल रही है, यह हैरान करने वाला है।