आगरालीक्स… नवरात्र में नौ देवियों का जीवन पर 9 अलग-अलग प्रभाव हैं। मनोविकार, भय को दूर करें, संतान की उन्नति, ग्रह शांति एवं सुख समृद्धि के उपाय।

माता की आराधना से मिलती है सफलता

श्री गुरु ज्योतिष संस्थान गुरु रत्न भण्डार के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक इस तरह से उपाय करने से मिलेगी सफलता।
🌟1. शैलपुत्री: मानव मन पर अधिपत्य रखती पहली दुर्गा चंद्र स्वरूपा देवी शैलपुत्री शाश्वत जीवन में ये स्वरुप है उस नवजात शिशु का जिसने, जो अबोध है, निष्पाप है जिसका मन निर्मल है।
♦️उपाय: मनोविकार से मुक्ति के लिए मां शैलपुत्री को सफेद कनेर के फूल चढ़ाएं।
🍁2. ब्रह्मचारिणी: तामसिक इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करती दूसरी दुर्गा मंगल स्वरूपा देवी ब्रह्मचारिणी शाश्वत जीवन में ये स्वरुप है उस बच्चे का जो अब बड़ा हो रहा है, विद्यार्थी है और जिसका जीवन ही ज्ञान स्वरूप है।
♦️उपाय: शक्ति प्राप्ति के लिए मां ब्रह्मचारिणी को सिंदूर का चोला चढ़ाएं।
🌻3. चन्द्रघण्टा: कामोत्तेजना को वश में रखती तीसरी दुर्गा शुक्र स्वरूपा देवी चन्द्रघण्टा शाश्वत जीवन में ये स्वरुप उस नवयोवना का है जिसमें प्रेम का भाव जागृत है तथा जो व्यसक कि श्रेणी में आ गया है।
♦️उपाय: प्रेम में सफलता के लिए मां चन्द्रघण्टा को चमेली का इत्र चढ़ाएं।
🏵4. कूष्मांडा: जीवनी शक्ति का संचरण करती चौथी दुर्गा सूर्य स्वरूपा देवी कूष्माडा शाश्वत जीवन में ये स्वरुप उस विवाहित स्त्री और पुरुष का है जिसके गर्भ में नवजीवन पनप रहा है अर्थात जो अपनी गर्भावस्था में है।
♦️उपाय: संतति सुख कि प्राप्ति के लिए मां कूष्मांडा पर जायफल चढ़ाएं।
🌺5. स्कंदमाता: पालन शक्ति का संचरण करती पांचवीं दुर्गा बुद्ध स्वरूपा देवी स्कंदमाता यशाश्वत जीवन में ये स्वरुप उस महिला अथवा पुरुष का है जो माता-पिता बनकर अपने बच्चों का लालन-पोषण करते हैं।
♦️उपाय: संतान कि सफलता के लिए स्कंदमाता पर मेहंदी चढ़ाएं।
💥6. कात्यायनी: पारिवारिक जीवन का निर्वाहन करती षष्टम दुर्गा बृहस्पति रूपा देवी कात्यायनी शाश्वत जीवन में ये स्वरुप उस अधेड़ महिला अथवा पुरुष का है जो परिवार में रहकर अपनी पीढ़ी का भविष्य संवार रहे हैं।
♦️उपाय: पारिवारिक सुख-शांति के लिए मां कात्यायनी पर साबुत हल्दी कि गाठें चढ़ाएं।
🌷7. कालरात्रि: वृद्धावस्था का अनुभव लिए सप्तम दुर्गा शनि स्वरूपा देवी कालरात्रि शाश्वत जीवन में ये स्वरुप उस वृद्ध महिला अथवा पुरुष का है जो पौत्रों-पौत्री के सुख के लिए जी रहा है और काल (मृत्यु) से लड़ रहा है।
♦️उपाय: मृत्यु भय से मुक्ति के लिए मां कालरात्रि पर काले चने का भोग लगाएं।
⭐8. महागौरी: मृतावस्था का चोला पहने अष्टम दुर्गा राहू स्वरूपा देवी महागौरी शाश्वत जीवन में ये स्वरुप उस मरणासन्न प्राप्त उस वयोवृद्ध महिला अथवा पुरुष का है जो कफन पहने हैं तथा अर्थी पर सवार हो मृत पड़ा है।
♦️उपाय: सदगति कि प्राप्ति के लिए मां महागौरी पर सौंठ चढ़ाएं।
🔹9. सिद्धिदात्री: सिद्धार्थ प्राप्त पंच महाभूत में विलीन नवम दुर्गा केतु स्वरूपा सिद्धिदात्री शाश्वत जीवन में ये स्वरुप उस देह त्याग कर चुकी उस आत्मा का है जिसने जीवन में सर्व सिद्धि प्राप्त करके स्वयं को परमेश्वर में विलीन कर लिया है।
♦️उपाय: मोक्ष कि प्राप्ति के लिए मां सिद्धिदात्री पर केले का भोग लगाएं।
ग्रह शांति के लिये पूजा
🌺पहला नवरात्र मंगल की शांति पूजा – नवरात्र के पहले दिन यानि प्रतिपदा को मंगल ग्रह की शांति के लिये पूजा की जाती है। मंगल की शांति के लिये प्रतिपदा को स्कंदमाता के स्वरूप की पूजा करनी चाहिये।
🔥दूसरा नवरात्र राहू की शांति पूजा – द्वितीया तिथि को दूसरा नवरात्र होता है इस दिन राहू शांति के लिये पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से राहू ग्रह की शांति होती है।
🍁तीसरा नवरात्र बृहस्पति की शांति पूजा तृतीया को तीसरे नवरात्र में मां महागौरी के स्वरूप की पूजा बृहस्पति की शांति के लिये होती है।
🏵चौथा नवरात्र शनि की शांति पूजा – चतुर्थी तिथि को शनि की शांति के लिये मां कालरात्रि के स्वरूप की पूजा करनी चाहिये।
💥पंचम नवरात्र बुध की शांति पूजा – पांचवें नवरात्र में पंचमी तिथि को बुध की शांति के लिये पूजा की जाती है इस दिन मां कात्यायनी के स्वरूप की पूजा करनी चाहिये।
🌸छठा नवरात्र केतु की शांति पूजा – षष्ठी तिथि को छठा नवरात्र होता है जिसमें केतु की शांति के लिये पूजा की जाती है। मां कुष्मांडा की पूजा इस दिन कर केतु की शांति की जा सकती है।
🔸सातवां नवरात्र शुक्र की शांति पूजा – शुक्र की शांति के लिये सप्तमी तिथि को सातवें नवरात्र में माता सिद्धिदात्रि के स्वरूप का पूजन करना चाहिये।
⭐आठवां नवरात्र सूर्य की शांति पूजा – अष्टमी तिथि को आठवें नवरात्र पर माता शैलपुत्री के स्वरूप की पूजा करने से सूर्य की शांति होती है।
🌷नवां नवरात्र चंद्रमा की शांति पूजा– नवमी के दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा करने से चंद्रमा की शांति होती है।