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UPCON 2025 in Agra: Applying hair dye and excessive use of cosmetics can also cause infertility…#agranews

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आगरालीक्स…सिर में डाई लगाने और कॉस्मेटिक का अधिक प्रयोग से भी हो सकती है बांझपन की समस्या. आगरा में विशेषज्ञों ने गर्भधारण से लेकर प्रसव तक की समस्याओं पर दी जानकारियां…नई तकनीकें भी बताईं

बैंगलूरू से आईं डॉ. शीला माने ने बताया कि सिर में डाई लगाने, कास्मेटिक का अत्यधिक इस्तेमाल करने से भी महिलाओं के अंडाणु पर असर पड़ रहा है और इसके कारण भी बांझपन की समस्या बढ़ी है। जीवनशैली में हो रहे बदलाव, शारीरिक परिश्रम बंद होने से पालीसिस्टिक ओवरी डिसआर्डर बढ़ रहे हैं। इसके बाद में गर्भधारण में समस्या आती है और मधुमेह होने का खतरा रहता है। यह जानकारी उन्होंने एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री व प्रसूति रोग विभाग व एओजीएस द्वारा होटल डबल ट्री बाई हिल्टन में आयोजित 36वां यूपीकॉन 2025 कार्यशाला में दी.

बांझपन की बढ़ रही समस्या
दिल्ली से आईं डॉ. सोनिया मलिक ने बताया कि पिछले 15 सालों में बांझपन की समस्या तेजी से बढ़ी है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण अधिक उम्र में शादी है अब बच्चे ना होने पर औसत 38 की आयु की महिलाएं डॉक्टरों के पास पहुंच रही हैं। उम्र बढ़ने पर अंडाणु का भंडार बहुत कम हो जाता है इसलिए गर्भधारण में समस्या आती है। इसी तरह से पुरुषों में भी समस्या बढ़ी है। इसके साथ ही खान पान, तनाव और प्रदूषण से भी प्रजनन दर में कमी आ रही है। 20 से 30 वर्ष की आयु में महिलाओं में अंडाणु की मात्रा अच्छी होती है यही उम्र होती है गर्भधारण की लेकिन शादी ही अब 30 साल के बाद हो रही है।

अब नई तकनीकों से बचाया जा सकता है गर्भाशय
प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्त्राव (पीपीएच) होने से एक लाख में 90 महिलाओं का मौत हो जाती है। अक्सर ऐसे मामलों में प्रसूता की जान बचाने के लिए गर्भाशय निकालना पड़ता है। लेकिन अब ऐसी कई नई तकनीकें (बच्चेदानी में टांके लगाना, बैलून) मौजूद हैं, जिससे गर्भाशय को बचाया जा सकता है। अहमदाबाद के डॉ. महेश गुप्ता ने भारत सरकार में पैटेंट अपनी (comoc-mg) तकनीक पर व्याख्यान के दौरान बताया कि (comoc-mg) तकनीक से गर्भाशय निकाले बिना शत प्रतिशत महिला की जान को बचाया जा सकता है। इसके लिए डॉ. महेश देश विदेश में डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने का काम भी कर रहे हैं।

ये रहे उपस्थित
आज वर्कशॉप के उद्घाटन सत्र में अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति की अधयक्ष डॉ. सरोज सिंह व सचिव डॉ. रिचा सिंह ने दुपट्टा पहनाकर किया। पद्मश्री डॉ. उषा शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर वर्कशॉप का शुभारम्भ किया। मंच पर डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा, डॉ. जयदीप मल्होत्रा, डॉ. शीला माना, डॉ. शशिलता काबरा, डॉ. सोमिया मलिक, डॉ. स्मिता मनचंदा, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. सीके गर्ग, डॉ. नवनीत मगन, डॉ. मोइद, डॉ. नीरज जादव, डॉ. बी कल्पना मुख्य रूप से मौजूद थीं। वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने डमी पर प्रजनन, बांझपन, कॉस्मेटिक एंड स्थेटिक गाइनी, अट्रासाउंड, पीपीएच, क्रिटिकल केयर जैसे विषयों का अभ्यास कराया। रवि वुमैन हॉस्पीटल में एंडोस्कोपी वर्कशॉप का आयोजन किया गया। वर्कशॉप में आयोजन समिति की डॉ. शिखा सिंह डॉ. निधि गुप्ता, डॉ. आरती मनोज, डॉ. सीमा सिंह, डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. सुषमा गुप्ता, डॉ. पूनम यादव, डॉ. निहारिका मल्होत्रा डॉ. रत्ना शर्मा, डॉ. हेमा सडाना, डॉ. मनीषा गुप्ता, डॉ. नीलम रावत, डॉ. मोहिता पैंगोरिया, डॉ. मीनल जैन, डॉ. उर्वशी, डॉ. अनु पाठक, डॉ. अभिलाषा यादव, डॉ. आकांक्षा गुप्ता, डॉ. रत्ना शर्मा, डॉ. सविता त्यागी, डॉ. कीर्ति दुबे, भारती माहेश्वरी आदि उपस्थित थीं।

महिला स्वास्थ के साथ जनसंख्या नियंत्रण पर ध्यान देना जरूरीः पद्मश्री डॉ. उषा शर्मा
अब तक चार लाख से अधिक नसबंदी कर चुकी पद्मश्री डॉ. उषा शर्मा ने कहा कि हमें महिला स्वास्थ के साथ जनसंख्या नियंत्रण पर भी ध्यान देना होगा। भारत में विकास हो रहा है, परन्तु अनियंत्रित जनसंख्या के कारण वह प्रभावशाली नहीं हो पाता। कहा भारत में जनसंख्या को नियंत्रत न कर पाने में बहुत बड़ा कारण वोट बैंक की राजनीति है। सरकार को बड़े परिवारों में सुविधाएं देना (फ्री राशन, नौकरी में प्रमोशन, आरक्षण) कम कर देना चाहिए। चोटे परिवार वालों को अधिक सुविधाएं मिले तो लोगों में जागरूकता बढ़ेगी। 70 के दशक में नसबंदी कराने में पुरुषों का प्रतिषत मात्र 2-3 ही। आज लगभग 10-12 प्रतिशत है। भुगतना महिलाओं को पड़ता है इसलिए वही आगे आती हैं। डॉ. उषा को अलीगढ में एक दिन में 611 नसबंदी करने लिए ही पदमश्री से सम्मानित किया गया। नसबंदी के लिए कैफेटेरिया एप्रोच के साथ काउंसिलिंग की जानी चाहिए थी। ऐसा नहीं हुआ, देश के लिए बढती जनसंख्या एक बडी समस्या है, इसे नसबंदी से रोका जा सकता है।

डॉ. सुनीता तेंदुलवाडकर करेंगी कार्यशाला का शुभारम्भ
कार्यशाला का उद्घाटन 22 मार्च को सुबह 11.30 बजे मुख्य अतिथि डॉ. सुनीता तेंदुलवाडकर व विशिष्ठ अतिथि एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता करेंगे। जिसमें उप्र के विभिन्न शहरों के अलावा दिल्ली, रोहतक, फरीदाबाद, जयपुर, मुम्बई, अहमदाबाद, नागपुर, चैन्नई, मनीपाल बैंगलुरु, भोपाल, इंदौर, शिमला, भुवनेश्वर से प्रख्यात विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिया जाएगा।

Written by
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