आगरालीक्स.. आगरा में बॉम्बे ब्लड ग्रुप होने से गर्भवती को खून नहीं मिल रहा था, महाराष्ट्र से दो युवक आए, गर्भवती और गर्भस्थ शिशु की जान बचाने के लिए खून दिया।
आगरा मंडल के बल्देव मथुरा निवासी ओम प्रकाश ने अपनी आठ
महीने की गर्भवती पत्नी पूनम (25 ) को हीमोग्लोबिन 3.5 पहुंच जाने पर हॉस्पिटल में भर्ती किया। डॉक्टर ने खून का इंतजाम करने के लिए कहा, परिजन शहर की ब्लड बैंक में घूमते रहे। ब्लड ग्रुप की पहचान न होने पर समाजसेवी संस्थाओं और ब्लड बैंक की मदद से ब्लड के सैंपल आरएमएल हॉस्पिटल, दिल्ली भेजे गए। वहां बॉम्बे ब्लड ग्रुप डिटेक्ट किया गया, यह रेयर ब्लड ग्रुप है।
24 घंटे से कम समय में मिल गया ब्लड
बॉम्बे ब्लड ग्रुप डोनर से संपर्क किया। 24 घंटे से भी कम समय में विक्रम विश्रांत यादव, तांसगांव महाराष्ट्र और रविंद्र अशेत्कर, शिरडी महाराष्ट्र आगरा पहुंच गए। लोकहितम ब्लड बैंक में उन्होंने दो यूनिट रक्तदान किया। संस्थाओं ने उनके रहने की व्यवस्था कराई है, पूनम के पति ओम प्रकाश मजदूरी करते हैं। संस्थाएं उनकी आर्थिक मदद भी कर रही हैं। इस दौरान विधायक जगन प्रसाद गर्ग, सहायक आयुक्त औषधि एसएस सिंह, लोकहितम ब्लड बैंक के निदेशक अखिलेश अग्रवाल, एक पहल के सचिव मनीष राय, दान फाउंडेशन के सचिव दीपक त्यागी, सत्यमेव जयते के ट्रस्टी मुकेश जैन, डॉ. आशीष अग्रवाल, डॉ. अंकुर गोयल, मुकेश जैन, ब्लड कनेक्ट के अनुज गोयल, सनी अरबाज, अभिनीत प्रताप सिंह, अंकित अमरनानी, रक्तदाता फाउंडेशन मथुरा से अमित गोयल, शुभम अग्रवाल, किशोर गोयल आदि मौजूद रहे।
1952 में दिया गया बॉम्बे ब्लड ग्रुप नाम
बॉम्बे ब्लड ग्रुप के मरीज में इसी ग्रुप के व्यक्ति का ब्लड ट्रांसफ्यूज हो सकता है। इसे 1952 डॉ. वाई एम भेडे ने डिस्कवर किया था, यह ब्लड ग्रुप बॉम्बे में मिला था इसलिए बॉम्बे ब्लड ग्रुप नाम दिया गया है।