आगरालीक्स…(24 July 2021 Agra News) आगरा के ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्रा ने बताई विलक्षण घटना जिससे पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जीवनभर बन गए उनके गुरु
आज गुरु पूर्णिमा है. जीवन में गुरु का बहुत बड़ा महत्व है. हमारे सनातन धर्म में हमेशा गुरुओं का सम्मान किया जाता है और उन्हें भगवान से भी उच्च स्थान दिया जाता रहा है. आगरा के ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्रा भी पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के शिष्य हैं. आगरालीक्स ने जब गुरु पूर्णिमा पर उनके जीवन में गुरु के महत्व व प्रभाव पर चर्चा की गई तो उन्होंने अपने साथ घटित एक विलक्षण घटना शेयर की. ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्रा ने बताया कि उनकी माता जी आचार्य जी की बड़ी भक्त थीं. एक बार हमारी माता जी ने हमसे कहा कि तुम भी आचार्य जी के साथ जुड़ जाओ. इस पर हमने माताजी से साफ मना कर दिया कि हम किसी बाबा के चक्कर में नहीं फंसने वाले. हम उस समय फिरोजाबाद में रहा करते थे. एक बार तो हमने मंदिर से आचार्य जी की फोटो ही हटा दी. हमारे आसपास के लोग भी कहा करते थे कि तुम्हारी माताजी क्या बाबा बन गई हैं जो कि झोला लेकर गेहूं चावल का कलेक्शन करने चल देती हैं.
वर्ष 1995 की है घटना
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्रा ने बताया कि वर्ष 1995 में आगरा के आंवलखेड़ जो कि आचार्य जी की जन्मस्थली है वहां पर गायत्री परिवार की ओर से काफी बड़ा कार्यक्रम आयोजित होने वाला था. इस पर हमारी माताजी ने हमसे कहा कि जाओ हमें आंवलखेड़ा छोड़ आओ. इस पर हम माताजी को लेकर आंवलखेड़ा पहुंचे तो वहां काफी बड़ा प्रोग्राम आयोजित होने जा रहा था. माताजी ने हमसे कहा कि यहां यज्ञ होगा, बहुत सारे लोग आएंगे. बहुत बड़ा नगर सजता हुआ देखकर हम भी आश्चर्यचकित रह गए. हमने पूछा कि यहां कौन रहेगा तो इस पर वहां के लोगों ने कहा कि यहां विदेशी लोग रहेंगे. तब हमें पहली बार ऐसा लगा कि आचार्य जी का प्रभाव बहुत अधिक है. हमने देखा कि कई युवा वहां पहुंचते ही दंडवत करने लगे. इसे देखकर हम मन ही मन मुस्कुरा रहे थे. हमने सोचा कि देखो कैसे—कैसे युवा बाबा हो गए हैं.
आगे उन्होंने बताया कि हमासरी माताजी को आगरा रोड पर शंकराचार्य नगर में जगह मिली थी. जब हम सामान उतारने लगे तो वहां मौजूद लोगों ने सामान नहीं उतारने दिया. वो खुद हमारा सामान टैंट में ले गए. हमने अपनी माता से कहा कि ये तो बहुत अच्छे लोग हैं. सामारा सामान रखवा दिया. यहां हमारी माताजी ने एक बार फिर हमसे कहा कि रुकना चाहोगे. इस पर हमने कहा कि नहीं हम आगरा जाएंगे और क्लीनिक पर बैठेंगे. वहां हमने एक डिसपेंसरी देखी जहां पर डॉक्टर की ड्यूटी लगी थी. तभी हमारी माताजी ने कहा कि जब यहां आए हो तो एक बार दर्शन कर आओ. इस पर हम गायत्री माता के दर्शन करने के लिए वहां पहुंचे. हम जब वहां पहुंचे तो चौंक गए, क्योंकि वहां करीब 100 से 150 कम्प्यूटर भी लगे थे जो कि उस समय बहुत बड़ी बात थी. हम वाकई में चौंक गए और सोचा कि ये बहुत बड़ा आयोजन है. रास्ते में आगरा रोड पर मुख्य चिकित्सायल बना हुआ था. ये आपातकालीन बना था. तभी हमाने मन में विचार आया कि अगर हमारी ड्यूटी यहां लग जाए तो हम यहां रह भी लेंगे और मेला भी देख लेंगे.
यही सोचते सोचते हम वापस अपनी माताजी के पास पहुंच गए. हमने अपनी मातजी से कहा कि हम एक शर्त पर यहां रह सकते हैं अगर हमारी ड्यूटी चिकित्सायल में लगा दी जाए. उस पर हमारी मातजी ने कहा कि ये अब नहीं हो पाएगा. हमारे वश की बात नहीं है. तभी हमारे साथ विलक्षण घटना घटित हुई, जिसे सुनकर हमारे रौंगटे खड़े हो गए. वहां एक स्वयंसेवक भाई आया और उसने कहा कि मातजी आपके बेटे की ड्यूटी यहां लग गई है. फिर हम वहां रहे. हमने वहां काम किया और गुरुदेव के बारे में बहुत सी बातें सुनी और लोगों ने अपने जीवन में घटित घटनाओं के बारे में हमें बताया.
वर्ष 2002 में हमारी शादी होने के बाद हमारी माताजी हमें और हमारी पत्नी को हरिद्वार ले गईं. यहां हमने गायत्री मंत्र की दीक्षा ली. तब से हम गायत्री परिवार से जुड़ गए. उन्होंने बताया कि गुरुवर से जुड़ने के बाद हमारे जीवन में बहुत अधिक बदलाव आया है. हमारे गुरुदेव ने कहा था कि आप गलत मार्ग से सफलता प्राप्त करने की बजाए सही मार्ग पर आने वाली परेशानियों को शिरोधार्य करो. इसके बाद हमने कभी गलत तरीके का कोई काम नहीं किया. हमारा व्यवहार ही बदल गया. गुरुवर की कृपा हैं. आज हम जो कुछ भी हैं. गुरुदेव को अपने जीवन में साक्षात महसूस किया हैं संकट या परेशानी में गुरुदेव का स्मरण करता हूं तो मेरा मार्गदर्शन होता है. मुझे जानकारी प्रापत हो जाती है.