आगरालीक्स…भक्त और भगवान के बीच दीवार का काम करता है अहंकार. यही आज की सबसे बड़ी समस्या. अहंकारियों की स्थिति अंधों जैसी…
महालक्ष्मी मन्दिर बल्केश्वर में श्रीमद देवी भागवत की बह रही ज्ञान गंगा के अष्टम दिवस पर श्री धाम वृन्दावन चार सम्प्रदाय से पधारे व्यास बाल योगी पचौरी ने बताया कि जब माँ भगवती के हाथों महिषासुर के वीर योद्धा मारे गये गये तब “किम कर्तव्य विमुढ” हो गया। परन्तु वीरता का अभिमान अभी भी शरीर से टूटा नहीं। व्यास जी ने कहा कि अहंकार आज की सबसे बड़ी समस्या है, अहंकारियों की स्थिति अंधो जैसी होती है। उनके पास ऑंख तो होती है परन्तु दिखाई नहीं देता है। पूरी लंका तबाह हो रही थी परन्तु रावण को लंका का तबाह होना कहां दिखा। कंस की आँख थी परंतु वह श्रीकृष्ण भगवान की शक्ति को कहां देख पाया। दुर्योधन तो ऑंख होते हुये भी अन्धा ही रहा।
।। अहम-अहम करोति इति अहंकार।।
अभिमान भक्त और भगवान के बीच दीवार का काम करता है। आज महिषा सुर भी अभिमान के वशीभूत होकर दारूक के साथ रणभूमि मे आया। अन्तोतगत्वा माता जी ने चक्र से उसका सिर काट डाला। महिषासुरादि को मार कर माताजी मणि दीप पधारी है।
बाल योगी पचौरीजी ने कहा भूमण्डल पर देवताओ में सूर्यवंशी श्रीराम जी के भाई शत्रुघ्न धर्मज्ञ राजा ने ही राज्य संभाला है। जो धर्म से राज्य का पालन करते है।।