आगरालीक्स…आगरा में पालतू जानवर पालने पर पड़ोसी की एनओसी मामले में फिआपो की आपत्ति के बाद पीछे हटा नगर निगम
पालतू जानवर पालने से पहले नगर निगम में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए पड़ोसी की अनापत्ति मामले में अब नगर निगम पीछे हट गया है। ताजनगरी की तमाम एनजीओ ने जब इस विषय पर एडब्ल्यूबीआई (एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया) व फिआपो (फैडरेशन ऑफ इंडियन एनीमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन) में आपत्तियां दर्ज कराई तो इन संस्थाओं ने नगर निगम से सम्पर्क साधा। अब नगर निगम इस खबर को समाचार पत्रों की गलती करार दे रहा है।
फिआपो की लीगल एडवाइजर दीपिका (दिल्ली) ने बाताया कि उनके पास ताजनगरी के तमाम पशु प्रेमी व संस्थाओं के लगातार मेल व फोन कॉल आ रहे हैं। पालतू पशु पालने पर पड़ोसी की अनुमति लेने के मामले ड्राफ्ट तैयार कर सदन में पास कराने को लेकर पशु प्रेमियों को चिन्ता में डाल दिया है। इस विषय पर जब फिआपो की लीगल एडवाइजर दीपिका ने आगरा नगर निगम के सम्बंधित अधिकारियों से जब बात की तो उन्होंने सारा माला समाचार पत्रों पर डालते हुए कहा कि कोई भी नियम एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के विरुद्ध नहीं किया जाएगा।

पशु प्रेमियों को परेसान करने के बजाय गैरकानूनी ब्रीडिंग सेंटरों पर अंकुश लगाए नगर निगम
कैस्पर्स होम की निदेशक विनीता अरोरा ने कहा कि पालतू जानवरों का जरिस्ट्रेशन करना गलत नहीं है, लेकिन बेवजह के नियम बनाकर नगर निगम पशुप्रेमियों को परेशान करने का काम न करे। एडब्ल्यूबीआई के नियमानुसार मकान मालिक को भी अपने किराएदार को भी पालतू पशु पालने से रोकने का अधिकार नहीं है, जब तक की उससे किसी तरह का नुकसान न हो रहा है। कहा कि आगरा में एक भी लाइसेंसी ब्रीडर नहीं है। फिर भी दर्जनों ब्रीडिंग सेंटर चल रहे हैं। कैनल क्लब ऑफ इंडिया (केसीआई) के रजिस्ट्रेशन अमान्य हैं। हर ब्रीडर को अब एडब्ल्यूबीआई या अपने जिले के पशु विभाग से लाइसेंस लेना आवश्यक है। ताकि विदेसी ब्रीड का उत्पीडन न हो सके। नगर निगम को प्रतिवर्ष पांच हजार स्ट्रीट डॉग की नसबंदी के लिए (प्रति डॉग 1000 रुपए) सरकार से पैसा मिलता है। फिर आवारा श्वानों की संख्या कैसे बढ़ रही है। नगर निगम को जनता की सहूलियत व पशुओं के हित में कार्य करने की जरूरत है।