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Agra news:Shani and Mouni Amavasya on 21st, Mahayoga falling together, auspicious coincidence for those with seven and a half years

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आगरालीक्स…शनि-मौनी अमावस्या 21 जनवरी को है। दोनों का एक साथ पड़ना महायोग। साढ़े साती वालों के लिए शुभ संयोग। जानिये मुहूर्त, क्या करें उपाय।

इस बार की अमावस्या खास और शुभ

ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है इस बार यह अमावस्या और भी ज्यादा खास और शुभ पढ़ रही है क्योंकि इस बार की मौनी अमावस्या शनि अमावस्या भी है।

साढ़े साती वालों के लिए खास है अमावस्या

इस बार जिन लोगों की शनि की साढ़े साती चल रही है या शनि की महादशा अत्यंत खराब अवस्था में चल रही है जिन लोगों को रोजगार कारोबार में दिक्कत परेशानी है संतान बाधा है पढ़ाई लिखाई में ऊंचाइयों तक जाना चाहते हैं या कोई भी विशेष कार्य है उन लोगों के लिए यह है शनि मोनी अमावस्या इस बार विशेष खास है।

चंद्रमा. सूर्य और शुक्र का त्रिग्रही योग

इस दिन मकर राशि मेँ चंद्रमा. सूर्य और शुक्र का त्रिग्रही योग है शनिदेव कुंभ राशि में होंगे ,देव गुरु बृहस्पति मीन राशि में, मेष राशि में राहु ,वृषभ राशि में मंगल, तुला में केतु और बुद्ध धनु राशि के गोचर मे स्थित होगे जो एक शुभ संयोग है। अतःऐसे दिन  शनि मौनी अमावस्या का पड़ना अपने आप में एक महायोग है

ब्रह्मा जी ने सृष्टि की थी शुरुआत

🔹 इस दिन के पवित्र स्नान को कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के समान ही माना जाता है। पवित्र नदियों और सरोवरों में देवी देवताओ का वास होता है। धर्म ग्रंथों में ऐसा उल्लेख है कि इसी दिन से द्वापर युग का शुभारंभ हुआ था। लोगों का यह भी मानना है कि इस दिन ब्रह्मा जी ने मनु महाराज तथा महारानी शतरुपा को प्रकट करके सृष्टि की शुरुआत की थी।

मौन रहकर मन को संयम रखने का विधान

🔹 चन्द्रमा को मन का स्वामी माना गया है और अमावस्या को चन्द्रदर्शन नहीं होते, जिससे मन की स्थिति कमज़ोर होती है। इसलिए इस दिन मौन व्रत रखकर मन को संयम में रखने का विधान बनाया गया है।

मौन व्रत रखकर मन को संयमित करें

मौनी अमावस्या का भी यही संदेश है कि इस दिन मौन व्रत धारण कर मन को संयमित किया जाये। मन ही मन ईश्वर के नाम का स्मरण किया जाये उनका जाप किया जाये। यह एक प्रकार से मन को साधने की यौगिक क्रिया भी है। मौनी अमावस्या योग पर आधारित महाव्रत है। मान्यता है कि यदि किसी के लिये मौन रहना संभव न हो तो वह अपने विचारों में किसी भी प्रकार की मलिनता न आने देने, किसी के प्रति कोई कटुवचन न निकले तो भी मौनी अमावस्या का व्रत उसके लिये सफल होता है।

सच्चे मन से भगवान विष्णु व भगवान शिव की पूजा भी इस दिन करनी चाहिये।

घर में ही पानी में गंगाजल डालकर करें स्नान

🔸 शास्त्रों में इस दिन दान-पुण्य करने के महत्व को बहुत ही अधिक फलदायी बताया है। तीर्थराज प्रयाग में स्नान किया जाये तो कहने ही क्या यदि किसी व्यक्ति की सामर्थ्य प्रयाग त्रिवेणी के संगम अथवा अन्य किसी तीर्थ स्थान पर जाने की नहीं है तो उसे अपने घर में ही प्रात:काल उठकर दैनिक कर्मों से निवृत होकर नहाने के जल में गंगा जल मिलाकर स्नान आदि करना चाहिए।

व्रत नियम

🔸 प्रात:काल पवित्र तीर्थ स्थलों पर स्नान किया जाता है। स्नान के बाद तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, वस्त्रादि किसी गरीब ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों का तर्पण करने से भी उन्हें शांति मिलती है।

मौनी अमावस्या के उपाय

निर्णय सिंधु व्यास के वचनानुसार इस दिन मौन रहकर स्नान-ध्यान करने से सहस्त्र गौ दान का पूण्य मिलता है।

👉 शास्त्रो के अनुसार पीपल की परिक्रमा करने से ,सेवा पूजा करने से, पीपल की छाया से,स्पर्श करने से समस्त पापो का नाश,अक्षय लक्ष्मी की प्राप्ति होती है व आयु में वृद्धि होती है।

👉 इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के पेड़ की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन आदि से पूजा और पीपल के चारो और 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है।

👉 इस दिन जो भी स्त्री तुलसी या माँ पार्वती पर सिंदूर चढ़ा कर अपनी मांग में लगाती है वह अखंड सौभाग्यवती बनी रहती है।

👉 जिन जातको की जन्म पत्रिका में कालसर्प दोष है। वे लोग यदि मौनी अमावस्या पर चांदी के बने नाग-नागिन की विधिवत पूजा कर उन्हें नदी में प्रवाहित करे शिव जी पर कच्चा दूध चढाये,पीपल पर मीठा जल चढ़ा कर उसकी परिक्रमा कर पूजा करें।
👉 इस दिन जो लोग व्यवसाय में परेशानी उठा रहे है,वे पीपल के नीचे तिल के तेल का दिया जलाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मन्त्र का कम से कम 5 माला जप करे तो व्यवसाय में आ रही दिक्कते समाप्त होती है।इस दिन अपने पितरों के नाम से पीपल का वृक्ष लगाने से जातक को सुख, सौभग्य,पुत्र की प्राप्ति होती है,एव पारिवारिक कलेश दूर होते है।

👉 भगवान् शिव पर बेलपत्र, बेल फल, मेवा, तिल मिश्रित मिठाई, जनेऊ का जोड़ा आदि चढ़ा कर ॐ नमः शिवाय की 11 माला करने से असाध्य कष्टो में भी कमी आती है।

👉 प्रातः काल शिव मंदिर में सवा किलो साबुत चांवल और तिल अथवा तिल मिश्रित मिष्ठान दान करे।

👉 मौनीअमावस्या को तुलसी के पौधे की ॐ नमो नारायणाय जपते हुए  108 बार परिक्रमा करने से दरिद्रता दूर होती है।

👉 जिन लोग का चन्द्रमा कमजोर है वो गाय को दही और चांवल खिलाये अवश्य ही मानसिक शांति मिलेगी।

👉 इस दिन स्वास्थ्य, शिक्षा, कानूनी विवाद, आर्थिक परेशानियो और पति-पत्नी सम्बन्धि विवाद के समाधान के लिए किये गए उपाय अवश्य ही सफल होते है।

👉 इस दिन धोबी-धोबन को भोजन कराने,उनके बच्चों को किताबे मिठाई फल और दक्षिणा देने से सभी मनोरथ पूर्ण होते है।

👉 मौनीअमावस्या को  भांजा,ब्राह्मण, और ननद को मिठाई, फल,खाने की सामग्री देने से उत्तम फल मिलाता है।

👉 इस दिन अपने आसपास के वृक्ष पर बैठे कौओं और जलाशयों की मछलियों को (चावल और घी मिलाकर बनाए गए) लड्डू दीजिए। यह पितृ दोष दूर करने का उत्तम उपाय है।

👉 मौनी अमावस्या के समय जब तक सूर्य चन्द्र एक राशि में रहे, तब कोई भी सांसरिक कार्य जैसे-हल चलाना, कसी चलाना, दांती, गंडासी, लुनाई, जोताई, आदि तथा इसी प्रकार से गृह कार्य भी नहीं करने चाहिए।

🔥 मौनी अमावस्या,शनिवार 21जनवरी 2023 तिथि व मुहूर्त

🔥मौनी अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त

🔥 अमावस्या तिथि – शनिवार 21जनवरी 2023

🔥 अमावस्या तिथि आरंभ -प्रातः 06:22 बजे से ( शनिवार 21 जनवरी 2023

🔥 अमावस्या तिथि समाप्त शनिवार की रात्रि- ,02:22 बजे

Written by
Agraleaks Team

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