आगरालीक्स… आगरा में एक अलग ही मामला आया है, आज के दौर में लोग व्यस्त हैं, ऐसे में आगरा में भाईयों के बीच अपनी बुजुर्ग मां को मुखाग्नि देने के लिए लात घूंसे चले, श्मशान घाट पर पंचायत हुई, इसके बाद दो भाईयों ने मां को मुखाग्नि दी।
फतेहाबाद के पैंतीखेड़ा के निकट स्थित गांव में शांति देवी (86 वर्ष) की मृत्यु हो गई। पति की पहले ही मौत हो चुकी है, शांति देवी के छह पुत्र हैं, इसमें से दो बेटे गुड़गांव में रहते हैं। चार बेटे गांव में ही रहकर खेती करते हैं। शांति देवी की मृत्यु की सूचना पर बाहर रहने वाले पुत्रों सहित तमाम रिश्तेदार भी गांव में पहुंच गए। अंत्येष्टि की तैयारी शुरू हो गई। शांति देवी के एक पुत्र ने कहा कि अंत्येष्टि से पहले पोस्टमार्टम कराया जाए। दूसरों ने इसका विरोध किया। पोस्टमार्टम की बात कहने वाले का तर्क था कि मां को कहीं मार तो नहीं दिया गया। पोस्टमार्टम न कराने पर बात बन गई।
मुखाग्नि देने पर अडे सभी बेटे
शांति देवी को मुखाग्नि देने के लिए छह बेटे आगे आ गए। वे कहने लगे कि मां उसी से ज्यादा प्यार करती थी। गांव में रहने वाले बेटों का कहना था कि , ‘मां हमारे पास रहती थी सो मुखाग्नि का हक हमारा है। बाहर रहने वाले सबसे बड़े और छोटे बेटे ने कहा कि ‘हम तो परिवार की बेहतरी के लिए ही मां को छोड़कर नौकरी करने गए थे। मुखाग्नि तो हम ही देंगे। रिश्तेदारों और गांव वालों ने बहुत समझाया। बात बनने की जगह और बिगड़ गई। आपस में मारपीट होने लगी।
पंचायत के बाद हुई अंत्येष्टि
शांति देवी की अंत्येष्टि के लिए पंचायत हुई, कहा गया कि सबसे बड़ा या सबसे छोटे पुत्र द्वारा मुखाग्नि दी जाती है। कोई फैसला मानने को तैयार नहीं हुआ। कुछ रिश्तेदारों ने कड़े तेवर दिखाए। सब पुत्रों को अलग-अलग कर दिया। फिर एक भतीजे ने कहा कि ‘तुम फैसला नहीं कर पा रहे तो मुखाग्नि मैं दूंगा। घंटों बवाल के बाद इस बात पर फैसला हुआ कि सबसे बड़ा और सबसे छोटा बेटा संयुक्त रूप से मुखाग्नि देंगे।