आगरालीक्स…3 शुभ योग में 14 सितंबर सोमवार को मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी. जानिए घर में कितने दिन रख सकते हैं गणपति…गणपति स्थापना का शुभ समय भी जानें..
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी बताते हैं कि पंचांग की गणना के अनुसार, चतुर्थी तिथि का आरंभ 14 सितंबर को सुबह में 7 बजकर 6 मिनट पर आरंभ होगी और 15 सितंबर को सुबह में 7 बजकर 45 मिनट पर खत्म होगी। ऐसी मान्यता है कि गणेशजी का जन्म दोपहर के समय हुआ था। इसलिए गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर सोमवार को ही मनाया जाएगा। गणेश चतुर्थी के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं. उस दिन रवि योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग बन रहे हैं. ब्रह्म योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, उसके बाद से इंद्र योग बनेगा. वहीं रवि योग दोपहर में 01 बजकर 55 मिनट से अगले दिन 15 सितंबर को सुबह 06 बजकर 06 मिनट तक रहेगा.
सोमवार का शुभ संयोग :
इस वर्ष गणेश चतुर्थी सोमवार के दिन पड़ रही है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है, जो भगवान गणेश के पिता हैं। पिता और पुत्र के इस अद्भुत संयोग से इस बार का उत्सव आध्यात्मिक रूप से बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है।
आपको बता दें कि गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला 10 दिवसीय गणेश उत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इन 10 दिनों तक घरों और पंडालों में गणपति की भक्ति, आरती और धार्मिक अनुष्ठानों का माहौल बना रहता है। मान्यता है कि भगवान गणेश अपने भक्तों के जीवन से विघ्न दूर कर सुख, समृद्धि और शुभता का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
घर में कितने दिन रख सकते हैं गणपति –
हर परिवार में गणपति रखने की परंपरा अलग हो सकती है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की बप्पा को कितने दिन स्थापित करना है, इसका निर्णय अपनी पारिवारिक परंपरा और सुविधा के अनुसार किया जा सकता है।
डेढ़ दिन के गणपति
तीन दिन के गणपति
पांच दिन के गणपति
सात दिन के गणपति
दस या ग्यारह दिन तक गणपति
यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति अनंत चतुर्दशी तक प्रतिमा घर में रखे। जितने दिनों का संकल्प लिया गया हो, उतने दिनों तक नियमित पूजा और आरती करने के बाद सम्मानपूर्वक विसर्जन किया जा सकता है।
गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त –
गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी की मूर्ति स्थापना और पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष रूप से शुभ माना जाता है. साल 2026 में गणपति स्थापना के लिए शुभ समय –
गणपति स्थापना का अभिजीत मुहूर्त –
दोपहर 12:09 से 12:58 बजे तक।
गणेश पूजा का शुभ समय –
सुबह 11:20 से दोपहर 01:48 बजे तक।
शाम की पूजा का गोधूलि मुहूर्त –
शाम 06:42 से 07:05 बजे तक।
गणपति स्थापना और पूजा में इन बातों का रखें ध्यान :-
चंद्र दर्शन से बचें – धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना शुभ नहीं माना जाता। 14 सितंबर को सुबह 09:12 बजे से रात 08:58 बजे तक चंद्र दर्शन न करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर मिथ्या कलंक लग सकता है।
पूजा की दिशा और चौकी – गणेश जी की नई प्रतिमा को घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर स्थापित करें। चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाना शुभ माना जाता है।
पूजा सामग्री और भोग – गणपति पूजा में दूर्वा, लाल फूल जैसे गुड़हल, अक्षत और शमी के पत्ते जरूर अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक 10 दिवसीय गणेश उत्सव चलेगा, विसर्जन 25 सितंबर शुक्रवार को होगा। इन दिनों घर-घर में बप्पा की भक्ति और आरती से विघ्नों का नाश और सुख-समृद्धि का वास होता है।