आगरालीक्स …विटामिन डी की अधिक डोज से विटामिनोसिस होने का खतरा रहता है, आगरा में आईएसओपी की कांफ्रेंस के समापन पर बुधवार को होटल आईटीसी मुगल में इंटरनेशनल सोसायटी आॅफ फार्माकोविजिलेंस आईएसओपी की 16 वीं एनुअल कांफ्रेंस में इस पर चर्चा की गई। कांफ्रेस में 116 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इसमें दो भारतीय सहित तीन को बेस्ट पेपर प्रजेंटेशन के लिए सम्मानित किया गया।
डॉ सुमित सिंघल, अलीगढ ने बताया कि धूप पर्याप्त मात्रा में होने के बाद भी विटामिन डी और कैल्शियम की कमी का एक बडा कारण सही समय पर धूप में न बैठना है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आछे से एक घंटे की धूप से विटामिन डी मिलता है, लेकिन बदलती जीवनशैली में सूर्योदय के समय लोग सो रहे होते हैं और सूर्यास्त के समय घर और कार्यालय में होते हैं। उन्होंने बताया कि 20 फीसद युवाओं को हड्डी संबंधित बीमारी हो रही हैं। हड्डियों में प्रोटीन और कैल्शियम होता है, फास्ट फूड के सेवन से इन दोनों की कमी होती जा रही है। इसके चलते विटामिन डी की दवाओं का सेवन बढ गया है। इससे शरीर में विटामिन डी की मात्रा अधिक पहुंच रही है, इससे हाइपर विटामिनोसिस डी हो रहा है। अधिक मात्रा में विटामिन डी पहुंचने पर यह ब्लड के माध्यम से दिल और किडनी पर असर डालती है। इसलिए डॉक्टर के परामर्श और जांच के बाद ही विटामिन डी लेनी चाहिए। वहीं बच्चों को पानी मिला हुआ दूध पिलाया जाता है, इससे कैल्शियम की कमी होने लगती है और बच्चों के पैर टेढे हो जाते हैं। पोस्टर प्रजेंटेशन के निर्णायक मंडल में डॉ जिया उर रहमान, डॉ शांति पाल, डॉ लुइस इलेक्टो रहे। समापन समारोह में आईएसओपी के अध्यक्ष हार्वे ली लोएट, आयोजन समिति के चेयरमैन प्रो केसी सिंघल, स्टेन ओल्फेन मौजूद रहे।
बच्चों के लिए दवाएं और डोज हो निर्धारित
प्रो केसी सिंघल ओरेशन में बच्चों में दवाओं के इस्तेमाल और उसकी डोज पर चर्चा की गई। आठ से छह महीने के नवजात में लिवर डेवलेप होता है, इसलिए ऐसी दवाएं नहीं देनी चाहिए जो लिवर में मेटाबॉलाइज होती हैं। वहीं, हर उम्र के हिसाब से अलग अलग डोज होती है, अधिक डोज देने पर समस्या हो सकती है। इसके साथ ही जॉन आॅस्टिल आॅरेशन आयोजित किया गया। हार्वे ली लोएट और एंड्रू बेटे मौजूद रहे।
कैंसर की दवाओं में बायोसिमिलर मॉल्युकूल हैं सस्ते
कैंसर की दवाओं पर सचिव डॉ संदीप अग्रवाल ने प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने कहा कि कैंसर का इलाज महंगा है, कैंसर की दवाएं जो उसकी बायोसिमिलर हैं, उसका कॉस्ट कम है। इन दवाओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
भारत में हड्डियों का हाल
60 साल से अधिक उम्र 75 फीसद लोगों की हड्डियां कमजोर
50 से 60 साल की उम्र 60 फीसद लोगों को हड्डी संबंधी समस्या
25 से 30 साल की उम्र 20 फीसद लोगों को हड्डी संबंधी समस्या
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