आगरालीक्स… श्री जगन्नाथ भगवान बीमार हैं, उन्हें काढ़ा दिया जा रहा है। शीतल लेप किए जा रहे हैं। आखिर भगवान बीमार क्यों पड़ते हैं, विस्तृत जानकारी।
जगन्नाथ पुरी के भक्त माधवदास
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा बताते हैं कि उड़ीसा प्रान्त में जगन्नाथ पुरी में एक भक्त रहते थे, श्री माधव दास वह अकेले रहते थे, कोई संसार से इनका लेना देना नहीं था। अकेले बैठे भजन करते थे, नित्य प्रति श्री जगन्नाथ प्रभु का दर्शन करते थे और उन्ही को अपना सखा मानते थे, प्रभु के साथ खेलते थे।
एक बार माधव दास जी को अतिसार रोग हो गया। वह इतने दुर्बल हो गए कि उठ-बैठ नहीं सकते थे, पर जब तक इनसे बना ये अपना कार्य स्वयं करते थे और सेवा किसी से लेते भी नही थे।
भगवान ने स्वयं सेवक बनकर की थी सेवा
तब श्री जगन्नाथजी स्वयं सेवक बनकर इनके घर पहुंचे और माधवदासजी को कहा की हम आपकी सेवा कर दें। इसके बाद माधवदास जी के वस्त्रों और शरीर को जगन्नाथ भगवान स्वयं साफ करते थे। कोई अपना भी इतनी सेवा नही कर सके, जितनी जगन्नाथ भगवान ने भक्त माधव दास जी की करी है।
भक्त माधव दास जी पर प्रभु का स्नेह
माधवदासजी को होश आया,तब उन्होंने तुरंत पहचान लीया की यह तो मेरे प्रभु ही हैं। एक दिन उन्होंने पूछ लिया- प्रभु आप तो त्रिभुवन के मालिक हो, स्वामी हो, आप मेरी सेवा कर रहे हो आप चाहते तो मेरा ये रोग भी तो दूर कर सकते थे, रोग दूर कर देते तो ये सब करना नही पड़ता”
प्रारब्द्ध भोगना पड़ता है
ठाकुरजी कहते हां देखो माधव! मुझसे भक्तों का कष्ट नहीं सहा जाता, इसी कारण तुम्हारी सेवा मैंने स्वयं की। जो प्रारब्द्ध होता है उसे तो भोगना ही पड़ता है। इसीलिए मैंने तुम्हारी सेवा की।
कष्टों से सहज ही पार कर देते है प्रभु
इसके बाद भगवान कहते हैं अब तुम्हारे प्रारब्द्ध में ये 15 दिन का रोग और बचा है, इसलिए 15 दिन का रोग तू मुझे दे दे और वो रोग जगन्नाथ प्रभु ने माधवदास जी से ले लिया।
आज भी इसलिए जगन्नाथ भगवान होते है बीमार
-वो तो हो गयी तब की बात पर भक्त वत्सलता देखो आज भी वर्ष में एक बार जगन्नाथ भगवान को स्नान कराया जाता है ( जिसे स्नान यात्रा कहते है )
-स्नान यात्रा करने के बाद हर साल 15 दिन के लिए जगन्नाथ भगवान आज भी बीमार पड़ते है।
-15 दिन के लिए मंदिर बंद कर दिया जाता है कभी भी जगनाथ भगवान की रसोई बंद नही होती पर इन 15 दिन के लिए उनकी रसोई बंद कर दी जाती है।
-भगवान को 56 भोग नही खिलाया जाता, ( बीमार हो तो परहेज़ तो रखना पड़ेगा )
प्रभु को लगाया जाता है काढ़ो का भोग
15 दिन जगन्नाथ भगवान को काढ़ो का भोग लगता है | जगन्नाथ धाम मंदिर में तो भगवान की बीमारी की जांच करने के लिए हर दिन वैद्य भी आते हैं।
🌺 फलों का रस भी दिया जाता है। रोज शीतल लेप भी लगया जाता है। बीमार के दौरान उन्हें फलों का रस, छेना का भोग लगाया जाता है। रात में सोने से पहले मीठा दूध अर्पित किया जाता है।
-भगवान जगन्नाथ बीमार होने के बाद 15दिनों तक आराम करते है। दिरों पट भी बंद कर दिए जाते है और उनकी सेवा की जाती है।
-पूरी तरह से ठीक होने के बाद जगन्नाथ यात्रा निकलती है।
खुद पे तकलीफ लेकर अपने भक्तो का जीवन सुखमयी बनाये। ऐसे तो सिर्फ मेरे भगवान ही हो सकते हैं।