आगरालीक्स.. आगरा में गर्भवती महिलाओं के ब्लड के सैंपल की जांच से पता चल सकता है कि गर्भ में पल रहे शिशु को कोई बीमारी तो नहीं है, एक महिला गर्भधारण करती है तो उसे और उसके परिवारीजनों को कुछ ही महीने बात यह चिंता सताने लगती है कि गर्भ में पल रहा शिशु भविष्य में स्वस्थ रहेगा या नहीं। इस चिंता को दूर करने के लिए नाॅन इनवेसिव प्रीनेटल स्क्रीनिंग का सहारा लिया जा सकता है। इस परीक्षण के जरिए यह देखा जाता है कि गर्भ में शिशु को किसी तरह की बीमारी तो नहीं है या भविष्य में कोई बीमारी होने की संभावना तो नहीं है। यह जानकारी विशेषज्ञों ने दी।
रेनबो हाॅस्पिटल में अब नाॅन इनवेसिव प्रीनेटल स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध है। सोमवार को इस पर एक कार्यशाला यहां के चिकित्सकों और स्टाॅफ के लिए आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने बताया कि जब एक महिला नौ सप्ताह की गर्भवती होती है तो नाॅन इनवेसिव प्रीनेटल स्क्रींिनंग (एनआईपीटी) किया जा सकता है। किसी सामान्य ब्लड टेस्ट की तरह ही इसमें आपकी बांह से रक्त का नमूना लिया जाता है। इस नमूने को विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है। बंगलुरू की मैडजीनोम लैब मंे पीजीएस और पीजीडी साइंटिफिक अफेयर्स मैनेजर डा. सैम बालू ने बताया कि एनआईपीटी गुणसूत्र की असामान्यताओं का पता लगाने के लिए की जाने वाली स्क्रीनिंग है। इसके जरिए बच्चे के जन्म से काफी पहले हाडन सिंड्रोम जैसी असामान्य क्रोमोसोम संबंधी दिक्कतों का पता लगाया जा सकता है। अध्ययनों में इस तकनीक को काफी सटीक और सुरक्षित माना गया है। ऐसा माना जाता है कि यह टेस्ट 99 प्रतिशत तक बीमारी का सही तरीके से पता लगाने के लिए कारगर है।
इस अवसर पर डा. निहारिका मल्होत्रा, डा. ऋषभ बोरा, अस्पताल के मेडिकल सुप्रिटेंडेंट डा. राजीव लोचन शर्मा, डा. मनप्रीत शर्मा, डा. शैमी बंसल, डा. शैली गुप्ता, डा. मनोज शर्मा आदि मौजूद थे।

जेनेटिक गड़बड़ियों के बोझ को कम करने का रास्ता…..
रेनबो हाॅस्पिटल के निदेशक डा. नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि एनआईपीटी गर्भस्थ शिशु के जन्म से काफी पहले डाउन सिंड्रोम जैसी असामान्य क्रोमोसोम संबंधी गड़बड़ियों का पता लगाने का प्रभावी, सटीक और सुरक्षित तरीका साबित होगा। यह किसी खास उम्र के लोगों के लिए नहीं है बल्कि बच्चे की सेहत सुनिश्चित करने के लिए सभी गर्भवती महिलाओं को मुहैया कराया जा सकता है। रेनबो आईवीएफ की निदेशक डा. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि यह एक बेहतर जागरूकता और स्वीकृति के साथ यह टेस्ट हमारे देश में जेनेटिक गड़बड़ियों के बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। रेनबो आईवीएफ के डा. केशव मल्होत्रा ने बताया कि मां की बांह से लिए गए खून के मामूली नमूने से एनआईपीटी स्क्रीनिंग से भ्रूण के कोशिकामुक्त डीएनए का विश्लेषण और क्रोमोसोम संबंधी दिक्कतों की जांच की जाती है। यह परीक्षण पूरी तरह सुरक्षित है।