
कागरौल के गांव गढ़ी कालिया निवासी गोविंद सिंह चाहर (45) पुत्र बनवारीलाल 1986 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह एएसआई के पद पर थे। उनकी ड्यूटी पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश बार्डर पर थी।
आतंकवादियों से किया मुकाबला
रविवार रात दर्जनभर आतंकियों के देश में घुसने की सूचना मिली थी। गोविंद सिंह समेत करीब नौ जवानों ने उनका पीछा शुरू कर दिया।
कुछ चलकर श्यामा नदी के पास गोविंद सिंह का आतंकवादियों से मुकाबला हुआ। गढ़ी कालिया के बहादुर बेटे ने बड़ी देर तक उनका सामना किया। उधर से अंधाधुंध गोलियां चलती रहीं लेकिन पराक्रमी ने अपना मोर्चा नहीं छोड़ा।
देश के दुश्मन पूरी तैयारी के साथ आए थे। गोविंद सिंह उनके रास्ते में चट्टान बनकर खड़े हो गए। गोली लगने पर भी पराक्रमी के कदम पीछे नहीं हटे और लड़ते-लड़ते शहीद हो गए।
उनकी शहादत की सूचना रविवार देर रात परिवार को मिली तो कोहराम मच गया। सोमवार को हजारों लोग शहादत को नमन करने पहुंचे। सोमवार को गम में डूबे गांव में किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला।
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